देश में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर विवाद के बीच अब मामला सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश तक पहुंच गया है। दो हजार से अधिक नागरिकों ने भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत को पत्र लिखकर SIR प्रक्रिया पर रोक लगाने और निर्वाचन आयोग की भूमिका से जुड़े मुद्दों पर स्वतः संज्ञान लेने की अपील की है। पत्र में मतदाता पंजीकरण सॉफ्टवेयर और फॉर्म में कथित अनधिकृत बदलावों की न्यायालय की निगरानी में जांच कराने की मांग भी की गई है।

इस विवाद के बीच चुनाव आयोग ने भी अपने कामकाज में पारदर्शिता, आंतरिक निर्देशों के पालन और तकनीकी व्यवस्था की समीक्षा को लेकर नौ फैसलों की जानकारी दी है। आयोग ने ईसीआईनेट (ECINET) की जांच के लिए समिति बनाने और SIR के दौरान मतदाता सूची में नाम छूट जाने वाले लोगों को दोबारा आवेदन का अवसर देने की बात कही है।

हालांकि, मतदाता सूची से बड़ी संख्या में नाम कम होने, ऑनलाइन फॉर्म-6 में बदलाव और कुछ राज्यों में अपील प्रक्रिया को लेकर कई सवाल अब भी चर्चा में हैं। ऐसे में सवाल है कि SIR की प्रक्रिया कितनी पारदर्शी है और मतदाता सूची से नाम छूटने की स्थिति में नागरिकों के पास क्या विकल्प हैं?

2,000 से अधिक नागरिकों ने CJI को क्यों लिखा पत्र?

25 सितंबर 2026 को प्रकाशित रिपोर्ट के मुताबिक, दो हजार से अधिक नागरिकों ने सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और अन्य न्यायाधीशों को खुला पत्र लिखकर SIR प्रक्रिया तथा निर्वाचन आयोग के कामकाज से जुड़े आरोपों की जांच की मांग की है।

पत्र में मुख्य रूप से निम्नलिखित मांगें रखी गई हैं:

  • SIR की वैधता और प्रक्रिया की समीक्षा होने तक इस पर रोक लगाई जाए।
  • मतदाता पंजीकरण सॉफ्टवेयर और फॉर्म में कथित अनधिकृत बदलावों की न्यायालय की निगरानी में जांच हो।
  • मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार और संबंधित अधिकारियों की भूमिका की जांच कर उचित कानूनी कार्रवाई पर विचार किया जाए।

ECINET प्लेटफॉर्म का सुरक्षा और कानूनी ऑडिट सुप्रीम कोर्ट द्वारा नियुक्त स्वतंत्र विशेषज्ञ समिति से कराया जाए।
तकनीकी गड़बड़ियों या प्रक्रियागत बदलावों के कारण जिन पात्र मतदाताओं के नाम छूटे हैं, उन्हें दोबारा सूची में शामिल करने के उपाय किए जाएं।

ध्यान देने वाली बात: ये पत्र पर हस्ताक्षर करने वाले नागरिकों की मांगें और आरोप हैं। इन्हें न्यायालय द्वारा प्रमाणित निष्कर्ष या निर्वाचन आयोग के खिलाफ स्थापित कानूनी उल्लंघन नहीं माना जाना चाहिए।

पूर्व नौसेना प्रमुख से लेकर प्रशांत भूषण तक, कई प्रमुख हस्ताक्षरकर्ता

इस पत्र पर अलग-अलग क्षेत्रों से जुड़े कई प्रमुख लोगों के हस्ताक्षर होने की जानकारी सामने आई है। इनमें पूर्व नौसेना प्रमुख एडमिरल विष्णु भागवत, वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण, इतिहासकार आदित्य मुखर्जी और शिक्षाविदों, पत्रकारों तथा सामाजिक कार्यकर्ताओं के नाम शामिल हैं।

पत्र के जरिए हस्ताक्षरकर्ताओं ने मतदाता सूची तैयार करने की प्रक्रिया, तकनीकी प्रणालियों की जवाबदेही और निर्वाचन आयोग के कामकाज में पारदर्शिता से जुड़े सवाल उठाए हैं।

SIR विवाद के बीच चुनाव आयोग के नौ फैसले

26 सितंबर 2026  निर्वाचन आयोग की बैठक SIR पर उठ रहे सवालों के बीच निर्वाचन आयोग ने 26 सितंबर को हुई बैठक के बाद अपने कामकाज से जुड़े नौ फैसलों की जानकारी दी। बैठक में मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार और निर्वाचन आयुक्त एस. एस. संधू तथा विवेक जोशी मौजूद थे। आयोग ने फैसलों के रिकॉर्ड, बैठक के एजेंडे और अधिकारियों को दिए जाने वाले निर्देशों के पालन पर जोर दिया।

आयोग की ओर से जारी जानकारी के अनुसार, प्रमुख फैसले इस प्रकार हैं:

1. जिन मतदाताओं को SIR में मैपिंग न होने या रिकॉर्ड में विसंगति के कारण नोटिस मिला है, उनके दस्तावेज जुटाने के लिए बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) घर जा सकेंगे। दस्तावेज ECINET पर अपलोड किए जाएंगे।

2. ऐसे मतदाताओं को सामान्य परिस्थितियों में ERO/AERO कार्यालय में सुनवाई के लिए बुलाने की जरूरत नहीं होगी। विशेष परिस्थिति में ERO सुनवाई का निर्णय ले सकेंगे।

3. SIR में छूटे मतदाताओं और पहली बार वोट देने वाले युवाओं के नाम जोड़ने के लिए विशेष अभियान चलाने के निर्देश दिए गए हैं।

4. बैठकों से पहले एजेंडा साझा करने और बाद में फैसलों का रिकॉर्ड तैयार करने की व्यवस्था पर जोर दिया गया।

5. नए IT मॉड्यूल और पोर्टल लागू करने से पहले उनकी समीक्षा करने की बात कही गई।

6. अधिकारियों के कार्य-वितरण और निर्वाचन आयुक्तों के निर्देशों के पालन पर स्पष्टता दी गई।

7. ECINET और IT व्यवस्था से संबंधित निगरानी की समीक्षा की बात कही गई।

8. आयोग के अधिकारियों की विदेश यात्राओं के लिए आयोग की मंजूरी आवश्यक बताई गई।

9. निर्वाचन आयुक्तों की ओर से अधिकारियों को दिए गए निर्देशों का सावधानीपूर्वक पालन सुनिश्चित करने की बात कही गई।

चुनाव आयोग ने आंतरिक मतभेद के दावों पर क्या कहा?

SIR विवाद के बीच निर्वाचन आयोग के भीतर मतभेद होने की खबरें भी सामने आई थीं। द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट में दावा किया गया था कि निर्वाचन आयुक्त एस. एस. संधू और विवेक जोशी ने पिछले दस महीनों में आयोग के फैसलों पर 14 बार आपत्ति जताई थी।

इसके जवाब में आयोग ने स्पष्ट किया कि कैबिनेट सचिव को भेजे गए दोनों आयुक्तों के पत्र किसी नीतिगत फैसले या IT विभाग की नीति से संबंधित नहीं थे, बल्कि प्रतिनियुक्ति पर आए एक अधिकारी के कामकाज से जुड़े थे।

आयोग के अनुसार, संबंधित अधिकारी की ओर से जारी कार्य-वितरण संबंधी आदेश लागू नहीं किए गए और IT विभाग की निगरानी भी उप निर्वाचन आयुक्त से नहीं हटाई गई। आयोग ने यह भी कहा कि SIR से जुड़े फैसले आयोग की सर्वसम्मत मंजूरी से लिए गए थे।

इस मामले में आयोग का आधिकारिक पक्ष और मीडिया रिपोर्ट में लगाए गए आरोप अलग-अलग हैं। इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि के बिना किसी एक पक्ष के विवरण को अंतिम निष्कर्ष नहीं माना जाना चाहिए।

ECINET का ऑडिट: तकनीकी व्यवस्था की जांच कैसे होगी?

ECINET निर्वाचन आयोग की डिजिटल व्यवस्था से जुड़ा प्लेटफॉर्म है। मतदाता सूची के पुनरीक्षण और चुनाव संबंधी सेवाओं में इसकी भूमिका को लेकर उठे सवालों के बीच आयोग ने इसकी जांच के लिए एक समिति गठित करने की जानकारी दी है।

आयोग के अनुसार, समिति की अध्यक्षता एक वरिष्ठ उप निर्वाचन आयुक्त करेंगे और इसमें IIT या IIITसेजुड़े एक स्वतंत्र विशेषज्ञ को शामिल किया जाएगा।

दूसरी ओर, CJI को लिखे पत्र में नागरिकों ने स्वतंत्र विशेषज्ञ समिति के माध्यम से सुरक्षा और कानूनी ऑडिट कराने की मांग की है। दोनों प्रस्तावों के बीच अंतर यह है कि आयोग ने अपनी ओर से समिति बनाने की बात कही है, जबकि पत्र लिखने वालों ने सुप्रीम कोर्ट द्वारा नियुक्त समिति की मांग की है।

SIR में नाम छूट गया तो क्या करें? फॉर्म-6 से जुड़ा महत्वपूर्ण अपडेट

निर्वाचन आयोग ने स्पष्ट किया है कि SIR के दौरान जिन पात्र मतदाताओं के नाम सूची में शामिल नहीं हो पाए हैं, वे मतदाता सूची के निरंतर अद्यतन (Continuous Updation) की प्रक्रिया के तहत संबंधित निर्वाचक निबंधन पदाधिकारी (ERO) के पास नाम जोड़ने के लिए आवेदन कर सकते हैं।

यह सुविधा युवा और पहली बार मतदान करने वाले पात्र नागरिकों के लिए भी है। आयोग ने मुख्य निर्वाचन अधिकारियों (CEO), जिला निर्वाचन अधिकारियों (DEO) और ERO को ऐसे मतदाताओं के नाम जोड़ने के लिए विशेष अभियान चलाने का निर्देश दिया है।

मतदाता के लिए जरूरी कदम:

  • अपनी वर्तमान मतदाता सूची में नाम की स्थिति जांचें।
  • नाम नहीं होने पर संबंधित ERO से संपर्क करें।
  • नया नाम जुड़वाने के लिए फॉर्म-6 और निर्धारित दस्तावेजों के संबंध में आधिकारिक निर्देश प्राप्त करें।
  • आवेदन जमा करने के बाद उसकी स्थिति की जानकारी लेते रहें।

केवल आवेदन कर देना नाम जुड़ने की अंतिम पुष्टि नहीं है। आवेदन पर संबंधित निर्वाचन अधिकारी की प्रक्रिया और निर्णय लागू होंगे।

SIR
SIR के तहत सबसे ज्यादा नाम महाराष्ट्र में कटा

13.37 करोड़ नाम कम होने का दावा: आंकड़ों को समझना क्यों जरूरी?

SIR को लेकर सबसे बड़ा सवाल मतदाता सूची से कम हुए नामों की संख्या पर है। उपलब्ध रिपोर्ट में दावा किया गया है कि 30 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की ड्राफ्ट मतदाता सूचियों से कुल 13.37 करोड़ नाम कम हुए हैं। वहीं, देश में कुल मतदाताओं की संख्या 96.88 करोड़ से अधिक बताई गई है।

इन आंकड़ों के आधार पर करीब 14.1 प्रतिशत का अनुपात बताया जा रहा है। हालांकि, यहां एक महत्वपूर्ण अंतर समझना जरूरी है: ड्राफ्ट मतदाता सूची से नाम कम होना और किसी पात्र नागरिक का अंतिम रूप से मतदान सूची से बाहर होना एक ही बात नहीं है। नाम कम होने के कारणों और अंतिम सूची में उनकी स्थिति को अलग-अलग देखना जरूरी है।

आयोग ने भी कहा है कि शेष राज्यों में प्रक्रिया पूरी होने और अंतिम मतदाता सूचियां प्रकाशित होने के बाद ही कुल मतदाताओं की अंतिम संख्या स्पष्ट होगी।

सुप्रीम कोर्ट पहले भी दे चुका है SIR पर फैसला

SIR की कानूनी स्थिति समझने के लिए एक महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि सुप्रीम कोर्ट ने 27 मई 2026 को बिहार में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण से संबंधित मामलों में फैसला सुनाया था। अदालत ने निर्वाचन आयोग के SIR कराने के अधिकार को बरकरार रखा और प्रक्रिया को लेकर दायर याचिकाओं पर अपना निर्णय दिया। साथ ही, पात्र मतदाताओं के अधिकारों और नाम हटाए जाने के मामलों में कानूनी उपायों से जुड़े निर्देश भी दिए गए।

इसलिए CJI को भेजे गए नए पत्र में की गई रोक और जांच की मांग को अदालत के पहले के फैसले से अलग संदर्भ में समझना होगा। पत्र भेजे जाने का अर्थ यह नहीं है कि SIR पर रोक लग गई है या अदालत ने नए आरोपों पर कोई निष्कर्ष दे दिया है।

फॉर्म-6, पश्चिम बंगाल और गोवा से जुड़े सवाल अब भी बरकरार

  • नौ फैसलों के बावजूद कुछ मुद्दों पर स्थिति स्पष्ट नहीं होने की बात रिपोर्ट में कही गई है।
  • ऑनलाइन फॉर्म-6 में माता-पिता से संबंधित सवाल क्यों जोड़ा गया और इसके लिए किस स्तर पर निर्णय लिया गया?
  • पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची से जुड़े करीब 16 लाख नामों के खिलाफ अपील किसके निर्देश पर दाखिल की गई?
  • गोवा में मतदाता का नाम बहाल करने से संबंधित सॉफ्टवेयर सुविधा शुरू होने में देरी क्यों हुई?
  • IT विभाग के अधिकारियों को लेकर उठे सवालों पर क्या कार्रवाई की गई?

इन मुद्दों पर स्पष्ट जानकारी सामने आने से विवाद से जुड़े तथ्यों को समझने में मदद मिल सकती है। फिलहाल, इन सवालों को आरोपों और अनुत्तरित मुद्दों के रूप में ही देखा जाना चाहिए।

मतदाता सूची की पारदर्शिता पर टिकी निगाहें

SIR को लेकर उठे सवाल अब केवल मतदाता सूची में नाम जोड़ने और हटाने तक सीमित नहीं हैं। विवाद में निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली, तकनीकी व्यवस्था की सुरक्षा, अधिकारियों की जवाबदेही और पात्र मतदाताओं को उपलब्ध कानूनी उपाय भी शामिल हैं।

एक ओर नागरिकों ने सुप्रीम कोर्ट से हस्तक्षेप और स्वतंत्र जांच की मांग की है, वहीं दूसरी ओर निर्वाचन आयोग ने अपनी प्रक्रिया का बचाव करते हुए नई व्यवस्थाओं और विशेष अभियान की जानकारी दी है।

अब आगे की स्थिति इस बात पर निर्भर करेगी कि आयोग तकनीकी और प्रक्रियागत सवालों पर कितनी स्पष्टता देता है, छूटे हुए पात्र मतदाताओं के आवेदन पर क्या कार्रवाई होती है और अदालत के समक्ष उठाए गए मुद्दों पर आगे क्या कानूनी कार्यवाही होती है।

Written & Edit by : Chandan Patel

Reported by : Chandan Patel

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भगत सिंह
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By Chandan Patel

चंदन पटेल AVN News से लंबे समय से जुड़े पत्रकार हैं। उन्होंने वर्ष 2020 से रिपोर्टर के रूप में पत्रकारिता की शुरुआत की और जमीनी स्तर की खबरों को प्रमुखता से उठाते हुए लगातार अपनी पहचान बनाई। वर्तमान में वे AVN News के एडिटर-इन-चीफ के रूप में समाचार संपादन, कवरेज और डिजिटल पत्रकारिता का नेतृत्व कर रहे हैं। राजनीति, खेल,स्थानीय मुद्दों, जनसमस्याओं, प्रशासनिक गतिविधियों और सामाजिक सरोकारों से जुड़ी खबरों को तथ्यपरक और सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचाना उनकी पत्रकारिता की प्रमुख विशेषता है। उनका उद्देश्य आम लोगों की आवाज को प्रमुखता देना और विश्वसनीय खबरों के माध्यम से समाज को जागरूक करना है।

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