रतनपुर (जमुई): न आग लगी थी, न किसी के घर में मेडिकल इमरजेंसी थी, फिर भी एक ही घर के दरवाजे पर पुलिस, फायर ब्रिगेड और एंबुलेंस पहुंच गईं। तीन सरकारी आपातकालीन सेवाओं की गाड़ियों को एक साथ देखकर गांव में अफरा-तफरी और चर्चाओं का माहौल बन गया। बाद में मामला कथित फर्जी कॉल का निकला। घटना ने आपातकालीन सेवाओं के दुरुपयोग और कॉल करने वाले की पहचान को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
मामला जमुई जिले के गिद्धौर प्रखंड अंतर्गत रतनपुर पंचायत के वार्ड नंबर-2 का है। मंगलवार, 13 अक्टूबर 2026 की रात ज्ञान पांडे के घर पर हुई इस घटना के बाद ग्रामीण यह जानने के लिए उत्सुक रहे कि आखिर एक ही पते पर तीनों आपातकालीन सेवाओं को किसने और क्यों बुलाया।
एक के बाद एक पहुंचीं तीन आपातकालीन सेवाएं
जानकारी के अनुसार, मंगलवार रात सबसे पहले डायल 112 की पुलिस टीम ज्ञान पांडे के घर पहुंची। पुलिस टीम मामले की छानबीन कर ही रही थी कि कुछ ही देर बाद फायर ब्रिगेड की गाड़ी भी सायरन बजाते हुए मौके पर पहुंच गई। इसके बाद 102 एंबुलेंस के पहुंचने से ग्रामीणों की हैरानी और बढ़ गई।
एक ही घर पर पुलिस, दमकल और एंबुलेंस की मौजूदगी देखकर लोग तरह-तरह के कयास लगाने लगे। ग्रामीणों के मन में सवाल उठने लगा कि आखिर वहां ऐसी कौन-सी घटना हुई है, जिसके लिए एक साथ तीन आपातकालीन सेवाओं को बुलाना पड़ा।
फोन पर बताई गई आग लगने की सूचना
डायल 112 के चालक के अनुसार, मोबाइल नंबर 70502 39279 से फोन कर सूचना दी गई थी कि ज्ञान पांडे के घर में भीषण आग लग गई है। इसी सूचना के आधार पर पुलिस टीम मौके पर पहुंची और फायर ब्रिगेड को भी सूचित किया गया।
हालांकि, मौके पर पहुंचने के बाद आग लगने की सूचना की वास्तविकता को लेकर सवाल खड़े हो गए। बताया गया कि जिस घर में आग लगने की सूचना दी गई थी, वहां ऐसी कोई घटना सामने नहीं आई।
उसी नंबर से 102 एंबुलेंस को भी किया गया फोन
मामले में एक और हैरान करने वाली बात सामने आई। 102 एंबुलेंस के कर्मचारी बीरेंद्र कुमार के मुताबिक, उसी मोबाइल नंबर से एंबुलेंस सेवा पर भी कॉल किया गया था। फोन करने वाले ने ज्ञान पांडे के घर पर डिलीवरी के मरीज के होने की बात कही और तत्काल एंबुलेंस भेजने का अनुरोध किया।
इस तरह एक ही मोबाइल नंबर से आग लगने और प्रसव संबंधी आपात स्थिति की अलग-अलग सूचनाएं दिए जाने की बात सामने आई। इसके बाद पूरे मामले को लेकर संदेह गहराने लगा।
ज्ञान पांडे ने कॉल करने से किया इनकार
मौके पर पहुंची पुलिस ने ज्ञान पांडे और उनके परिजनों से पूछताछ की। बताया गया कि ज्ञान पांडे ने स्पष्ट रूप से कहा कि उन्होंने न तो डायल 112 पर, न फायर ब्रिगेड के लिए 101 पर और न ही 102 एंबुलेंस सेवा पर कोई कॉल किया था।
उनके इस बयान के बाद यह सवाल उठने लगा कि आखिर संबंधित मोबाइल नंबर से फोन किसने किया और एक ही घर के नाम पर अलग-अलग आपातकालीन स्थितियों की सूचना देने के पीछे क्या वजह थी।
घटना की जानकारी मिलने पर नक्षत्र समाचार+ के जिला संवाददाता विक्रम कुमार विक्रांत भी मौके पर पहुंचे और मामले की पड़ताल की।
पुलिस ने थाने में पक्ष रखने को कहा
मिली जानकारी के अनुसार, पुलिस ने ज्ञान पांडे को दिन में थाने आकर अपना पक्ष रखने के लिए कहा। इसके बाद मौके पर स्थिति शांत हुई। हालांकि, उपलब्ध जानकारी के आधार पर अभी यह स्पष्ट नहीं है कि कॉल किस व्यक्ति ने किया था और उसके पीछे क्या मंशा थी।
फर्जी कॉल के आरोपों की आधिकारिक पुष्टि और संबंधित मोबाइल नंबर के धारक की पहचान के संबंध में पुलिस की ओर से विस्तृत जानकारी सामने आना बाकी है।
जांच के बाद ही खुलेगा फर्जी कॉल का राज
रतनपुर की इस घटना ने आपातकालीन सेवाओं के इस्तेमाल को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अगर जानबूझकर गलत सूचना देकर पुलिस, दमकल और एंबुलेंस को बुलाया गया, तो इससे सरकारी संसाधनों और आपात स्थिति में मदद की जरूरत वाले लोगों के लिए उपलब्ध सेवाओं पर अनावश्यक दबाव पड़ सकता है।
अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि गिद्धौर पुलिस संबंधित मोबाइल नंबर और कॉल से जुड़े तथ्यों की जांच कर मामले की सच्चाई सामने लाती है या नहीं। फिलहाल, कॉल करने वाले की पहचान और घटना के पीछे की मंशा स्पष्ट होने तक मामले में किसी व्यक्ति को दोषी ठहराना उचित नहीं होगा।
Written & Edit by : Chandan Patel
Reported by: Vikki Kumar
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