नई दिल्ली: शहीद-ए-आजम भगत सिंह की जयंती से पहले राजधानी दिल्ली में उनके विचारों, बलिदान और क्रांतिकारी विरासत को याद करने के लिए ‘चलो भगत सिंह के साथ’ कार्यक्रम आयोजित किया गया। 27 सितंबर को आयोजित इस कार्यक्रम में दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता भी शामिल हुईं। कार्यक्रम की सामने आई तस्वीरों में मुख्यमंत्री मंच पर अन्य अतिथियों के साथ नजर आईं। आयोजन के जरिए भगत सिंह के विचारों को नई पीढ़ी तक पहुंचाने और युवाओं को देश के स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास से जोड़ने का संदेश दिया गया।
‘चलो भगत सिंह के साथ’ कार्यक्रम में शामिल हुईं CM रेखा गुप्ता
दिल्ली में आयोजित इस कार्यक्रम में शहीद भगत सिंह के जीवन, विचारों और देश की आजादी के लिए उनके संघर्ष को याद किया गया। कार्यक्रम के मंच पर भगत सिंह की तस्वीर के साथ ‘चलो भगत सिंह के साथ’ का संदेश भी दिखाई दिया।
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की मौजूदगी कार्यक्रम की प्रमुख झलकियों में शामिल रही। सामने आई तस्वीरों में वह मंच पर अन्य अतिथियों के साथ बैठी दिखाई दे रही हैं। कार्यक्रम का उद्देश्य भगत सिंह की ऐतिहासिक भूमिका और उनके विचारों को लोगों के बीच चर्चा का विषय बनाना रहा।
भगत सिंह की जयंती पर क्यों किया जाता है उन्हें याद?
शहीद-ए-आजम भगत सिंह भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के प्रमुख क्रांतिकारियों में गिने जाते हैं। उनका जन्म 28 सितंबर 1907 को पंजाब के बंगा गांव में हुआ था, जो उस समय ब्रिटिश भारत का हिस्सा था और अब पाकिस्तान में स्थित है।
भगत सिंह ने कम उम्र में ही अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ संघर्ष में सक्रिय भूमिका निभाई। उनके विचारों, साहस और देश की आजादी के लिए दिए गए बलिदान ने भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन को नई पहचान दी। आज भी उनके विचार युवाओं को सामाजिक बदलाव, समानता और देश के प्रति जिम्मेदारी पर सोचने के लिए प्रेरित करते हैं।
23 मार्च 1931 को दी गई थी फांसी
भगत सिंह को उनके साथी क्रांतिकारी राजगुरु और सुखदेव के साथ 23 मार्च 1931 को लाहौर जेल में फांसी दी गई थी। तीनों क्रांतिकारियों का बलिदान भारतीय इतिहास में एक महत्वपूर्ण अध्याय है। हर साल उनकी जयंती और शहादत दिवस पर देशभर में उन्हें श्रद्धांजलि दी जाती है।
भगत सिंह की विरासत केवल उनके क्रांतिकारी संघर्ष तक सीमित नहीं है। उनके लेखों और विचारों में सामाजिक असमानता, शोषण, स्वतंत्रता और तर्कशील सोच जैसे विषय भी प्रमुखता से सामने आते हैं।
युवाओं तक भगत सिंह के विचार पहुंचाने पर जोर
‘चलो भगत सिंह के साथ’ जैसे आयोजन स्वतंत्रता आंदोलन के इतिहास को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का माध्यम बन सकते हैं। भगत सिंह के जीवन और विचारों पर चर्चा के जरिए युवाओं को देश के स्वतंत्रता संघर्ष, उसके मूल्यों और सामाजिक जिम्मेदारियों से परिचित कराने का प्रयास किया जाता है।
दिल्ली में आयोजित इस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की मौजूदगी और मंच पर प्रदर्शित भगत सिंह की तस्वीरों ने आयोजन को चर्चा में ला दिया। कार्यक्रम की विस्तृत गतिविधियों और आयोजकों की ओर से जारी आधिकारिक जानकारी के आधार पर इससे जुड़ी अन्य जानकारियां भी सामने आ सकती हैं।
नोट: भगत सिंह की जन्मतिथि के संबंध में प्रचलित ऐतिहासिक अभिलेखों के अनुसार उनकी जन्मतिथि 28 सितंबर 1907 मानी जाती है। इसलिए 27 सितंबर को आयोजित कार्यक्रम को उनकी जयंती से पहले का आयोजन कहना अधिक सटीक है।
Written & Edit by : Chandan Patel
Reported by : Chandan Patel
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