जमुई/खैरा। खैरा प्रखंड क्षेत्र में लगातार हो रही मूसलाधार बारिश ने अब ग्रामीण इलाकों की सड़क और पुल-पुलियों की स्थिति बिगाड़ दी है। सकदरी, लंगरीटांड़ और ताराटांड़ गांव को कुरवाटांड़ चौक से जोड़ने वाली महत्वपूर्ण ग्रामीण सड़क पर बनी पुलिया तेज बारिश के पानी के बहाव में पूरी तरह ध्वस्त हो गई। पुलिया के टूटने से आधा दर्जन से अधिक गांवों के लोगों के सामने आवागमन का बड़ा संकट खड़ा हो गया है।
ग्रामीणों के मुताबिक, यह सड़क आसपास के गांवों के लिए कुरवाटांड़ चौक, बाजार और प्रखंड मुख्यालय तक पहुंचने का महत्वपूर्ण रास्ता थी। पहले से ही ललदैया कजवे के क्षतिग्रस्त होने के कारण मुख्य रास्ते पर आवागमन प्रभावित था। ऐसे में यह ग्रामीण सड़क लोगों के लिए वैकल्पिक रास्ता बनी हुई थी। अब पुलिया के बह जाने से वह रास्ता भी बंद हो गया है।
तेज बारिश के बीच ढह गई पुलिया
बताया जा रहा है कि पिछले कई दिनों से क्षेत्र में लगातार बारिश हो रही है। बारिश के बाद ग्रामीण सड़क के नीचे बने पुलिया के आसपास पानी का दबाव बढ़ गया। तेज बहाव के कारण पुलिया का ढांचा क्षतिग्रस्त होकर पूरी तरह जमीन में समा गया।
पुलिया टूटने के बाद इस रास्ते से दो पहिया और चार पहिया वाहनों की आवाजाही लगभग पूरी तरह ठप हो गई है। ग्रामीणों के सामने अब गांव से बाहर निकलने के लिए दूसरे रास्तों का सहारा लेने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा है।
पहले ललदैया कजवे ने बढ़ाई परेशानी, अब दूसरा रास्ता भी बंद
ग्रामीणों का कहना है कि ललदैया कजवे के क्षतिग्रस्त होने के कारण पहले से ही आवागमन की परेशानी बनी हुई थी। मुख्य रास्ते पर वाहनों की आवाजाही प्रभावित होने के बाद सकदरी, लंगरीटांड़, ताराटांड़ और आसपास के गांवों के लोग कुरवाटांड़ चौक तक पहुंचने के लिए इसी सड़क का इस्तेमाल कर रहे थे।
अब इस वैकल्पिक सड़क की पुलिया भी टूट जाने से ग्रामीणों की मुश्किल कई गुना बढ़ गई है। लोगों को बाजार, अस्पताल, सरकारी कार्यालय और अन्य जरूरी कामों के लिए लंबा चक्कर लगाना पड़ रहा है।
मरीजों और जरूरतमंदों को सबसे ज्यादा परेशानी
सड़क संपर्क टूटने का सबसे गंभीर असर आपात स्थिति में देखने को मिल सकता है। ग्रामीणों के अनुसार, किसी व्यक्ति के बीमार पड़ने या मरीज को अस्पताल ले जाने की स्थिति में समय पर वाहन पहुंचाना मुश्किल हो गया है।
बारिश के कारण वैकल्पिक कच्चे रास्तों की हालत भी खराब है। जगह-जगह कीचड़ और पानी जमा होने से पैदल चलना तक मुश्किल हो रहा है। ऐसे में बुजुर्गों, बच्चों और मरीजों को विशेष परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
कई किलोमीटर का चक्कर लगाने को मजबूर ग्रामीण
पुलिया ध्वस्त होने के बाद गांवों के लोगों को अपने जरूरी काम के लिए दूसरे रास्तों से जाना पड़ रहा है। इससे समय और खर्च दोनों बढ़ रहे हैं। लगातार बारिश के बीच वैकल्पिक रास्तों पर भी जलजमाव और फिसलन होने के कारण सफर जोखिम भरा बना हुआ है।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि जल्द कोई अस्थायी व्यवस्था नहीं की गई तो आने वाले दिनों में परेशानी और बढ़ सकती है।
ग्रामीण कार्य विभाग से तत्काल कार्रवाई की मांग
पुलिया टूटने के बाद ग्रामीणों ने प्रशासन और ग्रामीण कार्य विभाग से तत्काल कार्रवाई की मांग की है। लोगों की मांग है कि अधिकारी मौके पर पहुंचकर क्षतिग्रस्त पुलिया का स्थलीय निरीक्षण करें और फिलहाल डायवर्सन या अन्य वैकल्पिक व्यवस्था कराकर आवागमन बहाल किया जाए।
इसके साथ ही ग्रामीणों ने लंबे समय से क्षतिग्रस्त ललदैया कजवे की मरम्मत कराने की भी मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि बरसात के दौरान यदि दोनों रास्ते बंद रहे तो कई गांवों का प्रखंड मुख्यालय और बाजार से संपर्क गंभीर रूप से प्रभावित हो जाएगा।
बारिश ने खोल दी ग्रामीण सड़कों की पोल
लगातार बारिश ने एक बार फिर ग्रामीण इलाकों में सड़क और पुल-पुलियों की स्थिति पर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि बरसात से पहले यदि संवेदनशील पुलिया और कजवे की जांच तथा जरूरी मरम्मत कर दी जाती, तो ऐसी स्थिति से काफी हद तक बचा जा सकता था।
अब ग्रामीणों की नजर प्रशासन की कार्रवाई पर है। लोगों को उम्मीद है कि संबंधित विभाग जल्द मौके पर पहुंचकर निरीक्षण करेगा और कम से कम अस्थायी तौर पर रास्ता बहाल करने की व्यवस्था करेगा।
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Written & Edit by : Chandan Patel

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