AVN NEWS | विशेष रिपोर्ट | पीएम रेंद्र मोदी ने छत्तीसगढ़ के बस्तर जिले में सुरक्षा बलों के जवानों के साथ दिवाली मनाई। करनपुर स्थित कोबरा ऑपरेशंस बेस पहुंचकर उन्होंने जवानों के साहस, बलिदान और समर्पण को नमन किया। पीएम मोदी ने कहा कि देश ने दशकों पुरानी नक्सलवाद की लड़ाई में बड़ी जीत हासिल की है। उन्होंने इस उपलब्धि का श्रेय सुरक्षा बलों के जवानों को देते हुए कहा कि देश का हर जवान उनके परिवार का हिस्सा है।
बस्तर में जवानों के साथ दिवाली मनाने पहुंचे पीएम मोदी
दिवाली का त्योहार जहां देशभर में लोग अपने परिवार के साथ मना रहे थे, वहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने छत्तीसगढ़ के बस्तर के जंगलों में देश की सुरक्षा में तैनात जवानों के बीच पहुंचकर त्योहार मनाया। प्रधानमंत्री का यह दौरा सुरक्षा बलों के जवानों के प्रति सम्मान और उनके योगदान को याद करने के लिहाज से खास रहा।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने करनपुर स्थित कोबरा (CoBRA) ऑपरेशंस बेस का दौरा किया। यह बेस बस्तर और अबूझमाड़ क्षेत्र में नक्सल विरोधी अभियानों के लिए प्रशिक्षण केंद्र और अभियान शुरू करने के प्रमुख केंद्र के रूप में काम करता रहा है।
जवानों को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि वर्ष 2026 की दिवाली इसलिए विशेष है, क्योंकि देश ने नक्सलवाद के खिलाफ दशकों पुरानी लड़ाई में बड़ी उपलब्धि हासिल की है। उन्होंने कहा कि यह पहली दिवाली है, जब देश का हर जिला नक्सलवाद से मुक्त है।
‘आप सभी मेरे परिवार का हिस्सा हैं’
प्रधानमंत्री मोदी ने जवानों के बीच दिवाली मनाने को लेकर कहा कि वह भी यह पावन पर्व उनके साथ मनाने आए हैं।
उन्होंने कहा,
”आज, पूरे देश में और दुनिया के हर कोने में, करोड़ों भारतीय रोशनी का यह पावन पर्व मना रहे हैं। लोग अपने घरों को लौटने के लिए दूर-दूर से यात्रा कर रहे हैं। परिवारों और अपनों के एक साथ मिलकर जश्न मनाने का यह एक बहुत अच्छा अवसर है। मैं भी दिवाली मनाने के लिए आप लोगों के बीच आया हूं।”
जवानों के प्रति सम्मान व्यक्त करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा,
”जो लोग सीमाओं पर और देश के भीतर राष्ट्र की रक्षा करते हैं, जो देश के रक्षक हैं और भारत माता के वीर बेटे-बेटियां हैं, आप सभी मेरे परिवार के सदस्य हैं। 140 करोड़ देशवासियों की ओर से आपके त्याग और समर्पण का आभार व्यक्त करने आया हूं।”
उन्होंने आगे कहा,
”आप सभी मेरे परिवार का हिस्सा हैं। इस बार, मैं बस्तर के जंगलों में दिवाली मनाने आया हूं। यह वह जगह है जहां कभी नक्सलवाद का खतरा हुआ करता था। लेकिन, आपके बलिदान और समर्पण की बदौलत, अब इसी इलाके से नक्सलवाद का खतरा खत्म हो गया है और विकास की एक नई लहर शुरू हो गई है।”
जवानों को सुनाई सुरक्षा से जुड़ी संस्कृत की सूक्ति
अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने देश की आंतरिक सुरक्षा के महत्व को समझाते हुए संस्कृत की एक सूक्ति का उल्लेख किया।
उन्होंने कहा,
”हमारे दूरदर्शी पूर्वजों ने कहा है, ‘अभ्यंतर भयं रक्षम्, असारंबाह्यतो भयं’ अर्थात जब राष्ट्र की आंतरिक सुरक्षा मजबूत होती है, तो बाहरी दुश्मन कुछ नहीं कर पाता है। लेकिन अगर आंतरिक सुरक्षा कम पड़ती है, तो बाहरी दुश्मन भी सर उठाने लगते हैं। इसलिए जो भूमिका सीमाओं पर हमारी सेनाओं की है, देश के भीतर वही भूमिका आप सब सुरक्षा बलों की है। आपने देश की एकता, अखंडता के लिए अनगिनत बलिदान दिए हैं। आपने असीम त्याग किया है।”
प्रधानमंत्री ने CRPF, कोबरा, BSF, ITBP, SSB, IRB और राज्य पुलिस के जवानों के साथ-साथ बस्तर फाइटर्स और महिला फाइटर्स के योगदान की भी सराहना की।
उन्होंने कहा,
”देश की आंतरिक सुरक्षा में लगे सुरक्षा बल, हमारे CRPF, कोबरा, BSF, ITBP, SSB, IRB के एक-एक जवान और राज्यों की पुलिस का एक-एक सिपाही, बस्तर फाइटर्स जैसे स्पेशल फोर्स के जवान, महिला फाइटर्स, यह देश आपकी सेवाओं के लिए आपका ऋणी है।”
‘पूर्व की सरकारों ने नक्सलवाद को लाइलाज बीमारी मान लिया था’
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने संबोधन में पिछली सरकारों की नक्सलवाद के खिलाफ रणनीति पर भी सवाल उठाए।
उन्होंने कहा,
”अगर आप 2004 से 2013 तक के आंकड़ों पर नजर डालेंगे, तो पाएंगे कि हर साल नक्सलियों के मारे जाने के मुकाबले हमारे बहादुर जवानों के बलिदान होने की संख्या ज्यादा थी। दुर्भाग्य से, उस समय की सरकारों ने नक्सलवाद को ऐसी बीमारी मान लिया था, जिसका कोई इलाज नहीं है। उन्होंने इस समस्या को ऐसे ही छोड़ दिया। दुश्मनों के सामने यह सोचकर बैठ जाना कि हालात ऐसे ही चलते रहेंगे, किसी भी देश के लिए सही नहीं हो सकता।”
पीएम मोदी ने कहा कि माओवादी आतंक और नक्सलवाद के खिलाफ लड़ाई आसान नहीं थी। नक्सलियों ने लोगों से वोट डालने का अधिकार तक छीन लिया था और एक साल में नक्सली हमलों की संख्या 2,000 तक पहुंच गई थी।
उन्होंने 2010 में दंतेवाड़ा में हुए हमलों का जिक्र करते हुए कहा कि एक मुठभेड़ में CRPF के 76 जवान बलिदान हो गए थे। उसी साल दंतेवाड़ा में एक अन्य घटना में 44 निर्दोष नागरिकों की जान चली गई थी।
प्रधानमंत्री ने कहा,
”यह धरती हमारे बहादुर जवानों के खून से लाल हो गई थी। लेकिन महलों में रहने वाले उन प्रभावशाली नेताओं की ओर से दुख जताने वाली एक आवाज तक नहीं आई। उनकी आंखों से एक आंसू तक नहीं निकला। लगभग हर दिन कहीं न कहीं ऐसे हमले होते रहे। यह सिलसिला दशकों तक चलता रहा। इस दौरान अकेले छत्तीसगढ़ में 1,000 से ज्यादा सुरक्षाकर्मी बलिदान हुए।”
‘पिछले एक साल में ड्यूटी के दौरान CRPF का एक भी जवान बलिदान नहीं हुआ’
प्रधानमंत्री मोदी ने सुरक्षा बलों की उपलब्धियों का जिक्र करते हुए कहा कि पिछले एक साल में ड्यूटी के दौरान CRPF का एक भी जवान बलिदान नहीं हुआ।
उन्होंने कहा,
”देश को आगे ले जाने के लिए हमें मजबूत इरादों और सही रणनीति के साथ देश के दुश्मनों का सामना करना होगा और उन्हें हराना होगा। ऐसा करने के लिए देश में जिस राजनीतिक इच्छाशक्ति की कमी थी, उसे 2014 में मजबूती मिली। आपने इस प्रधानसेवक को मां भारती की सेवा करने का अवसर दिया और हमने देखा कि 2014 के बाद हालात कैसे बदलने लगे।”
पीएम मोदी ने आगे कहा,
”लंबे समय तक हमने देखा कि नक्सलियों के मुकाबले हमारे ज्यादा जवान बलिदान हो रहे थे। लेकिन 47 साल में पहली बार एक बड़ी उपलब्धि हासिल हुई है। पिछले एक साल में ड्यूटी के दौरान सीआरपीएफ का एक भी जवान बलिदान नहीं हुआ। यह देश की सही नीतियों और मजबूत इरादों की जीत है। यह आप सभी के शौर्य, साहस और संयम की जीत है।”
केंद्र सरकार के फैसलों से कमजोर पड़ा नक्सलवाद
प्रधानमंत्री ने कहा कि देश की सुरक्षा के लिए केंद्र सरकार ने कई महत्वपूर्ण और कड़े फैसले लिए, जिनका असर नक्सलियों की आर्थिक ताकत और उनके नेटवर्क पर पड़ा।
उन्होंने कहा,
”किसी भी काम में सफलता पाने के लिए सही नीयत और सही नीतियां जरूरी हैं। देश की सुरक्षा के लिए हमने एक के बाद एक कई कड़े फैसले लिए। ऐसे कई कदम भी उठाए गए, जिनके बारे में आज भी लोगों को जानकारी नहीं है। इन फैसलों और प्रयासों से नक्सलियों और अलगाववादियों को मिलने वाले पैसों पर बड़ा असर पड़ा।”
पीएम मोदी ने नकली नोटों के नेटवर्क पर कार्रवाई का जिक्र करते हुए कहा,
”नकली नोटों के नेटवर्क को खत्म किया गया। इससे न केवल उनकी आर्थिक ताकत कमजोर हुई, बल्कि हथियार और अन्य जरूरी सामान पहुंचाने का रास्ता भी बंद हो गया। इसके परिणामस्वरूप नक्सलियों तक हथियारों की सप्लाई रुक गई। साथ ही, उनकी आवाजाही और नए लोगों की भर्ती पर भी रोक लग गई।”
’12 वर्षों में 50 करोड़ लोग अत्यधिक गरीबी से बाहर निकले’
प्रधानमंत्री मोदी ने नक्सलवाद के खिलाफ लड़ाई के साथ-साथ गरीबी के खिलाफ सरकार के प्रयासों का भी जिक्र किया।
उन्होंने कहा,
”जब हम देश के लिए काम करते हैं, तो इससे देश में शांति और सुरक्षा भी सुनिश्चित होती है। पिछले 12 वर्षों में देश ने न केवल नक्सलवाद और अलगाववाद के खिलाफ लड़ाई जीती है, बल्कि गरीबी के खिलाफ भी बड़ी लड़ाई लड़ी है। इस साल दिवाली से ठीक पहले, कुछ दिन पहले विश्व बैंक ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि पिछले 12 वर्षों में भारत के 50 करोड़ लोग अत्यधिक गरीबी से बाहर आए हैं।”
प्रधानमंत्री ने आगे कहा,
”गरीबी हटाने के नारों के साथ दशकों में जो हासिल नहीं हो सका, वह देश ने सिर्फ 12 वर्षों में कर दिखाया है। सोचिए, यह कितनी बड़ी उपलब्धि है। दिवाली के दौरान हम रंगोली बनाते हैं। हमने भी कल्याणकारी योजनाओं की ऐसी रंगोली बनाई, जिसने लगातार गरीबों को सशक्त बनाने का काम किया।”
‘माओवादी आतंकवाद की कमर तोड़ दी’
प्रधानमंत्री ने कहा कि उनकी सरकार ने सुरक्षा बलों को नक्सल विरोधी अभियानों में जरूरी फैसले लेने की पूरी छूट दी। साथ ही व्यवस्था के भीतर से मिलने वाले कथित समर्थन को रोकने की दिशा में भी कदम उठाए।
उन्होंने कहा,
”पिछली सरकारों ने जमीन पर लड़ाई लड़ रहे सुरक्षाकर्मियों के हाथ भी बांध रखे थे। नक्सली हमले करते थे, लेकिन सुरक्षा बलों को खुलकर जवाब देने की आजादी नहीं थी। हमने सुरक्षा बलों को जरूरी फैसले लेने की पूरी छूट दी। हमने सरकार और व्यवस्था के भीतर कुछ लोगों की ओर से वामपंथी उग्रवाद को मिलने वाले समर्थन को रोकने के लिए भी काम किया। हमने संवेदनशीलता के साथ काम करते हुए माओवादी आतंकवाद की कमर तोड़ दी।”
उन्होंने नक्सल प्रभावित इलाकों में विकास और स्थानीय लोगों के जीवन में बदलाव को भी इस सफलता का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया।
पीएम मोदी ने कहा,
”सेवा भाव के साथ हमने नक्सल प्रभावित इलाकों के लोगों की जिंदगी बदलने का काम किया। यही वजह है कि नक्सलवाद से परेशान रहे लोग भी आज सरकार और सुरक्षा बलों के साथ मजबूती से खड़े हैं। इस बड़ी लड़ाई को जीतने में अहम योगदान देने वाले कई नागरिक भी आज यहां मौजूद हैं। मैं उन सभी का आभार व्यक्त करता हूं।”
बस्तर में सुरक्षा से विकास की ओर बढ़ते कदम
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का बस्तर दौरा केवल दिवाली मनाने तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इस दौरान उन्होंने देश की आंतरिक सुरक्षा, जवानों के बलिदान, नक्सलवाद के खिलाफ अभियान और विकास की जरूरतों पर भी अपनी बात रखी।
उन्होंने सुरक्षा बलों के जवानों को देश की एकता और अखंडता का मजबूत प्रहरी बताते हुए उनके योगदान को नमन किया।
बस्तर जैसे क्षेत्र में शांति, सुरक्षा और विकास का रास्ता मजबूत होना स्थानीय लोगों के भविष्य के लिए भी महत्वपूर्ण है। अब सबसे बड़ी चुनौती इस उपलब्धि को स्थायी बनाते हुए प्रभावित इलाकों में शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, सड़क और बुनियादी सुविधाओं का विस्तार करना है।
प्रधानमंत्री का जवानों के बीच दिवाली मनाना उन सुरक्षाकर्मियों के प्रति सम्मान का संदेश भी है, जो त्योहारों पर अपने घर-परिवार से दूर रहकर देश की सुरक्षा में तैनात रहते हैं।
Written & Edit by : Chandan Patel
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