जमुई। 10वीं की नाबालिग छात्रा से कथित छेड़छाड़ और बदसलूकी के मामले में गिरफ्तार आरोपी हरेराम यादव को बुधवार को जमुई कोर्ट में पेश किया गया। पेशी के बाद जैसे ही पुलिस आरोपी को कोर्ट परिसर से बाहर लेकर निकल रही थी, अधिवक्ता आकाश पांडे ने उसे थप्पड़ मार दिया। घटना के बाद कोर्ट परिसर में कुछ देर के लिए अफरा-तफरी का माहौल बन गया। घटना की पुष्टि खुद अधिवक्ता आकाश पांडे ने की है।
मामले को लेकर जमुई में पहले से ही भारी आक्रोश है। पुलिस के मुताबिक, 19 सितंबर को मड़वा पहाड़ी इलाके में 10वीं की छात्रा और उसके साथ मौजूद नाबालिग छात्र के साथ बदसलूकी की घटना सामने आई थी। वीडियो सामने आने के बाद पुलिस ने कार्रवाई तेज की और आरोपियों की गिरफ्तारी शुरू की।
कोर्ट से बाहर निकलते ही आरोपी को पड़ा थप्पड़
बुधवार को हरेराम यादव को विशेष पॉक्सो अदालत में पेश किया गया। पेशी के बाद जब पुलिस उसे वापस ले जा रही थी, तभी अधिवक्ता आकाश पांडे ने आरोपी को थप्पड़ मार दिया।
मीडिया से बातचीत में आकाश पांडे ने थप्पड़ मारने की बात स्वीकार करते हुए कहा कि घटना को लेकर उनके अंदर काफी आक्रोश था। उनका कहना था कि वकील होने से पहले वह एक इंसान हैं और छात्रा के साथ हुई घटना ने उन्हें भीतर तक झकझोर दिया है।
उन्होंने यह भी कहा कि यदि उनके इस कदम पर कानून के तहत कोई कार्रवाई होती है तो वह उसका सामना करने के लिए तैयार हैं।

भीड़ ने आरोपी से पूछा- बहन के साथ होता तो क्या करते?
आरोपी को कोर्ट से बाहर लाए जाने के दौरान वहां मौजूद लोगों में भी नाराजगी देखने को मिली। भीड़ की ओर से आरोपी से सवाल किया गया कि अगर ऐसी घटना उसकी अपनी बहन के साथ होती तो क्या वह तब भी ऐसा ही व्यवहार करता?
कोर्ट परिसर में मौजूद लोगों का आक्रोश इस पूरे मामले की गंभीरता और स्थानीय स्तर पर बनी नाराजगी को दिखाता है।
हालांकि, किसी आरोपी के खिलाफ अंतिम दोष सिद्धि अदालत के फैसले से ही होती है। इसलिए मामले की जांच और न्यायिक प्रक्रिया का पूरा होना महत्वपूर्ण है।
अस्पताल से दोपहर में निकली थी पुलिस टीम
पुलिस टीम बुधवार दोपहर करीब डेढ़ बजे हरेराम यादव को अस्पताल से लेकर निकली थी। कोर्ट के बाहर भीड़ अधिक होने की वजह से पुलिस उसे तत्काल परिसर में नहीं लाई।
जमुई के एसपी विश्वजीत दयाल ने बताया कि मंगलवार को पुलिस कार्रवाई के दौरान गिरफ्तार किए गए दो आरोपियों में से हरेराम यादव चिकित्सकीय रूप से फिट हो गया था, इसलिए उसे बुधवार को अदालत में पेश किया गया।
वहीं, दूसरे आरोपी की चिकित्सकीय स्थिति अभी पूरी तरह ठीक नहीं होने के कारण उसकी पेशी बुधवार को नहीं हो सकी।
वकीलों ने आरोपियों की पैरवी से किया इनकार
मामले को लेकर जमुई जिला विधिज्ञ संघ ने भी सख्त रुख अपनाया है। संघ के अध्यक्ष सीताराम सिंह और महासचिव अमित कुमार के मुताबिक, इस मामले में कोई भी अधिवक्ता आरोपियों की ओर से पैरवी नहीं करेगा।
इस फैसले के बाद मामले को लेकर स्थानीय स्तर पर कानूनी समुदाय के रुख की भी चर्चा तेज हो गई है।
कांग्रेस ने बनाई 8 सदस्यीय उच्चस्तरीय समिति
जमुई की घटना को लेकर बिहार प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने भी आठ सदस्यीय उच्चस्तरीय समिति गठित की है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष राजेश राम के निर्देश पर गठित समिति बुधवार, 23 सितंबर को जमुई पहुंची और पीड़ित परिवार से मुलाकात कर घटना से जुड़ी जानकारी ली।
समिति में मिन्नत रहमानी, पंकज यादव, प्रो. डॉ. कुमारी अनिता, डॉ. गौरव सिंह, जीतेंद्र नाथ पटेल, पूनम यादव, सूरज यादव और मेनका कुमारी शामिल हैं।
कांग्रेस के अनुसार, समिति प्रशासन और संबंधित अधिकारियों से मुलाकात कर मामले की कार्रवाई तथा पीड़ित परिवार की सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर चर्चा करेगी।
पीड़ित परिवार से मिलीं महिला कांग्रेस की कार्यकारी अध्यक्ष
बिहार प्रदेश महिला कांग्रेस की कार्यकारी अध्यक्ष डॉ. कुमारी सोनी ने भी पीड़ित छात्रा और उसके परिवार से मुलाकात की। उन्होंने परिवार को भरोसा दिलाया कि इस मुश्किल समय में उन्हें अकेला महसूस करने की जरूरत नहीं है।
डॉ. सोनी के अनुसार, छात्रा के पिता घटना के बाद काफी सदमे में हैं। उन्होंने परिवार से कहा कि घटना के लिए छात्रा या उसके परिवार को जिम्मेदार ठहराना गलत है।
उन्होंने छात्रा की सुरक्षा को प्राथमिकता बताते हुए प्रशासन से सुरक्षा संबंधी कदम उठाने की मांग की है।
छात्रा के कपड़ों को लेकर अफवाह न फैलाने की अपील
डॉ. कुमारी सोनी ने छात्रा के कपड़ों को लेकर सोशल मीडिया पर चल रही चर्चाओं पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि घटना के लिए छात्रा को जिम्मेदार ठहराने वाली किसी भी तरह की बात या अफवाह नहीं फैलाई जानी चाहिए।
उनका कहना है कि सोशल मीडिया पर प्रसारित वीडियो के आधार पर छात्रा के कपड़ों को लेकर अलग-अलग दावे किए जा रहे हैं, इसलिए बिना पुष्टि के किसी तरह की टिप्पणी से बचना चाहिए।
15 दिन में फास्ट ट्रैक सुनवाई की मांग
कांग्रेस ने मामले की जल्द सुनवाई की मांग की है। डॉ. सोनी ने कहा कि मामले में पॉक्सो एक्ट के तहत दर्ज धाराओं की गंभीरता से जांच होनी चाहिए और केस को फास्ट ट्रैक तरीके से आगे बढ़ाया जाना चाहिए।
उन्होंने घटनास्थल और आसपास के सीसीटीवी कैमरों की जांच कर घटना में शामिल अन्य संदिग्धों की पहचान करने की भी मांग की।
साथ ही उन्होंने कहा कि पुलिस की जांच और कार्रवाई की जानकारी पीड़ित परिवार को भी नियमित रूप से दी जानी चाहिए, ताकि परिवार को सुरक्षा और न्याय की प्रक्रिया को लेकर भरोसा बना रहे।
परिवार को सता रहा है आरोपियों के दोबारा लौटने का डर
डॉ. सोनी के मुताबिक, पीड़ित परिवार को इस बात की चिंता है कि यदि कोई आरोपी भविष्य में जेल से बाहर आता है तो परिवार की सुरक्षा पर खतरा पैदा हो सकता है।
परिवार की इसी चिंता को देखते हुए उन्होंने प्रशासन से सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने की मांग की है।
पीड़िता की पहचान सार्वजनिक न करने की अपील
डॉ. कुमारी सोनी ने मीडिया और सोशल मीडिया यूजर्स से अपील की कि नाबालिग पीड़िता की पहचान किसी भी कीमत पर सार्वजनिक नहीं की जाए।
किसी रिपोर्ट या सोशल मीडिया पोस्ट में उसकी तस्वीर का इस्तेमाल आवश्यक हो तो चेहरा पूरी तरह ब्लर या ढककर ही दिखाया जाना चाहिए। नाबालिग पीड़ित की पहचान की गोपनीयता बनाए रखना कानूनी और नैतिक दोनों दृष्टि से महत्वपूर्ण है।
अब जांच और अदालत की कार्रवाई पर नजर
जमुई की इस घटना के बाद पुलिस कार्रवाई, आरोपियों की गिरफ्तारी, कोर्ट की कार्यवाही और पीड़ित परिवार की सुरक्षा को लेकर लगातार सवाल उठ रहे हैं। एक ओर पुलिस आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई का दावा कर रही है, वहीं दूसरी ओर स्थानीय स्तर पर जल्द न्याय और सुरक्षा की मांग तेज है।
अब पूरे मामले में आगे की जांच, बाकी आरोपियों की गिरफ्तारी और अदालत की प्रक्रिया महत्वपूर्ण होगी। आरोपों पर अंतिम फैसला न्यायालय की प्रक्रिया के बाद ही होगा।
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Written & Edit by : Chandan Patel

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