नई दिल्ली: दुनिया जब युद्ध, आतंकवाद, आर्थिक तनाव और बदलती वैश्विक व्यवस्था के बीच नए रास्ते तलाश रही है, ऐसे समय में भारत की राजधानी दिल्ली से एक बड़ा कूटनीतिक संदेश निकला है। 18वें BRICS शिखर सम्मेलन के दौरान सदस्य देशों ने न सिर्फ आर्थिक सहयोग बढ़ाने की प्रतिबद्धता दोहराई, बल्कि आतंकवाद, वैश्विक व्यापार, अंतरिक्ष सहयोग और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार जैसे अहम मुद्दों पर भी साझा रुख सामने रखा।
भारत की अध्यक्षता में आयोजित BRICS 2026 में 11 सदस्य देशों के साथ पार्टनर देशों की भागीदारी रही। यह समूह दुनिया की करीब आधी आबादी और लगभग 40 प्रतिशत वैश्विक GDP का प्रतिनिधित्व करता है।
नई दिल्ली घोषणा को BRICS की बढ़ती वैश्विक भूमिका और बदलती विश्व व्यवस्था में ग्लोबल साउथ की आवाज मजबूत करने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है।
दिल्ली घोषणा: पांच बड़े मुद्दों पर दुनिया की नजर
18वें BRICS सम्मेलन में स्वीकार किए गए New Delhi Declaration 2026 में कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर साझा प्रतिबद्धताएं सामने आईं। इनमें पांच बातें खास तौर पर भारत की कूटनीतिक प्राथमिकताओं से जुड़ी दिखाई देती हैं।
1. पहलगाम हमले का जिक्र, आतंकवाद के खिलाफ सख्त संदेश
BRICS घोषणा पत्र में पहलगाम आतंकी हमले की निंदा की गई। घोषणा में आतंकवाद के खिलाफ जीरो टॉलरेंस, आतंकियों को जवाबदेह ठहराने और आतंकवादी सुरक्षित ठिकानों के खिलाफ कार्रवाई की जरूरत पर जोर दिया गया।
खास बात यह रही कि घोषणा पत्र में किसी देश का नाम लिए बिना आतंकवाद और उसके वित्तपोषण के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय सहयोग की आवश्यकता दोहराई गई। चीन समेत BRICS देशों का इस साझा दस्तावेज पर सहमत होना भारत के लिए महत्वपूर्ण कूटनीतिक उपलब्धि माना जा रहा है।
2. युद्ध नहीं, बातचीत और कूटनीति पर जोर
दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में जारी संघर्षों के बीच BRICS ने विवादों को बातचीत, परामर्श और कूटनीति के जरिए सुलझाने पर जोर दिया।
मध्य-पूर्व की स्थिति, यूक्रेन युद्ध और अंतरराष्ट्रीय व्यापार एवं समुद्री आवाजाही पर पड़ रहे असर को लेकर भी चिंता जताई गई। घोषणा में अंतरराष्ट्रीय कानून, संप्रभुता और शांतिपूर्ण समाधान के महत्व को रेखांकित किया गया।
यानी दिल्ली से संदेश साफ था—युद्ध जितना लंबा चलेगा, उसकी कीमत सिर्फ लड़ने वाले देशों को नहीं बल्कि पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था और आम जनता को चुकानी पड़ेगी।
3. व्यापार और Global Value Chains को मजबूत करने की तैयारी
BRICS ने वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं को अधिक मजबूत, भरोसेमंद और लचीला बनाने पर जोर दिया।
एकतरफा टैरिफ और व्यापार में बढ़ती बाधाओं को लेकर चिंता व्यक्त की गई। सदस्य देशों के बीच व्यापार, निवेश, स्थानीय मुद्राओं में लेन-देन और भुगतान व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में सहयोग बढ़ाने की बात भी सामने आई है।
यह पहल ऐसे समय में महत्वपूर्ण है जब वैश्विक व्यापार लगातार भू-राजनीतिक तनाव, प्रतिबंधों और टैरिफ की राजनीति से प्रभावित हो रहा है।
4. अंतरिक्ष से पर्यावरण तक – Remote Sensing Satellite Constellation
BRICS देशों ने अंतरिक्ष तकनीक के जरिए पर्यावरण संरक्षण, आपदा प्रबंधन और जलवायु निगरानी में सहयोग बढ़ाने की दिशा में कदम आगे बढ़ाया है।
BRICS Remote Sensing Satellite Constellation (RSSC) के तहत अंतरिक्ष से मिलने वाले डेटा के इस्तेमाल और सहयोग को महत्व दिया गया है। भारत, चीन और रूस समेत सदस्य देशों की अंतरिक्ष क्षमताओं के बीच सहयोग को आगे बढ़ाने की दिशा में भी काम जारी है।
इसका सीधा फायदा प्राकृतिक आपदाओं, जलवायु परिवर्तन, पर्यावरण निगरानी और आपदा प्रबंधन जैसे क्षेत्रों में मिल सकता है।
5. UNSC सुधार: ग्लोबल साउथ को ज्यादा हिस्सेदारी
BRICS घोषणा का सबसे महत्वपूर्ण राजनीतिक संदेश संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद यानी UNSC में सुधार को लेकर रहा।
BRICS ने वैश्विक संस्थानों में विकासशील देशों की भागीदारी और प्रतिनिधित्व बढ़ाने की जरूरत दोहराई। घोषणा में भारत और ब्राजील को संयुक्त राष्ट्र में, जिसमें सुरक्षा परिषद भी शामिल है, बड़ी भूमिका देने की चीन और रूस की प्रतिबद्धता भी दर्ज है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी कहा कि वैश्विक दक्षिण को सिर्फ वैश्विक नियमों का पालन करने वाला नहीं, बल्कि नियम बनाने में सक्रिय भूमिका निभाने वाला पक्ष बनना चाहिए।
भारत की कूटनीति का बढ़ता प्रभाव
BRICS 2026 का सबसे बड़ा संदेश यही है कि भारत अब सिर्फ आर्थिक सहयोग की बात करने वाला देश नहीं, बल्कि बदलती वैश्विक व्यवस्था में संवाद और सहमति का मंच तैयार करने वाली ताकत के रूप में अपनी भूमिका मजबूत कर रहा है।
एक ही मंच पर रूस, चीन, ईरान, भारत, सऊदी अरब, UAE और अन्य प्रमुख उभरती अर्थव्यवस्थाओं का साथ बैठना अपने आप में महत्वपूर्ण है। इन देशों के हित कई मुद्दों पर अलग-अलग हैं, फिर भी साझा घोषणा पर सहमति बनना BRICS की बढ़ती राजनीतिक उपयोगिता को दिखाता है।
BRICS अब सिर्फ आर्थिक संगठन नहीं
BRICS की शुरुआत आर्थिक सहयोग के विचार से हुई थी, लेकिन दो दशक में इसका एजेंडा काफी व्यापक हो चुका है।
आज इसमें व्यापार और निवेश के साथ-साथ :
- आतंकवाद के खिलाफ सहयोग
- वैश्विक शासन व्यवस्था
- ऊर्जा और खाद्य सुरक्षा
- स्वास्थ्य
- जलवायु परिवर्तन
- आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस
- अंतरिक्ष तकनीक
- डिजिटल भुगतान
- आपूर्ति श्रृंखला
- Global South की आवाज
जैसे मुद्दे शामिल हो चुके हैं।
भारत की 2026 अध्यक्षता में इसी व्यापक एजेंडे को आगे बढ़ाने पर जोर दिया गया। भारत ने अपनी अध्यक्षता की थीम “Building for Resilience, Innovation, Cooperation and Sustainability” रखी थी।
दुनिया में तनाव के बीच दिल्ली से शांति का संदेश
आज दुनिया दोहरी चुनौती से गुजर रही है। एक तरफ युद्ध और भू-राजनीतिक तनाव हैं, तो दूसरी तरफ महंगाई, ऊर्जा संकट, व्यापारिक बाधाएं और आपूर्ति श्रृंखला का दबाव।
ऐसे समय में दिल्ली में हुआ BRICS सम्मेलन सिर्फ नेताओं की बैठक नहीं रहा। यह उस बदलती दुनिया की तस्वीर भी है, जहां ग्लोबल साउथ अपने लिए वैश्विक निर्णय प्रक्रिया में ज्यादा मजबूत आवाज चाहता है।
भारत ने BRICS के जरिए यही संदेश देने की कोशिश की है कि दुनिया को टकराव से ज्यादा सहयोग, संवाद और साझा विकास की जरूरत है।
18वें BRICS सम्मेलन में दिल्ली से निकला बड़ा संदेश
18वें BRICS सम्मेलन का संदेश सिर्फ पांच फैसलों तक सीमित नहीं है। इसके पीछे एक बड़ी तस्वीर है।
आतंकवाद के खिलाफ एकजुटता, युद्ध के बजाय बातचीत, व्यापार में सहयोग,अंतरिक्ष तकनीक का शांतिपूर्ण इस्तेमाल और UNSC में सुधार – ये पांचों मुद्दे मिलकर बदलती वैश्विक व्यवस्था की दिशा का संकेत देते हैं।
BRICS की असली परीक्षा अब घोषणा पत्र से आगे शुरू होगी। इन फैसलों को जमीन पर कितना लागू किया जाता है और सदस्य देश अपने मतभेदों के बावजूद कितनी दूर तक साथ चलते हैं, यही तय करेगा कि दिल्ली सम्मेलन वैश्विक कूटनीति में कितनी बड़ी विरासत छोड़ता है।
लेकिन इतना जरूर है – BRICS 2026 ने दिल्ली से दुनिया को यह संदेश दिया है कि वैश्विक दक्षिण अब सिर्फ दर्शक नहीं, बल्कि दुनिया के भविष्य की दिशा तय करने वाली ताकत बनना चाहता है।
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Written & Edit by : Chandan Patel

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