गिद्धौर (जमुई)। गिद्धौर थाना क्षेत्र में कथित अवैध बालू उठाव का कारोबार थमने का नाम नहीं ले रहा है। ग्रामीणों का आरोप है कि सुबह के अंधेरे में नदी घाटों से ट्रैक्टर के जरिए लगातार बालू उठाव किया जा रहा है। सबसे गंभीर सवाल यह है कि सूचना देने के बावजूद पुलिस के समय पर नदी घाट तक नहीं पहुंचने से कथित बालू कारोबारियों का मनोबल बढ़ रहा है।
ग्रामीणों के मुताबिक गुरुवार सुबह भी रतनपुर पंचायत के अंतर्गत आने वाले कैराकादो, भौराटांड़ और महुली नदी घाटों पर बालू उठाव का सिलसिला जारी रहा। ग्रामीणों का दावा है कि सुबह करीब 4 बजे से 7 बजे तक ट्रैक्टरों के जरिए बालू उठाकर दूसरे स्थानों तक पहुंचाया जाता है।
पुलिस को सूचना के बाद भी देर से पहुंचने का आरोप
स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि नदी घाट पर बालू उठाव की सूचना गिद्धौर थाना पुलिस को फोन के माध्यम से दी गई। इसके बावजूद पुलिस कथित तौर पर तत्काल मौके पर नहीं पहुंची और करीब एक घंटे बाद पहुंची।
ग्रामीणों का कहना है कि जब तक पुलिस नदी घाट तक पहुंचती है, तब तक ट्रैक्टर बालू लेकर मौके से निकल चुके होते हैं। इससे पुलिस की कार्रवाई को लेकर स्थानीय लोगों के बीच सवाल खड़े हो रहे हैं।
नाम नहीं बताने की शर्त पर एक ग्रामीण ने आरोप लगाया कि सूचना देने के बाद भी पुलिस के पहुंचने में देरी होती है। ग्रामीण के मुताबिक, पुलिस के पहुंचने तक नदी घाट खाली हो जाता है और फिर कार्रवाई के लिए कोई वाहन या व्यक्ति मौके पर नहीं मिलता।
हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।
कैराकादो, भौराटांड़ और महुली घाट पर उठ रहे सवाल
ग्रामीणों के अनुसार रतनपुर पंचायत के कैराकादो गांव, भौराटांड़, महुली और आसपास के क्षेत्रों में बालू लदे ट्रैक्टरों की आवाजाही लगातार देखी जा रही है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि नदी घाट से बालू लेकर निकलने वाले ट्रैक्टर गांव की सड़कों से होकर गुजरते हैं। ऐसे में तेज रफ्तार या भारी वाहनों की आवाजाही से पैदल चलने वाले लोगों और बच्चों की सुरक्षा को लेकर भी चिंता बनी हुई है।
ग्रामीणों का सवाल है कि यदि किसी दुर्घटना में कोई व्यक्ति या बच्चा बालू लदे ट्रैक्टर की चपेट में आ जाता है, तो इसकी जिम्मेदारी आखिर किसकी होगी?
ग्रामीणों में पुलिस प्रशासन के प्रति नाराजगी
बालू उठाव को लेकर लगातार शिकायतों के बावजूद प्रभावी कार्रवाई नहीं होने का आरोप लगाते हुए ग्रामीणों में नाराजगी देखी जा रही है।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि नदी घाटों पर नियमित निगरानी की जाए और अवैध खनन एवं परिवहन में शामिल वाहनों पर कार्रवाई हो, तो इस कारोबार पर काफी हद तक रोक लगाई जा सकती है।
स्थानीय लोगों ने जिले के वरीय अधिकारियों और खनन विभाग से मामले का संज्ञान लेने और नदी घाटों की जांच कराने की मांग की है।
गिद्धौर पुलिस का क्या कहना है?
इस मामले में गिद्धौर थाना के प्रभारी थानाध्यक्ष जय प्रकाश सिंह ने कहा कि सुबह छापेमारी की गई थी, लेकिन नदी में कोई ट्रैक्टर नहीं मिला।
उन्होंने कहा कि अवैध बालू उठाव के खिलाफ पुलिस की कार्रवाई लगातार जारी रहेगी।
सवाल यह है कि आखिर कब रुकेगा बालू का खेल?
गिद्धौर क्षेत्र में यदि ग्रामीणों के आरोप सही हैं तो यह सिर्फ अवैध बालू उठाव का मामला नहीं, बल्कि नदी, पर्यावरण, सरकारी राजस्व और ग्रामीणों की सुरक्षा से जुड़ा गंभीर विषय है।
अब देखना होगा कि जिला प्रशासन और खनन विभाग इस मामले में आगे क्या कार्रवाई करता है और क्या नदी घाटों पर नियमित निगरानी बढ़ाई जाती है।
नोट: अवैध बालू उठाव से जुड़े आरोप स्थानीय ग्रामीणों के बयानों पर आधारित हैं। संबंधित आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। पुलिस का पक्ष भी खबर में शामिल किया गया है।
Written & Edit by : Chandan Patel
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