नई दिल्ली। मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ दायर दो महत्वपूर्ण याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट 5 अक्टूबर यानी आज सुनवाई करेगा। इन याचिकाओं में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) प्रक्रिया, मतदाता सूची से कथित तौर पर नाम हटाने और चुनाव आयोग के भीतर एकतरफा फैसलों को लेकर सवाल उठाए गए हैं।

मामले की सुनवाई भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ करेगी। यह मामला चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और मतदाता सूची से जुड़े मुद्दों के कारण राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बना हुआ है।

क्या है पूरा SIR विवाद?

याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि SIR प्रक्रिया से जुड़े करीब 14 महत्वपूर्ण फैसले अन्य चुनाव आयुक्तों की सहमति के बिना लिए गए। याचिकाओं में दावा किया गया है कि SIR के दौरान 30 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम हटाए गए, जिसकी स्वतंत्र जांच की मांग की गई है।

हालांकि, इन आरोपों पर चुनाव आयोग या संबंधित अधिकारियों की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार है। मामले की सच्चाई और कानूनी स्थिति पर अंतिम निर्णय सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई के बाद ही स्पष्ट होगा।

पहली याचिका में क्या मांगें की गई हैं?

रमेश कुमार सिंह द्वारा दायर याचिका में कहा गया है कि चुनाव आयोग एक बहुसदस्यीय संवैधानिक संस्था है और उसके फैसले सामूहिक रूप से लिए जाने चाहिए।

याचिका में मांग की गई है कि:

  • चुनाव आयोग के मूल रिकॉर्ड की जांच हो।
  • विवादित फैसलों की संवैधानिक और कानूनी वैधता परखने के लिए स्वतंत्र समीक्षा कराई जाए।
  • अंतरिम राहत के रूप में CEC ज्ञानेश कुमार को कार्य से अलग रखने पर विचार किया जाए।

दूसरी याचिका में SIT और फोरेंसिक ऑडिट की मांग

एडवोकेट शैलेंद्र मणि त्रिपाठी की याचिका में कई गंभीर मांगें रखी गई हैं।

इनमें शामिल हैं:

  • कथित एकतरफा 14 फैसलों को रद्द करना।
  • रिटायर्ड सुप्रीम कोर्ट जज की अध्यक्षता में SIT या न्यायिक आयोग का गठन।
  • ECINet और ERONet डेटाबेस का फोरेंसिक ऑडिट।
  • SIR प्रक्रिया के दौरान हुए बदलावों की तकनीकी जांच।

अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की भी मांग

याचिका में CEC ज्ञानेश कुमार के अलावा वरिष्ठ उप चुनाव आयुक्त मनीष गर्ग, डीजी (आईटी) सीमा खन्ना और अन्य संबंधित अधिकारियों के खिलाफ जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 32 के तहत कार्रवाई की मांग की गई है।

धारा 32 में मतदाता सूची तैयार करने, संशोधन या सुधार से जुड़े सरकारी दायित्वों के उल्लंघन पर दंड का प्रावधान है।

Form-6 और वोटर डेटा को लेकर क्या आरोप हैं?

याचिकाओं में आरोप लगाया गया है कि:

  • Form-6 में बिना अनुमति बदलाव किए गए।
  • मतदाता डेटा को केंद्रीकृत किया गया।
  • ECINet के जरिए कुछ पात्र मतदाताओं के नाम बहाल नहीं किए गए।

इन आरोपों की भी स्वतंत्र जांच की मांग की गई है।

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के बाद बढ़ा विवाद

इस पूरे विवाद को उस समय और बल मिला, जब एक मीडिया रिपोर्ट में दावा किया गया कि चुनाव आयोग के भीतर SIR प्रक्रिया को लेकर मतभेद थे।

रिपोर्ट के अनुसार, चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने कई मौकों पर आपत्तियां दर्ज कराई थीं। हालांकि, इन दावों की आधिकारिक पुष्टि या खंडन संबंधित पक्षों द्वारा सार्वजनिक रूप से नहीं किया गया है।

क्या ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कार्रवाई संभव है?

1. कानूनी सुरक्षा का प्रावधान

मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्त (नियुक्ति, सेवा शर्तें और कार्यकाल) अधिनियम, 2023 की धारा 16 के तहत आधिकारिक कर्तव्यों के दौरान लिए गए फैसलों पर विशेष कानूनी सुरक्षा का प्रावधान है।

2. सरकार और भाजपा का पक्ष

सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी ने सभी आरोपों को खारिज किया है और इन्हें राजनीतिक आरोप बताया है।

3. महाभियोग ही अंतिम संवैधानिक रास्ता

संविधान के अनुच्छेद 324(5) के अनुसार, मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने की प्रक्रिया महाभियोग के माध्यम से ही संभव है। इसके लिए संसद के दोनों सदनों में विशेष बहुमत की आवश्यकता होती है।

सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई पर टिकी निगाहें

5 अक्टूबर की सुनवाई केवल एक व्यक्ति या एक पद से जुड़ा मामला नहीं है, बल्कि यह चुनावी प्रक्रिया, मतदाता सूची की पारदर्शिता और संवैधानिक संस्थाओं की कार्यप्रणाली से जुड़े व्यापक सवालों को भी सामने लाती है। अब सभी की नजर सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर है, जो इस विवाद की आगे की दिशा तय कर सकता है।

Written & Edit by : Chandan Patel

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By Chandan Patel

चंदन पटेल AVN News से लंबे समय से जुड़े पत्रकार हैं। उन्होंने वर्ष 2020 से रिपोर्टर के रूप में पत्रकारिता की शुरुआत की और जमीनी स्तर की खबरों को प्रमुखता से उठाते हुए लगातार अपनी पहचान बनाई। वर्तमान में वे AVN News के एडिटर-इन-चीफ के रूप में समाचार संपादन, कवरेज और डिजिटल पत्रकारिता का नेतृत्व कर रहे हैं। राजनीति, खेल,स्थानीय मुद्दों, जनसमस्याओं, प्रशासनिक गतिविधियों और सामाजिक सरोकारों से जुड़ी खबरों को तथ्यपरक और सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचाना उनकी पत्रकारिता की प्रमुख विशेषता है। उनका उद्देश्य आम लोगों की आवाज को प्रमुखता देना और विश्वसनीय खबरों के माध्यम से समाज को जागरूक करना है।

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