नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली में DTC के अंतर्गत निजी ऑपरेटरों के तहत चलने वाली बसों के ड्राइवरों की हड़ताल ने बुधवार, 16 सितंबर को भी सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था पर असर डाला। बुराड़ी, दिलशाद गार्डन, केशोपुर, ग्रेटर कैलाश, झिलमिल और कालकाजी समेत कई डिपो से निजी बसों के सड़कों पर नहीं निकलने के कारण यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ा।
वेतन वृद्धि, मेडिकल सुविधा, सालाना बोनस, इंश्योरेंस और ओवरटाइम के उचित भुगतान जैसी मांगों को लेकर ड्राइवरों ने आंदोलन का रास्ता अपनाया है। ड्राइवरों का कहना है कि लंबे समय से उनकी मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं हुई, जिसके बाद उन्हें हड़ताल का फैसला लेना पड़ा।
DTC में निजी बस ड्राइवरों ने खोला मोर्चा
हड़ताल कर रहे ड्राइवरों का आरोप है कि जिम्मेदारियों के अनुपात में उचित वेतन और सुविधाएं नहीं दे रहे हैं। उनका कहना है कि महंगाई लगातार बढ़ रही है, लेकिन वेतन में अपेक्षित बढ़ोतरी नहीं हुई है।
ड्राइवरों के मुताबिक, कई कर्मचारी 10 से 15 साल का अनुभव रखने के बावजूद कम पारिश्रमिक पर काम कर रहे हैं। उनका यह भी आरोप है कि निर्धारित आठ घंटे की ड्यूटी के बजाय कई बार 10 से 11 घंटे तक काम कराया जाता है, लेकिन अतिरिक्त काम का उचित भुगतान नहीं किया जाता।
क्या हैं निजी बस ड्राइवरों की प्रमुख मांगें?
हड़ताली ड्राइवरों के अनुसार उनकी प्रमुख मांगें इस प्रकार हैं :-
वेतन में बढ़ोतरी: काम के घंटों और वर्तमान महंगाई को देखते हुए उचित एवं सम्मानजनक वेतन दिया जाए।
मेडिकल सुविधा: ड्राइवरों और उनके परिवारों के लिए स्वास्थ्य संबंधी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं।
इंश्योरेंस कवर: ड्यूटी के दौरान दुर्घटना या किसी अन्य अप्रिय घटना की स्थिति में पर्याप्त बीमा सुरक्षा दी जाए।
सालाना बोनस: लंबे समय से लंबित वार्षिक बोनस का भुगतान किया जाए।
ओवरटाइम का उचित भुगतान: निर्धारित ड्यूटी समय से अधिक काम कराने पर नियमानुसार अतिरिक्त भुगतान किया जाए।

862 रुपये दैनिक वेतन का दावा
हड़ताली ड्राइवरों का कहना है कि उन्हें फिलहाल करीब 862 रुपये प्रतिदिन के हिसाब से भुगतान किया जा रहा है। उनका दावा है कि लंबे अनुभव और तकनीकी दक्षता के बावजूद उन्हें अकुशल श्रमिकों के समान पारिश्रमिक दिया जा रहा है।
ड्राइवरों ने स्थायी डीटीसी ड्राइवरों के वेतन से तुलना करते हुए अपनी स्थिति में सुधार की मांग की है। हालांकि, वेतन और सुविधाओं से संबंधित इन आंकड़ों को ड्राइवरों और यूनियन के दावे के तौर पर देखा जाना चाहिए।
बुराड़ी क्रॉसिंग मैदान में जुटे ड्राइवर
हड़ताल के दौरान बड़ी संख्या में ड्राइवर बुराड़ी क्रॉसिंग मैदान में एकत्र हुए। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि उन्होंने अपने कार्यक्रम की जानकारी पुलिस प्रशासन को पहले ही लिखित रूप में दी थी और शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांगों को रखने का निर्णय लिया।
ड्राइवरों का कहना है कि उनका उद्देश्य यातायात व्यवस्था को बाधित करना नहीं, बल्कि अपनी समस्याओं की ओर प्रशासन का ध्यान आकर्षित करना है।
बसें बंद होने से यात्रियों की बढ़ी परेशानी
DTC की बसों के सड़कों से हटने के बाद रोजाना बस से सफर करने वाले यात्रियों की मुश्किलें बढ़ गईं। लोगों को मेट्रो, ऑटो-रिक्शा, कैब और अन्य वैकल्पिक साधनों का सहारा लेना पड़ा।
इन डिपो में हड़ताल का असर
हड़ताल का असर बुराड़ी, दिलशाद गार्डन, केशोपुर, ग्रेटर कैलाश, झिलमिल और कालकाजी समेत कई डिपो में दिखाई दिया। इन डिपो से निजी ऑपरेटरों के तहत चलने वाली बसों के नहीं निकलने से यात्रियों को वैकल्पिक परिवहन पर निर्भर रहना पड़ा।
यूनियन ने भी किया हड़ताली ड्राइवरों का समर्थन
डीटीसी कर्मचारी एकता यूनियन के अध्यक्ष ललित चौधरी ने हड़ताली ड्राइवरों का समर्थन करते हुए कहा कि कुशल और तकनीकी रूप से दक्ष ड्राइवरों को अकुशल श्रमिकों के बराबर वेतन दिया जा रहा है। उनके मुताबिक, यूनियन पहले भी इस मुद्दे को उठाती रही है और हड़ताल कर रहे ड्राइवरों को संगठन का समर्थन है।
मांगें नहीं मानी गईं तो आंदोलन जारी रखने की चेतावनी
हड़ताली ड्राइवरों ने स्पष्ट किया है कि जब तक निजी बस ऑपरेटर और संबंधित प्रशासन उनकी मांगों पर ठोस आश्वासन नहीं देते, तब तक आंदोलन जारी रखा जा सकता है।
यदि हड़ताल आगे भी जारी रहती है तो दिल्ली की बस सेवा पर इसका असर और बढ़ सकता है और रोजाना बसों पर निर्भर रहने वाले यात्रियों को अतिरिक्त परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।
नोट: वेतन, ड्यूटी के घंटे, मेडिकल सुविधा, इंश्योरेंस और ओवरटाइम भुगतान से संबंधित आंकड़े एवं आरोप प्रदर्शनकारी ड्राइवरों और यूनियन की ओर से बताए गए हैं। संबंधित निजी बस ऑपरेटर या प्रशासन का पक्ष सामने आने पर उसे भी खबर में शामिल किया जाएगा।
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Written & Edit by : Chandan Patel

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