लक्ष्मीपुर के सबलपुर में रैयती जमीन पर पंचायत सरकार भवन निर्माण का मामला पटना हाईकोर्ट पहुंचा। अदालत ने अंचलाधिकारी को विवादित जमीन की तत्काल मापी कराने और रैयती भूमि पाए जाने पर निर्माण रोकने का निर्देश दिया।
जमुई/लक्ष्मीपुर। सरकारी भवन बनाने की जमीन को लेकर शुरू हुआ विवाद अब पटना हाईकोर्ट तक पहुंच गया है। लक्ष्मीपुर प्रखंड के दिग्घी पंचायत के सबलपुर गांव में निजी जमीन पर पंचायत सरकार भवन निर्माण कराने के आरोपों को अदालत ने गंभीरता से लिया है। पटना हाईकोर्ट ने लक्ष्मीपुर के अंचलाधिकारी को विवादित स्थल की अविलंब मापी कराने का निर्देश दिया है।
अदालत ने यह भी स्पष्ट किया है कि यदि जांच और मापी में जमीन रैयती यानी निजी स्वामित्व की पाई जाती है तो वहां चल रहे निर्माण कार्य को तत्काल रोक दिया जाए। मामले में राज्य सरकार को भी तीन सप्ताह के भीतर जवाबी हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया गया है।
क्या है पूरा मामला?
यह मामला सिविल रिट क्षेत्राधिकार वाद संख्या 13644/2026, प्रमिला देवी बनाम बिहार राज्य एवं अन्य से जुड़ा है। मामले की सुनवाई पटना हाईकोर्ट में न्यायमूर्ति अजीत कुमार की एकलपीठ ने की।
याचिकाकर्ता प्रमिला देवी की ओर से अधिवक्ता राजेश कुमार सिन्हा ने अदालत के समक्ष पक्ष रखते हुए आरोप लगाया कि उनकी पुश्तैनी रैयती जमीन पर बिना विधिवत भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया पूरी किए पंचायत सरकार भवन का निर्माण कराया जा रहा था।
याचिकाकर्ता का कहना है कि जिस जमीन को सरकारी भूमि बताया जा रहा है, वह वास्तव में उनके परिवार की पुश्तैनी निजी संपत्ति है।
18 पेड़ काटने का भी आरोप
मामले में निजी जमीन पर निर्माण के साथ-साथ पेड़ों की कटाई का भी आरोप लगाया गया है। याचिकाकर्ता पक्ष के अनुसार, निर्माण कार्य के दौरान उनकी जमीन पर लगे करीब 18 फलदार और इमारती पेड़ काट दिए गए।
इनमें आम, महुआ और सागवान जैसे पेड़ शामिल बताए गए हैं।
परिवार का आरोप है कि उनकी अनुमति के बिना पेड़ों को काटा गया और निजी जमीन पर निर्माण कार्य आगे बढ़ाया गया।
प्रशासन पर मिलीभगत का आरोप
पीड़ित परिवार ने स्थानीय अंचल प्रशासन, पंचायती राज विभाग और पंचायत प्रतिनिधियों पर मिलीभगत का गंभीर आरोप लगाया है। उनका दावा है कि उनकी पुश्तैनी जमीन को सरकारी भूमि बताकर कब्जे में लेने की कोशिश की जा रही थी।
परिवार के अनुसार, उन्होंने इस मामले को लेकर जिले के वरीय प्रशासनिक अधिकारियों के समक्ष भी शिकायत की थी। हालांकि, आरोप है कि लगातार शिकायत के बावजूद जब उन्हें राहत नहीं मिली तो उन्हें न्याय के लिए पटना हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाना पड़ा।
हालांकि, प्रशासन या संबंधित विभाग की ओर से लगाए गए इन आरोपों पर अंतिम स्थिति जमीन की मापी और आधिकारिक जांच रिपोर्ट के बाद ही स्पष्ट होगी।
हाईकोर्ट ने क्या दिया आदेश?
मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने विवादित जमीन की स्थिति स्पष्ट करने के लिए तत्काल मापी कराने का निर्देश दिया।
अदालत के निर्देश के मुताबिक:
- लक्ष्मीपुर के अंचलाधिकारी विवादित स्थल की अविलंब मापी कराएंगे।
- मापी के जरिए जमीन की वास्तविक प्रकृति और स्वामित्व की स्थिति स्पष्ट की जाएगी।
- यदि जमीन रैयती पाई जाती है तो निर्माण कार्य तत्काल रोकना होगा।
- राज्य सरकार को तीन सप्ताह के भीतर जवाबी हलफनामा दाखिल करना होगा।
- मापी और जांच के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
कोर्ट के आदेश के बाद निर्माण पर रोक
हाईकोर्ट के निर्देश के बाद लक्ष्मीपुर अंचल प्रशासन सक्रिय हो गया है। विवादित स्थल की जमीन की मापी की प्रक्रिया शुरू होने की बात सामने आई है। वहीं, कोर्ट के आदेश के बाद निर्माण कार्य फिलहाल ठप बताया जा रहा है।
अब पूरे मामले में जमीन की मापी और प्रशासनिक रिपोर्ट महत्वपूर्ण होगी। मापी में जमीन सरकारी निकलती है या प्रमिला देवी के पक्ष में रैयती भूमि की पुष्टि होती है, इससे आगे की कार्रवाई की दिशा तय होगी।

मापी रिपोर्ट पर टिकी निगाहें
इस पूरे विवाद में सबसे अहम सवाल जमीन के वास्तविक स्वामित्व का है। हाईकोर्ट के निर्देश के बाद अब अंचल प्रशासन की मापी रिपोर्ट पर सभी की नजरें टिकी हैं।
यदि जमीन रैयती साबित होती है तो निजी भूमि पर सरकारी भवन निर्माण को लेकर आगे कानूनी और प्रशासनिक कार्रवाई का रास्ता खुल सकता है। वहीं, यदि जमीन सरकारी पाई जाती है तो निर्माण को लेकर याचिकाकर्ता के दावे की स्थिति अलग होगी।
फिलहाल हाईकोर्ट के आदेश के बाद मामले ने नया मोड़ ले लिया है और अब अगली कार्रवाई प्रशासन की जांच रिपोर्ट तथा राज्य सरकार के जवाब पर निर्भर करेगी।
नोट: इस खबर में लगाए गए आरोप संबंधित पक्ष के दावों और अदालत में रखे गए पक्ष के आधार पर हैं। आरोपों की अंतिम पुष्टि सक्षम प्रशासनिक जांच और न्यायालय की आगे की कार्यवाही के बाद ही मानी जाएगी।
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Written & Edit by : Chandan Patel

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