नई दिल्ली/कोलकाता: पश्चिम बंगाल की राजनीति में तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर चल रहे संगठनात्मक विवाद ने अब चुनावी मैदान में नया मोड़ ले लिया है। चुनाव आयोग ने अंतरिम आदेश जारी कर दोनों प्रतिद्वंद्वी गुटों को ‘ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ नाम और पार्टी के आरक्षित ‘फूल और घास’ चुनाव चिह्न के इस्तेमाल से रोक दिया है। आयोग ने दोनों पक्षों को शुक्रवार सुबह 11 बजे तक तीन-तीन पसंदीदा नाम और तीन-तीन चुनाव चिह्न बताने को कहा है।
यह फैसला ऐसे समय आया है, जब पश्चिम बंगाल की नंदीग्राम और रेजीनगर विधानसभा सीटों पर 6 अक्टूबर को उपचुनाव होने हैं और दोनों गुटों ने इन सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे हैं।
चुनाव आयोग ने क्यों फ्रीज किया TMC का नाम और सिंबल?
चुनाव आयोग के सामने तृणमूल कांग्रेस के संगठन, अधिकृत प्रतिनिधित्व, पार्टी के नाम और चुनाव चिह्न को लेकर दो पक्षों ने दावा पेश किया है। आयोग के मुताबिक विवाद पर अंतिम फैसला Election Symbols (Reservation and Allotment) Order, 1968 के पैरा 15 के तहत विस्तृत सुनवाई के बाद किया जाना है।
लेकिन उपचुनाव की समय सीमा बेहद नजदीक होने के कारण आयोग ने फिलहाल अंतरिम व्यवस्था लागू की है। इसका उद्देश्य दोनों पक्षों को चुनाव में अलग-अलग पहचान देकर बराबरी का अवसर देना है।
दोनों गुटों से मांगे गए तीन-तीन नाम और चुनाव चिह्न
आयोग ने दोनों पक्षों को निर्देश दिया है कि वे अपनी पसंद के तीन नाम प्राथमिकता क्रम में दें। इसके साथ ही चुनाव आयोग की ओर से उपलब्ध ‘फ्री सिंबल’ की सूची में से तीन चुनाव चिह्न भी प्राथमिकता के आधार पर बताने होंगे।
आयोग उपलब्ध विकल्पों में से किसी एक नाम और चुनाव चिह्न को संबंधित गुट के लिए मंजूर कर सकता है। यह व्यवस्था फिलहाल उपचुनाव के संदर्भ में अंतरिम है और TMC के मूल नाम व चुनाव चिह्न पर अंतिम फैसला बाद में हो सकता है।
नंदीग्राम और रेजीनगर में आमने-सामने होंगे दोनों गुट
नंदीग्राम और रेजीनगर उपचुनाव इस विवाद की वजह से खास तौर पर महत्वपूर्ण हो गए हैं। दोनों गुटों ने पहले TMC के नाम और पारंपरिक चुनाव चिह्न के साथ उम्मीदवार मैदान में उतारे थे।
उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट ने नंदीग्राम से संचिता प्रधान (डे) और रेजीनगर से रबीउल आलम चौधरी को उम्मीदवार बनाया है।
दूसरी ओर, ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले बागी गुट की ओर से नंदीग्राम से मोहम्मद एतेशामुल हक और रेजीनगर से सफीउद्दीन शेख को मैदान में उतारा गया है।
अब चुनाव आयोग के अंतरिम आदेश के बाद दोनों पक्षों को अलग-अलग चुनावी पहचान के साथ चुनाव लड़ना होगा।
नंदीग्राम क्यों है इतनी महत्वपूर्ण सीट?
नंदीग्राम पश्चिम बंगाल की राजनीति में लंबे समय से बेहद अहम रहा है। 2007 का भूमि अधिग्रहण विरोधी आंदोलन इस क्षेत्र की राजनीति में बड़ा मोड़ माना जाता है। इसी आंदोलन ने ममता बनर्जी और तृणमूल कांग्रेस की राजनीतिक पकड़ मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।
2021 के विधानसभा चुनाव में ममता बनर्जी ने नंदीग्राम से चुनाव लड़ा था, जहां उनका मुकाबला शुभेंदु अधिकारी से हुआ। शुभेंदु अधिकारी उस समय BJP के उम्मीदवार थे और उन्होंने ममता बनर्जी को हराया था।
इसके बाद नंदीग्राम और शुभेंदु अधिकारी का नाम पश्चिम बंगाल की चुनावी राजनीति में लगातार चर्चा में रहा।
2026 में भी नंदीग्राम की राजनीति रही चर्चा में
2026 के विधानसभा चुनाव में शुभेंदु अधिकारी ने नंदीग्राम के साथ भवानीपुर से भी चुनाव लड़ा और दोनों सीटों पर जीत दर्ज की।
भवानीपुर में उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक शुभेंदु अधिकारी को 73,917 वोट, जबकि ममता बनर्जी को 58,812 वोट मिले। यानी अंतर 15,105 वोट रहा। बाद में शुभेंदु अधिकारी ने भवानीपुर सीट अपने पास रखी और नंदीग्राम विधानसभा सीट से इस्तीफा दिया। इसके बाद नंदीग्राम सीट खाली हुई और उपचुनाव की स्थिति बनी।
TMC के संगठन पर भी उठे सवाल
चुनाव आयोग का अंतरिम आदेश केवल चुनाव चिह्न तक सीमित नहीं है। इसके पीछे तृणमूल कांग्रेस के संगठनात्मक नियंत्रण को लेकर चल रहा विवाद भी महत्वपूर्ण है।
दोनों पक्ष पार्टी के संगठन, नेतृत्व और आधिकारिक प्रतिनिधित्व पर अपना दावा कर रहे हैं। आयोग को यह तय करना है कि पार्टी के आधिकारिक नाम और आरक्षित चुनाव चिह्न पर किस पक्ष का दावा स्वीकार किया जाए।
फिलहाल आयोग ने किसी एक गुट को TMC का आधिकारिक नाम और ‘फूल-घास’ वाला चुनाव चिह्न नहीं दिया है। अंतिम निर्णय अलग प्रक्रिया के तहत होना है।
सिर्फ बंगाल नहीं, इन सीटों पर भी होंगे उपचुनाव
आगामी उपचुनावों में पश्चिम बंगाल के अलावा अन्य राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों की सीटें भी शामिल हैं।
तमिलनाडु की दो विधानसभा सीटें
तमिलनाडु की मदुरांतकम और धारापुरम विधानसभा सीटें भी उपचुनाव के कारण चर्चा में हैं। इन सीटों के लिए राजनीतिक दलों ने अपने उम्मीदवारों की घोषणा शुरू कर दी है।
पुडुचेरी की थट्टानचावड़ी सीट
पुडुचेरी की थट्टानचावड़ी विधानसभा सीट भी उपचुनाव के लिए महत्वपूर्ण है। 2026 के चुनावी घटनाक्रम में इस सीट पर एन. रंगासामी सहित प्रमुख उम्मीदवारों के परिणाम दर्ज हैं।
असम की नगांव लोकसभा सीट
असम की नगांव लोकसभा सीट भी उपचुनावों की सूची में शामिल है। सीट से जुड़ी चुनावी प्रक्रिया और मतदाता सूची पहले ही जारी की जा चुकी है।
अब आगे क्या होगा?
चुनाव आयोग के इस अंतरिम आदेश के बाद दोनों TMC गुटों के सामने तत्काल चुनौती अपनी अलग चुनावी पहचान तय करने की है। उन्हें आयोग को पसंदीदा नाम और फ्री चुनाव चिह्न बताने हैं। इसके बाद आयोग तय करेगा कि उपचुनाव में कौन-सा नाम और चुनाव चिह्न किस गुट को आवंटित किया जाएगा।
साथ ही, TMC के मूल नाम और पारंपरिक चुनाव चिह्न पर अंतिम अधिकार किसे मिलेगा, इसका फैसला बाद की विस्तृत प्रक्रिया में होगा।
पश्चिम बंगाल के नंदीग्राम और रेजीनगर उपचुनाव अब बना दिलचस्प
पश्चिम बंगाल के नंदीग्राम और रेजीनगर उपचुनाव अब केवल दो विधानसभा सीटों की चुनावी लड़ाई नहीं रह गए हैं। चुनाव आयोग के अंतरिम आदेश ने TMC के नाम और उसके पारंपरिक चुनाव चिह्न को लेकर चल रहे विवाद को सीधे चुनावी प्रक्रिया से जोड़ दिया है।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि उपचुनाव में दोनों गुट किन नए नामों और चुनाव चिह्नों के साथ मैदान में उतरेंगे, और आयोग TMC के नाम तथा ‘फूल-घास’ वाले आरक्षित चुनाव चिह्न पर अंतिम निर्णय कब करता है।
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Written & Edit by : Chandan Patel

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