Anant Singh News: बिहार की राजनीति में मोकामा के विधायक अनंत सिंह और जनता दल (यूनाइटेड) के बीच विवाद ने नया मोड़ ले लिया है। पार्टी से छह साल के लिए निष्कासित किए जाने के बाद अनंत सिंह ने तीखे तेवर दिखाते हुए कहा है कि उन्हें पार्टी से निकाले जाने का कोई अफसोस नहीं है। उन्होंने दावा किया कि आने वाले चुनाव में पार्टी को अपनी राजनीतिक हैसियत का पता चल जाएगा। इस दौरान उन्होंने नीतीश कुमार, निशांत कुमार और जदयू के मौजूदा नेतृत्व को लेकर भी कई तीखे बयान दिए।
JDU से निष्कासन के बाद अनंत सिंह का पहला बयान, पार्टी नेतृत्व पर साधा निशाना
बिहार की राजनीति में अपनी बाहुबली छवि के लिए चर्चित मोकामा विधायक अनंत सिंह ने जनता दल (यूनाइटेड) से निष्कासन के बाद पार्टी नेतृत्व पर खुलकर हमला बोला है। न्यूज 18 को दिए गए एक इंटरव्यू में उन्होंने साफ कहा कि वह अपने रुख पर कायम हैं और पार्टी से दोबारा उन्हें शामिल करने की अपील नहीं करेंगे।
अनंत सिंह ने कहा, “पार्टी उनका है, हमको कोई एतराज नहीं है। हम कहने भी नहीं जा रहे हैं कि हमको रखिए। हमको कोई दिक्कत नहीं है। हम उचित काम किए हैं। उचित पर पार्टी निकालता है तो इस पर हमको कुछ नहीं कहना है।”
उनके इस बयान से साफ है कि फिलहाल वह अपने निष्कासन के फैसले को लेकर नरमी दिखाने के मूड में नहीं हैं।
‘केकड़ा-बिच्छू सब पार्टी का मालिक बन गया’, नीतीश कुमार को लेकर क्या बोले अनंत सिंह?
अनंत सिंह ने जदयू के मौजूदा नेतृत्व पर निशाना साधते हुए कहा कि अगर नीतीश कुमार पार्टी में पहले की तरह सक्रिय और प्रभावशाली होते, तो उन्हें निष्कासित करने की हिम्मत कोई नहीं करता।
उन्होंने कहा, “नीतीश कुमार के लिए हमारा सम्मान वहीं रहेगा। वो कहीं भी रहेंगे, नीतीश कुमार का सम्मान करते रहेंगे। नीतीश कुमार होते तो कौन पार्टी से निकाल देता? आज तो वो बेचारे कुछ नहीं हैं। केकड़ा-बिच्छू सब पार्टी का मालिक बन गया है।”
उन्होंने आगे दावा किया कि आने वाले चुनाव में जदयू की सीटें काफी कम हो सकती हैं। अनंत सिंह ने कहा कि पार्टी में मंत्री बने बैठे नेताओं को चुनाव के दौरान अपनी राजनीतिक हैसियत का पता चल जाएगा।
उनके इन बयानों ने पार्टी के भीतर नेतृत्व और राजनीतिक प्रभाव को लेकर चल रही चर्चाओं को और तेज कर दिया है।
निशांत कुमार को लेकर अनंत सिंह ने क्या कहा?
इंटरव्यू के दौरान जब अनंत सिंह से पूछा गया कि उन्हें पार्टी से निष्कासित करने के फैसले के पीछे कौन है, तो उन्होंने कहा कि पार्टी का मालिक ही ऐसे फैसले लेता है।
वहीं, निशांत कुमार को लेकर सवाल पूछे जाने पर उन्होंने कहा, “बेचारे निशांत को लेकर हम कुछ नहीं बोलेंगे। निकाल दिया तो ठीक है। कोई भारी बात नहीं है। वो जो करेंगे हम तैयार हैं।”
अनंत सिंह ने अपनी गलती मानने से इनकार करते हुए कहा कि गलती उनकी नहीं, बल्कि पार्टी की है।
उन्होंने कहा, “हम कोई गलती नहीं किए हैं, गलती सरासर पार्टी किया है। 18 साल से हमको गाली देता रहा तो पार्टी के मुंह में घाव हो गया था। अब पार्टी का मुंह खुला है, तो हमको कोई दिक्कत नहीं है। निकालते हैं तो निकाल दीजिए पार्टी से।”
’12 सीट पर सिमट जाएंगे’, सदस्यता खत्म करने की सिफारिश पर भी दिया जवाब
जदयू की ओर से अनंत सिंह की विधानसभा सदस्यता समाप्त करने की सिफारिश किए जाने के सवाल पर भी उन्होंने बेबाकी से अपनी बात रखी।
अनंत सिंह ने कहा कि उनकी सदस्यता समाप्त करने के लिए पार्टी या अन्य लोग जो भी कदम उठाएं, उन्हें कोई परेशानी नहीं है।
उन्होंने कहा, “वो कुछ भी कर देंगे तो हमको गम नहीं है। हमको ना मरने का गम है और ना ही जीने की खुशी। कुछ भी कर दो।”
इसके साथ ही उन्होंने जदयू की चुनावी संभावनाओं पर सवाल उठाते हुए दावा किया कि पार्टी 12 सीटों पर सिमट सकती है। उन्होंने कहा कि नीतीश कुमार ने पार्टी बनाई, लेकिन आज मंत्री बने बैठे कई नेताओं का पार्टी के निर्माण में क्या योगदान रहा है?
अनंत सिंह ने यह भी कहा कि अगर पार्टी उनकी विधानसभा सदस्यता समाप्त करने की दिशा में आगे बढ़ती है, तो उन्हें इससे कोई परेशानी नहीं होगी।
‘जनता ही मालिक और भगवान है’, चुनाव को लेकर अनंत सिंह का दावा
जदयू से निकाले जाने के बाद आगे की राजनीतिक रणनीति के बारे में पूछे जाने पर अनंत सिंह ने कहा कि अभी उन्होंने किसी दूसरे राजनीतिक दल में शामिल होने का फैसला नहीं किया है।
उन्होंने पार्टी के कार्यकर्ताओं को धन्यवाद देने की बात कही और जनता को सबसे बड़ा बताते हुए कहा, “जनता ही मालिक और भगवान है। हमको निकाल दिया गया है ना, पता लग जाएगा चुनाव आएगा तो। 12 सीट भी नहीं आएगा।”
उन्होंने आगे कहा, “ये जो मंत्री बनकर बैठे हैं, तो अभी डेढ़-दो साल है, कुत्ता नहीं पूछेगा।”
अनंत सिंह के इन बयानों से स्पष्ट है कि वह फिलहाल अपने राजनीतिक रुख से पीछे हटने को तैयार नहीं हैं। हालांकि, भविष्य में वह किस राजनीतिक दल के साथ जाएंगे, इस पर उन्होंने कोई स्पष्ट फैसला नहीं बताया है।
अनंत सिंह और नीलम देवी को JDU ने छह साल के लिए क्यों निकाला?
जनता दल (यूनाइटेड) ने मोकामा विधायक अनंत सिंह और उनकी पत्नी, पूर्व विधायक नीलम देवी को छह साल के लिए पार्टी से निष्कासित कर दिया है। पार्टी की बिहार इकाई के अध्यक्ष उमेश सिंह कुशवाहा की ओर से जारी बयान में अनंत सिंह की प्राथमिक सदस्यता तत्काल प्रभाव से समाप्त करने की जानकारी दी गई।
पार्टी की ओर से कार्रवाई के पीछे कई आरोप बताए गए हैं। इनमें पार्टी के निर्देशों की अवहेलना, शीर्ष नेतृत्व के खिलाफ अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल और हाल में हुए विधान परिषद चुनाव में प्रतिद्वंद्वी दल के उम्मीदवार के पक्ष में प्रचार करना शामिल है।
पार्टी के मुताबिक, अनंत सिंह ने विधान परिषद चुनाव में जन सुराज पार्टी के उम्मीदवार अनुज सिंह का समर्थन किया था। उन्होंने अनुज सिंह के पक्ष में प्रचार करते हुए जदयू के विधान परिषद सदस्य नीरज कुमार को हराने का संकल्प भी जताया था।
इसी घटनाक्रम को पार्टी ने कथित तौर पर पार्टी विरोधी गतिविधियों के रूप में देखा और उनके खिलाफ कार्रवाई की।
विधानसभा सदस्यता समाप्त करने की भी सिफारिश
जदयू ने अनंत सिंह के खिलाफ कार्रवाई को आगे बढ़ाते हुए बिहार विधानसभा अध्यक्ष से संविधान की दसवीं अनुसूची के तहत उनकी विधानसभा सदस्यता समाप्त करने की सिफारिश भी की है।
हालांकि, पार्टी की ओर से सदस्यता समाप्त करने की सिफारिश किए जाने और विधानसभा सदस्यता वास्तव में समाप्त होने के बीच अंतर है। इस पर अंतिम स्थिति संबंधित संवैधानिक प्रक्रिया और सक्षम प्राधिकारी के निर्णय पर निर्भर करेगी।
दूसरी ओर, पार्टी ने अनंत सिंह की पत्नी और पूर्व विधायक नीलम देवी की प्राथमिक सदस्यता भी कथित पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल होने के आरोप में तत्काल प्रभाव से समाप्त कर दी है।
आगे क्या होगी अनंत सिंह की राजनीतिक रणनीति?
जदयू से निष्कासन के बाद अनंत सिंह के सामने आगे की राजनीतिक राह को लेकर कई सवाल खड़े हो गए हैं। उन्होंने फिलहाल किसी दूसरे राजनीतिक दल में शामिल होने की घोषणा नहीं की है, लेकिन अपने बयानों के जरिए पार्टी नेतृत्व को खुली चुनौती दी है।
अब देखना होगा कि अनंत सिंह के इस रुख का बिहार की राजनीति पर क्या असर पड़ता है और आने वाले चुनाव में उनके दावे कितने सही साबित होते हैं।
फिलहाल इतना साफ है कि जदयू से निष्कासन के बाद अनंत सिंह ने पीछे हटने के बजाय आक्रामक रुख अपनाया है। उनके बयानों ने बिहार की सियासत में नई चर्चा छेड़ दी है।
Written & Edit by : Chandan Patel
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