नई दिल्ली: UPI को लेकर देश में एक बार फिर बहस तेज हो गई है। ₹2,000 से अधिक के चुनिंदा मर्चेंट UPI पेमेंट पर 0.4% Merchant Discount Rate (MDR) लागू करने के सरकार के फैसले पर विपक्ष सवाल उठा रहा है, जबकि वित्त मंत्रालय ने साफ किया है कि यह फैसला किसी विदेशी दबाव में नहीं लिया गया है। सरकार के मुताबिक UPI से जुड़े फैसले भारत की घरेलू जरूरतों और डिजिटल पेमेंट सिस्टम की दीर्घकालिक स्थिरता को ध्यान में रखकर लिए गए हैं।
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि आम ग्राहक से UPI भुगतान पर कोई शुल्क नहीं लिया जाएगा और व्यक्ति से व्यक्ति (P2P) ट्रांजैक्शन मुफ्त रहेंगे। सरकार के अनुसार करीब 96% मर्चेंट UPI ट्रांजैक्शन भी इस नए MDR से प्रभावित नहीं होंगे।
राहुल गांधी ने UPI शुल्क को लेकर क्या कहा?
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने UPI पर नए MDR को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने एक वीडियो संदेश जारी कर इस फैसले की आलोचना की और आरोप लगाया कि सरकार पर अमेरिका का दबाव है।
राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिका से जुड़े संदर्भ में सरकार से इस फैसले को वापस लेने की मांग की। उनके बयान के बाद UPI शुल्क का मुद्दा राजनीतिक बहस के केंद्र में आ गया।
हालांकि, वित्त मंत्रालय ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि UPI से जुड़े फैसले स्वतंत्र रूप से लिए गए हैं और किसी विदेशी दबाव का इसमें कोई रोल नहीं है। सरकार की ओर से यह भी संकेत दिया गया है कि नए MDR फ्रेमवर्क को वापस लेने का सवाल नहीं है।
15 अक्टूबर से क्या बदलने वाला है?
सरकार और NPCI के नए फ्रेमवर्क के अनुसार 15 अक्टूबर 2026 से ₹2,000 से अधिक के चुनिंदा Person-to-Merchant (P2M) UPI ट्रांजैक्शन पर 0.4% MDR लागू होगा।
महत्वपूर्ण बात यह है कि MDR को सरकार ने टैक्स नहीं बताया है। वित्त मंत्रालय के अनुसार यह भुगतान व्यवस्था के भीतर लिया जाने वाला शुल्क है, जिसे बैंक, पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर और UPI ऐप जैसे इकोसिस्टम के भागीदारों के बीच बांटा जाएगा।
किन लेन-देन पर शुल्क नहीं लगेगा?
- P2P यानी व्यक्ति से व्यक्ति UPI पेमेंट पर कोई शुल्क नहीं होगा।
- ₹2,000 तक के निर्धारित मर्चेंट पेमेंट मुफ्त रहेंगे।
- छोटे व्यापारियों के लिए लागू जीरो-MDR व्यवस्था के तहत आने वाले भुगतान भी मुफ्त रहेंगे।
- सरकार के मुताबिक करीब 96% P2M ट्रांजैक्शन इस MDR से बाहर रहेंगे।
₹300 की अधिकतम सीमा कब लागू होगी?
सरकारी जानकारी के मुताबिक ₹2,000 से अधिक के निर्धारित P2M ट्रांजैक्शन पर 0.4% MDR होगा। ₹75,000 या उससे अधिक के ट्रांजैक्शन पर MDR अधिकतम ₹300 प्रति ट्रांजैक्शन तक सीमित रहेगा।
जरूरी सेवाओं के लिए अलग व्यवस्था
नए फ्रेमवर्क में कुछ जरूरी और कम मार्जिन वाले क्षेत्रों के लिए अलग व्यवस्था रखी गई है। रेलवे, टेलीकॉम, इंश्योरेंस, ईंधन और कृषि इनपुट जैसे क्षेत्रों में ₹2,000 से अधिक के लेन-देन पर ₹5 प्रति ट्रांजैक्शन का फ्लैट MDR निर्धारित किया गया है।
शेयर बाजार और ब्रोकिंग पेमेंट पर भी अलग MDR
नए फ्रेमवर्क में कैपिटल मार्केट से जुड़े भुगतान के लिए सामान्य 0.4% MDR से अलग दर रखी गई है।
सरकार के अनुसार म्यूचुअल फंड, सिक्योरिटीज, स्टॉकब्रोकर और डीलर से जुड़े भुगतान पर 0.02% MDR होगा, जिसकी अधिकतम सीमा ₹300 प्रति ट्रांजैक्शन होगी।
जिरोधा के नितिन कामथ ने क्यों उठाए सवाल?
जिरोधा के फाउंडर और CEO नितिन कामथ ने भी नए MDR सिस्टम को लेकर अपनी चिंता जाहिर की है। उनका मुख्य तर्क सामान्य मर्चेंट और ब्रोकिंग कारोबार के बीच अंतर को लेकर है।
कामथ के उदाहरण के मुताबिक कोई व्यक्ति ₹20,000 का सामान खरीदता है और UPI से भुगतान करता है तो व्यापारी के लिए यह भुगतान सीधे बिक्री से जुड़ा है। लेकिन कोई निवेशक ₹2 लाख अपने ट्रेडिंग अकाउंट में UPI से जमा कर सकता है और उसी दिन कोई शेयर खरीदे ही नहीं।
ऐसे मामले में ब्रोकिंग कंपनी को उस UPI ट्रांजैक्शन से तत्काल ट्रेडिंग रेवेन्यू नहीं मिलता, लेकिन भुगतान से जुड़ी लागत पैदा हो सकती है। इसी अंतर को लेकर उन्होंने मौजूदा MDR व्यवस्था को लेकर सवाल उठाया है।
विपक्ष ने भी सरकार को घेरा
UPI MDR के मुद्दे पर विपक्षी नेताओं की ओर से भी सरकार की आलोचना की गई है।
AAP के राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने दावा किया कि इस फैसले का असर आम उपभोक्ताओं और छोटे व्यापारियों पर पड़ सकता है।
RJD नेता तेजस्वी यादव ने भी ₹2,000 से अधिक के UPI लेन-देन पर MDR को लेकर सरकार पर निशाना साधा और इसे महंगाई तथा आम लोगों की आर्थिक परेशानियों से जोड़कर सवाल उठाए।
वहीं केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने विपक्ष के आरोपों का जवाब देते हुए कहा कि UPI शुल्क ग्राहक से लेने की कोई सिफारिश नहीं है। उन्होंने राहुल गांधी के अमेरिका से जुड़े आरोपों पर भी सवाल उठाया।
यानी इस मुद्दे पर सरकार और विपक्ष के दावे फिलहाल अलग-अलग हैं और राजनीतिक बहस तेज हो गई है।
सुप्रीम कोर्ट में भी पहुंचा मामला
UPI पर नए MDR फ्रेमवर्क को लेकर सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका (PIL) भी दायर की गई है। याचिका में ₹2,000 से अधिक के चुनिंदा UPI मर्चेंट ट्रांजैक्शन पर 0.4% MDR लागू करने के फैसले को चुनौती दी गई है।
याचिका में इस व्यवस्था को लागू करने से पहले पारदर्शिता, कानूनी सुरक्षा और व्यापक प्रभाव का आकलन किए जाने जैसे मुद्दे उठाए गए हैं।
सरकार ने UPI को बढ़ावा देने के लिए क्या किया?
सरकार लंबे समय से UPI को देश में डिजिटल भुगतान का प्रमुख माध्यम बनाने के लिए प्रोत्साहन देती रही है। कम मूल्य वाले BHIM-UPI P2M ट्रांजैक्शन को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने इंसेंटिव स्कीम भी चलाई है।
2024-25 की योजना में ₹2,000 तक के छोटे व्यापारी वाले UPI P2M ट्रांजैक्शन को प्रोत्साहन व्यवस्था में शामिल किया गया था।
अब सरकार का तर्क है कि UPI का इस्तेमाल बड़े स्तर पर होने के बाद उसके पूरे पेमेंट इकोसिस्टम को लंबे समय तक टिकाऊ बनाए रखने के लिए निर्धारित बड़े मर्चेंट ट्रांजैक्शन पर MDR की व्यवस्था जरूरी है।
UPI आखिर काम कैसे करता है?
UPI यानी Unified Payments Interface एक ऐसा डिजिटल पेमेंट सिस्टम है, जिसके जरिए अलग-अलग बैंक खातों से मोबाइल के माध्यम से तुरंत पैसे भेजे और प्राप्त किए जा सकते हैं।
इसके लिए यूजर अपने बैंक अकाउंट को UPI ऐप से जोड़ता है और UPI ID, मोबाइल नंबर या QR कोड के जरिए भुगतान कर सकता है। इसमें हर बार बैंक अकाउंट नंबर और IFSC कोड याद रखने की जरूरत नहीं पड़ती।
यही आसान प्रक्रिया UPI को रोजमर्रा के छोटे-बड़े डिजिटल भुगतान का प्रमुख माध्यम बनाने में मदद करती है।
आम UPI यूजर के लिए क्या समझना जरूरी है?
सबसे अहम बात यह है कि नए MDR को सीधे ग्राहक पर लगाया गया UPI टैक्स नहीं बताया गया है। सरकारी फ्रेमवर्क के अनुसार ग्राहक से अलग से MDR वसूलने की व्यवस्था नहीं है।
फिलहाल व्यवस्था का मुख्य असर निर्धारित ₹2,000 से अधिक के P2M यानी ग्राहक से व्यापारी को किए जाने वाले चुनिंदा भुगतान पर है। P2P भुगतान और बड़ी संख्या में मर्चेंट ट्रांजैक्शन मुफ्त बने रहेंगे।
विपक्ष इस फैसले के आर्थिक और राजनीतिक असर पर सवाल उठा रहा है
UPI पर 0.4% MDR को लेकर अब मामला केवल डिजिटल पेमेंट की फीस तक सीमित नहीं रह गया है। एक तरफ सरकार इसे UPI के दीर्घकालिक संचालन और पेमेंट इकोसिस्टम की स्थिरता से जोड़ रही है, वहीं विपक्ष इस फैसले के आर्थिक और राजनीतिक असर पर सवाल उठा रहा है।
राहुल गांधी के अमेरिका से जुड़े आरोपों को सरकार ने खारिज किया है। दूसरी ओर, नए MDR फ्रेमवर्क को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती भी दी गई है। ऐसे में 15 अक्टूबर 2026 से लागू होने वाली व्यवस्था और अदालत में चल रही चुनौती – दोनों पर आगे की नजर महत्वपूर्ण होगी।
साफ बात: फिलहाल उपलब्ध सरकारी जानकारी के मुताबिक ₹2,000 तक के UPI भुगतान, सभी P2P भुगतान और करीब 96% मर्चेंट UPI ट्रांजैक्शन पर नया MDR लागू नहीं होगा।
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Written & Edit by : Chandan Patel

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