नई दिल्ली: चुनावी प्रक्रिया और मतदाता सूची में बदलाव को लेकर देश में जारी बहस के बीच SIR (Special Intensive Revision) के विरोध की आवाज एक बार फिर दिल्ली की सड़कों पर सुनाई देने वाली है। रविवार को इंडिया गेट से जंतर-मंतर तक नागरिक मार्च निकाला जाएगा। इस मार्च का आयोजन ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (आइसा) के नेतृत्व में किया जा रहा है।
आयोजकों के मुताबिक, मार्च में छात्र संगठनों के सदस्यों के साथ सामाजिक कार्यकर्ता योगेंद्र यादव, आइसा अध्यक्ष नेहा बोरा समेत कई सामाजिक कार्यकर्ता और नागरिक शामिल होंगे। मार्च के जरिए चुनाव प्रक्रिया और मतदाता सूची में बदलाव को लेकर अपनी चिंताओं को सार्वजनिक तौर पर सामने रखा जाएगा।
दोपहर 3 बजे इंडिया गेट से शुरू होगा मार्च
जानकारी के मुताबिक, नागरिक मार्च रविवार दोपहर 3 बजे इंडिया गेट से शुरू होगा। इसके बाद प्रदर्शनकारी जंतर-मंतर की ओर बढ़ेंगे।
आयोजकों का कहना है कि मार्च का उद्देश्य शांतिपूर्ण तरीके से SIR और मतदाता सूची से जुड़े मुद्दों पर लोगों की चिंताओं को सामने रखना है। प्रदर्शन के दौरान चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता और मतदाताओं के अधिकारों से जुड़े सवाल उठाए जा सकते हैं।
जंतर-मंतर और आसपास सुरक्षा बढ़ने की संभावना
मार्च को देखते हुए दिल्ली पुलिस की ओर से इंडिया गेट, जंतर-मंतर और आसपास के इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाई जा सकती है। प्रदर्शनकारियों की संख्या और मार्च के रूट को देखते हुए यातायात व्यवस्था पर भी असर पड़ने की संभावना है।
दिल्ली में पहले भी चुनाव आयोग से जुड़े मुद्दों को लेकर प्रदर्शन हो चुके हैं। ऐसे में रविवार के मार्च को लेकर सुरक्षा एजेंसियां भी सतर्क रह सकती हैं।
प्रदर्शन की अनुमति को लेकर आईवाईसी अध्यक्ष हाईकोर्ट पहुंचे
वहीं, जंतर-मंतर पर प्रस्तावित प्रदर्शन की अनुमति नहीं मिलने के मामले में इंडियन यूथ कांग्रेस (IYC) के राष्ट्रीय अध्यक्ष उदय भानु चिब ने दिल्ली हाईकोर्ट का रुख किया है।
उन्होंने दिल्ली पुलिस के उस आदेश को चुनौती दी है, जिसमें करीब 100 से 150 लोगों के शांतिपूर्ण प्रदर्शन की अनुमति देने से इनकार किया गया था।
आईवाईसी की ओर से दायर याचिका में कहा गया है कि शांतिपूर्ण सभा को नियंत्रित करने वाले नियमों का इस्तेमाल किसी प्रदर्शन को पूरी तरह रोकने के लिए नहीं किया जाना चाहिए।
25 सितंबर को दिया था अनुमति के लिए आवेदन
याचिका के मुताबिक, आईवाईसी ने जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की अनुमति के लिए 25 सितंबर को आवेदन किया था। संगठन का कहना है कि आवेदन में सुरक्षा, यातायात, अनुशासन और सार्वजनिक व्यवस्था से जुड़े नियमों का पालन करने का भरोसा दिया गया था।
आईवाईसी का आरोप है कि कई बार संपर्क करने के बावजूद उसे अनुमति नहीं मिलने की जानकारी 1 अक्टूबर को दी गई, जबकि इसी दिन प्रदर्शन प्रस्तावित था।
संगठन ने पुलिस के फैसले पर सवाल उठाते हुए कहा है कि प्रस्तावित प्रदर्शन का स्वतंत्र और उचित आकलन किए बिना अनुमति से इनकार किया गया।
संविधान के अनुच्छेद 14 और 19 का दिया हवाला
आईवाईसी ने अपनी याचिका में संविधान के अनुच्छेद 14, 19(1)(ए) और 19(1)(बी) का हवाला दिया है।
याचिका में शांतिपूर्ण सभा और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के अधिकार की बात कही गई है। संगठन ने यह भी सवाल उठाया है कि प्रदर्शन संबंधी दिशा-निर्देशों को परिस्थितियों का उचित आकलन किए बिना लागू किया गया।
अब इस मामले में दिल्ली हाईकोर्ट का रुख महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
चुनाव आयोग के खिलाफ प्रदर्शन में क्या हुआ था?
यह मामला चुनाव आयोग के खिलाफ आईवाईसी कार्यकर्ताओं के प्रदर्शन के एक दिन बाद सामने आया है। कार्यकर्ताओं ने चुनावी सूची में कथित अनियमितताओं को लेकर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की थी।
प्रदर्शन के दौरान कुछ कार्यकर्ताओं ने काले कपड़े और सफेद मास्क पहन रखे थे। उनके गले में खोपड़ी के प्रतीक भी नजर आए। प्रदर्शनकारियों ने खुद को ‘जिंदा भूत’ बताते हुए आरोप लगाया कि जीवित होने के बावजूद उनके नाम मतदाता सूची से हटा दिए गए हैं।
रायसीना रोड से जंतर-मंतर जाने की कोशिश
आईवाईसी अध्यक्ष उदय भानु चिब के नेतृत्व में कार्यकर्ताओं ने रायसीना रोड स्थित आईवाईसी कार्यालय से जंतर-मंतर की ओर मार्च करने की कोशिश की।
प्रदर्शनकारियों के मुताबिक, पुलिस ने उन्हें कार्यालय के बाहर ही रोक दिया। इसके बाद कार्यकर्ताओं ने नारेबाजी की और हाथों में बैनर लेकर अपना विरोध दर्ज कराया।
SIR को लेकर क्यों बढ़ी राजनीतिक और सामाजिक बहस?
SIR यानी Special Intensive Revision के तहत मतदाता सूची के सत्यापन और संशोधन को लेकर राजनीतिक दलों, सामाजिक संगठनों और नागरिक समूहों के बीच लगातार बहस चल रही है।
समर्थकों का तर्क है कि मतदाता सूची को अपडेट और सत्यापित करना जरूरी है, जबकि विरोध करने वाले संगठन प्रक्रिया में पारदर्शिता, दस्तावेजों की उपलब्धता और पात्र मतदाताओं के नाम सुरक्षित रहने को लेकर सवाल उठा रहे हैं।
इसी मुद्दे को लेकर रविवार को दिल्ली में होने वाला नागरिक मार्च एक बार फिर इस बहस को सड़क से लेकर राजनीतिक मंच तक पहुंचा सकता है।
अब रविवार के मार्च पर रहेगी नजर
इंडिया गेट से जंतर-मंतर तक प्रस्तावित मार्च के दौरान बड़ी संख्या में छात्र, सामाजिक कार्यकर्ता और नागरिकों के शामिल होने का दावा किया गया है। ऐसे में दिल्ली पुलिस के सामने प्रदर्शनकारियों की सुरक्षा के साथ-साथ यातायात और कानून-व्यवस्था बनाए रखने की चुनौती होगी।
SIR, मतदाता सूची और चुनावी पारदर्शिता को लेकर उठ रहे सवालों के बीच रविवार का यह मार्च कितना बड़ा रूप लेता है, इस पर सभी की नजर रहेगी।
Written & Edit by : Chandan Patel
Reported by : Chandan Patel
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