चकाई (जमुई)। जिस स्वास्थ्य केंद्र का उद्देश्य गांव के गरीब और जरूरतमंद लोगों को उनके घर के नजदीक प्राथमिक चिकित्सा उपलब्ध कराना है, वही केंद्र अगर खुद बदहाली का शिकार हो जाए तो सवाल सिर्फ व्यवस्था पर नहीं, बल्कि उस पूरी प्रशासनिक निगरानी पर उठता है जो कागजों में स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बताती है।
जमुई जिले के चकाई प्रखंड अंतर्गत कर्णगढ़ स्थित उप स्वास्थ्य केंद्र की तस्वीर ग्रामीण स्वास्थ्य व्यवस्था की जमीनी हकीकत पर गंभीर सवाल खड़े करती है। ग्रामीणों का आरोप है कि केंद्र पर नियमित स्वास्थ्य सेवाएं नहीं मिलतीं और बुनियादी सुविधाओं का भी अभाव है। स्थिति यहां तक पहुंच गई कि केंद्र के परिसर में जमा कचरे की सफाई के लिए स्थानीय ग्रामीणों और कम्युनिटी हेल्थ ऑफिसर को खुद आगे आकर झाड़ू उठानी पड़ी।
जब स्वास्थ्य केंद्र की सफाई भी ग्रामीणों को करनी पड़े
ग्रामीणों के मुताबिक, उप स्वास्थ्य केंद्र परिसर लंबे समय से गंदगी और कचरे से परेशान था। उनका कहना है कि शिकायतों के बावजूद संबंधित स्तर से समय पर कार्रवाई नहीं हुई।
आखिरकार स्थानीय जागरूक ग्रामीणों और केंद्र के कम्युनिटी हेल्थ ऑफिसर ने खुद सफाई अभियान चलाया और परिसर को साफ किया।
यह तस्वीर अपने आप में सवाल पूछती है – जिस केंद्र से ग्रामीणों को स्वास्थ्य और स्वच्छता का संदेश मिलना चाहिए, वहां सफाई की जिम्मेदारी भी आखिर ग्रामीणों को क्यों उठानी पड़ी?

एएनएम की मौजूदगी पर ग्रामीणों ने उठाए सवाल
केंद्र की कार्यप्रणाली को लेकर ग्रामीणों ने एएनएम की कथित अनियमित उपस्थिति पर भी सवाल उठाए हैं।
ग्रामीणों का आरोप है कि एएनएम अक्सर केंद्र से नदारद रहती हैं, जिसके कारण मरीजों और जरूरतमंद लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ता है।
हालांकि इन आरोपों की विभागीय स्तर पर स्वतंत्र पुष्टि होना बाकी है। ऐसे में स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के लिए यह जरूरी हो जाता है कि वे केंद्र की वास्तविक स्थिति और स्वास्थ्यकर्मियों की उपस्थिति की निष्पक्ष जांच कराएं।
उपस्थिति रजिस्टर को लेकर भी गंभीर सवाल
ग्रामीणों ने उपस्थिति रजिस्टर को लेकर भी सवाल खड़े किए हैं। उनका आरोप है कि रजिस्टर केंद्र पर रखने के बजाय बाहर रखा जाता है और इससे स्वास्थ्यकर्मियों की वास्तविक उपस्थिति की निगरानी पर सवाल उठते हैं।
यदि यह आरोप सही पाए जाते हैं तो मामला केवल लापरवाही तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि उपस्थिति और सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था की निगरानी की पारदर्शिता पर भी गंभीर प्रश्न खड़े होंगे।
इस पूरे मामले में विभागीय जांच के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
अस्पताल में एक भी बेड नहीं, मरीजों के सामने बड़ी परेशानी
कर्णगढ़ उप स्वास्थ्य केंद्र में बुनियादी स्वास्थ्य सुविधाओं की स्थिति भी ग्रामीणों के मुताबिक बेहद खराब है।
ग्रामीणों का कहना है कि केंद्र में एक भी बेड उपलब्ध नहीं है। ऐसे में किसी मरीज को कुछ देर आराम कराने या प्राथमिक उपचार के दौरान लिटाने की जरूरत पड़ जाए तो समस्या खड़ी हो जाती है।
केंद्र में बैठने के लिए पर्याप्त कुर्सियां तक नहीं होने का भी ग्रामीणों ने दावा किया है।
यानी जिस जगह पर ग्रामीण इलाज और राहत की उम्मीद लेकर पहुंचते हैं, वहां उन्हें पहले सुविधाओं की कमी से जूझना पड़ता है।
मुख्य गेट गायब, बाथरूम टूटा और पानी की भी समस्या
ग्रामीणों के अनुसार केंद्र का भवन भी रखरखाव के अभाव में जर्जर स्थिति में पहुंच गया है।
बताया गया कि –
- मुख्य गेट मौजूद नहीं है।
- बाथरूम की स्थिति खराब है।
- चापाकल खराब पड़ा है। पानी के नल में पानी नहीं।
- केंद्र में पानी की समस्या बनी रहती है।
- भवन की दीवारों में दरारें दिखाई देती हैं।
- मरीजों और उनके परिजनों के बैठने तक की पर्याप्त व्यवस्था नहीं है।
अगर इन समस्याओं की पुष्टि होती है तो यह साफ है कि केंद्र को सिर्फ स्वास्थ्यकर्मियों की उपस्थिति ही नहीं, बल्कि भवन और बुनियादी सुविधाओं के स्तर पर भी तत्काल सुधार की जरूरत है।
गरीब मरीज जाएं तो जाएं कहां?
कर्णगढ़ और आसपास के ग्रामीण इलाकों में रहने वाले गरीब परिवारों के लिए नजदीकी उप स्वास्थ्य केंद्र बेहद महत्वपूर्ण होता है। हर छोटी बीमारी या प्राथमिक उपचार के लिए दूर स्थित अस्पताल तक जाना आर्थिक और व्यावहारिक दोनों रूप से मुश्किल हो सकता है।
ग्रामीणों का दर्द यही है कि सरकार स्वास्थ्य सुविधाओं को गांव के करीब पहुंचाने की बात करती है, लेकिन जमीन पर अगर केंद्र में बेड, पानी, बैठने की जगह और नियमित स्वास्थ्यकर्मी तक उपलब्ध नहीं हों तो गरीब मरीज आखिर किस व्यवस्था पर भरोसा करे?
इलाज के लिए बनाए गए केंद्र का ही बदहाल होना ग्रामीणों के लिए सबसे बड़ी विडंबना है।
अफसरों की निगरानी पर भी उठे सवाल
सबसे बड़ा सवाल यह है कि अगर किसी सरकारी स्वास्थ्य केंद्र की हालत लंबे समय तक खराब रहती है तो इसकी जिम्मेदारी किसकी है?
स्वास्थ्य विभाग के पास प्रखंड और जिला स्तर पर अधिकारी तथा निगरानी की व्यवस्था मौजूद है। जमुई जिला प्रशासन की आधिकारिक वेबसाइट पर चकाई PHC के लिए DS/MOIC सहित स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के संपर्क उपलब्ध हैं।
ऐसे में ग्रामीणों का सवाल है कि अगर अधिकारी नियमित निरीक्षण करते हैं तो फिर कर्णगढ़ उप स्वास्थ्य केंद्र की ऐसी स्थिति लंबे समय तक कैसे बनी रही?
सिर्फ कागजों में व्यवस्था चलाने से गांव के मरीजों की परेशानी खत्म नहीं होगी। अधिकारियों को धरातल पर जाकर स्थिति देखनी होगी।
ग्रामीणों की मांग – जांच हो और व्यवस्था तत्काल सुधारी जाए
ग्रामीणों ने जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग से मांग की है कि कर्णगढ़ उप स्वास्थ्य केंद्र की स्थिति की तत्काल जांच कराई जाए।
ग्रामीण चाहते हैं कि –
- स्वास्थ्यकर्मियों की नियमित उपस्थिति सुनिश्चित हो।
- उपस्थिति रजिस्टर की पारदर्शी निगरानी हो।
- केंद्र में जरूरी बेड और कुर्सियों की व्यवस्था की जाए।
- खराब चापाकल को दुरुस्त कराया जाए।
- टूटे बाथरूम की मरम्मत हो।
- मुख्य गेट लगाया जाए।
- भवन की दरारों की तकनीकी जांच कराई जाए।
- परिसर की नियमित साफ-सफाई सुनिश्चित की जाए।
- मरीजों को प्राथमिक उपचार की जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं।
अब देखना है – अधिकारी कार्रवाई करते हैं या मामला फाइलों में दब जाता है?
कर्णगढ़ उप स्वास्थ्य केंद्र की तस्वीर सिर्फ एक भवन की बदहाली की कहानी नहीं है। यह उस व्यवस्था पर सवाल है, जिसके भरोसे ग्रामीण अपने परिवार के इलाज की उम्मीद रखते हैं।
ग्रामीणों ने अपनी शिकायत सामने रख दी है। अब जिम्मेदारी स्वास्थ्य विभाग और जिला प्रशासन की है कि वह मौके पर जांच कर वास्तविक स्थिति सामने लाए और दोष या लापरवाही पाए जाने पर नियमानुसार कार्रवाई करे।
क्योंकि सरकारी स्वास्थ्य केंद्र अगर मरीज को इलाज देने के बजाय उसे व्यवस्था की कमी का दर्द दे, तो सवाल पूछना जरूरी है – आखिर गांव के गरीब की सेहत की जिम्मेदारी कौन लेगा?
Written & Edit by : Chandan Patel
Reported by: Ishwar Kumar Turi
AVN NEWS | आपकी खबर, आपकी आवाज
www.avnnews.in

यह भी पढ़ें: देश ओर राज्यों बिहार जमुई और आसपास की स्थानीय खबरों के लिए AVN News पर जुड़े रहें।
गोवा के 97 मतदाता और ECINET का सवाल: जब ERO ने योग्य माना, फिर भी वोटर लिस्ट से क्यों गायब रहे नाम?
जमुई कोर्ट में आरोपी हरेराम यादव को वकील ने जड़ा थप्पड़, छात्रा से बदसलूकी मामले में बढ़ा आक्रोश
सत्ता आपकी, सरकार आपकी… फिर बिहार की जनता क्यों सहे बाढ़, बदहाल व्यवस्था और कानून-व्यवस्था का दर्द?
जमुई में नाबालिग छात्रा से बदसलूकी का मुख्य आरोपी नंदन यादव पुलिस मुठभेड़ में घायल, पैर में लगी गोली
जमुई में अपराध पर उठते सवाल: क्या अपराधियों में कानून का डर कम हो रहा है?
NCERT की किताब में ‘चंदा मामा दूर के’ कविता पर विवाद, पटना हाईकोर्ट ने केंद्र से मांगा जवाब
गिद्धौर में एंबुलेंस से शराब तस्करी का खुलासा, 230 लीटर बीयर के साथ दो गिरफ्तार
गिद्धौर आवास पर परिवहन मंत्री दामोदर रावत ने सुनी जनसमस्याएं, समाधान का दिया भरोसा
महंगाई बढ़ी, कमाई पर दबाव: मिडिल क्लास और गरीब परिवारों की जिंदगी क्यों होती जा रही है मुश्किल?
चंद्रमंडी में बढ़ते अपराध के खिलाफ प्रतिरोध मार्च, थाना प्रभारी गजेंद्र कुमार पर कार्रवाई की मांग
गिद्धौर में धूमधाम से हुआ गणपति बप्पा का विसर्जन, ‘गणपति बप्पा मोरया’ के जयकारों से गूंजा घाट
बिहार बाढ़ 2026: राजनीति की जननी बिहार बाढ़ में डूबा, सवाल बड़ा – क्या बिहार भारत का हिस्सा नहीं?
गिद्धौर कन्या मध्य विद्यालय की शिक्षिका प्रियंका कुमारी का निधन, ड्यूटी के दौरान बिगड़ी तबीयत
