नई दिल्ली। क्या मतदाता सूची से नाम हटने का असर देश के लोकतंत्र और चुनावी नतीजों पर पड़ सकता है? क्या चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर उठ रहे सवालों का जवाब जनता को मिलेगा? इन्हीं सवालों को लेकर कांग्रेस समेत INDIA गठबंधन के 19 विपक्षी दलों ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। शनिवार, 31 अक्टूबर 2026 को कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के आवास पर आयोजित प्रतीकात्मक ‘जनमहाभियोग’ कार्यक्रम में राहुल गांधी ने विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि SIR के जरिए 13.3 करोड़ यानी करीब 15 प्रतिशत मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं। राहुल गांधी के मुताबिक, इनमें ऐसे लोग भी शामिल हैं जिन्होंने 2024 के लोकसभा चुनाव में मतदान किया था, जबकि उस चुनाव में जीत का अंतर केवल 3 प्रतिशत वोट था।
पूर्व लोकसभा अध्यक्ष मीरा कुमार की अध्यक्षता में आयोजित इस मॉक पार्लियामेंट में विपक्षी नेताओं ने मतदाता सूची, चुनाव आयोग की जवाबदेही और मतदान के अधिकार पर अपनी बात रखी। कार्यक्रम में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ छह आरोपों के आधार पर प्रतीकात्मक जनमहाभियोग प्रस्ताव पेश किया, जिसे आयोजकों के अनुसार उपस्थित सांसदों ने पारित किया।
हालांकि, यह स्पष्ट रहना जरूरी है कि यह कार्यक्रम प्रतीकात्मक जनमहाभियोग था, न कि संसद में संवैधानिक प्रक्रिया के तहत पारित कोई वास्तविक महाभियोग प्रस्ताव। विपक्ष ने इसे जनता के मतदान के अधिकार की रक्षा के लिए राजनीतिक और लोकतांत्रिक विरोध का मंच बताया है।
राहुल गांधी ने SIR पर क्या कहा? जानिए उनके भाषण की 5 बड़ी बातें
राहुल गांधी ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए चुनाव आयोग और केंद्र सरकार पर निशाना साधा। उनके भाषण की पांच प्रमुख बातें इस प्रकार हैं।
1. ‘हमारे लिए बाकी संस्थान बंद’
राहुल गांधी ने कहा, “यह कितनी अजीब बात है कि CEC (मुख्य चुनाव आयुक्त) के महाभियोग पर चर्चा करने के लिए पूरे विपक्ष को बगीचे में बैठना पड़ रहा है, क्योंकि हमारे लिए बाकी सभी संस्थान बंद हैं।”
उन्होंने कहा कि विपक्ष ने संवैधानिक और संसदीय रास्तों से अपनी बात रखने की कोशिश की, लेकिन उसके मुताबिक कोई रास्ता नहीं बचने के कारण यह कार्यक्रम आयोजित करना पड़ा।
2. ‘CEC को हटना ही होगा’
राहुल गांधी ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर कहा, “ज्ञानेश कुमार CEC के पद पर नहीं टिक पाएंगे; अगर हमारे खुलासे के बाद भी BJP उन्हें बनाए रखने पर अड़ी रहती है, तो हमें समझ आ जाएगा कि उनका क्या खेल है।”
यह राहुल गांधी का राजनीतिक बयान और आरोप है। इस संबंध में चुनाव आयोग का पक्ष भी महत्वपूर्ण होगा।
3. ‘जनता इसे नहीं भूलेगी’
राहुल गांधी ने कहा, “बीजेपी भले ही चुनावों में धांधली करती रहे, लेकिन भारत की जनता और विपक्ष के सदस्य इसे न तो भूलेंगे और न ही माफ करेंगे।”
उन्होंने आरोप लगाया कि मतदाता सूची से नाम हटने का मुद्दा केवल राजनीतिक दलों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका सीधा संबंध आम नागरिकों के मतदान के अधिकार से है।
4. ‘एक नया पॉलिटिकल हथियार तैयार हो रहा है’
राहुल गांधी ने विपक्ष की आगे की रणनीति का संकेत देते हुए कहा, “हालात बदल रहे हैं, इस बगीचे में एक नया राजनीतिक हथियार आ गया है और यह आपको बुरी तरह नुकसान पहुंचाएगा।”
उन्होंने आगे कहा कि विपक्ष देश और संविधान की आवाज उठाता रहेगा तथा जनता का समर्थन उसकी ताकत है।
5. ‘ज्ञानेश के खिलाफ देशद्रोह का केस हो’
राहुल गांधी ने मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ कड़ा रुख अपनाते हुए कहा, “ज्ञानेश कुमार के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव का पूरा समर्थन करता हूं; उन पर देशद्रोह का मुकदमा चलना चाहिए और उन्हें न्याय के दायरे में लाया जाना चाहिए।”
यह राहुल गांधी की मांग है। उनके बयान को किसी अदालत के निष्कर्ष या किसी व्यक्ति के खिलाफ साबित अपराध के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
राहुल गांधी बोले- ‘आप हमेशा नहीं बच सकते, जनता को जवाब देना होगा’
अपने संबोधन में राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि मतदाता सूची से नाम हटाने और चुनावी प्रक्रिया को लेकर उठ रहे सवालों का जवाब नहीं दिया जा रहा है।
उन्होंने कहा, “अगर ज्ञानेश सोच रहे हैं कि मोदी शाह उन्हें बचा लेंगे तो देखिए देश में क्या हो रहा है। लोगों का मूड क्या है। आप लगे रहिए वोट चोरी करवाने में। मैं गारंटी देता हूं कि जो लोग सड़कों पर हैं, वे कभी नहीं भूलेंगे कि आपने उनके साथ क्या किया।”
राहुल गांधी ने आगे कहा, “थोड़ा करप्शन कर दिया, स्कैम कर दिया और हो गया। आपने देश की आत्मा पर हमला किया है। और हम इसके लिए आपको छोड़ेंगे नहीं। राज्यसभा, लोकसभा में आप हमें बोलने नहीं देते, लेकिन आज हम यहां हैं तो हम जनता के सपोर्ट के कारण खड़े हैं।”
उन्होंने कहा, “यह हथियार जनता और नौजवानों को न्याय दिलाएगा। क्योंकि हमारे पास कोई रास्ता नहीं है।”
राहुल गांधी ने यह भी कहा कि विपक्ष देश की संस्थाओं और संविधान की रक्षा के लिए आवाज उठाता रहेगा।
खड़गे ने ज्ञानेश कुमार के खिलाफ लगाए छह आरोप, कानून बदलने की मांग
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने कार्यक्रम में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रतीकात्मक जनमहाभियोग प्रस्ताव पेश किया। उन्होंने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली, मतदाता सूची के पुनरीक्षण और मुख्य चुनाव आयुक्त को कानूनी संरक्षण देने वाले प्रावधानों पर सवाल उठाए।
खड़गे ने कहा, “हमारी मांग है सीईसी को तत्काल पद से हटाकर 2023 का कानून रद्द हो। SIR को रोका जाए। संविधान बनाने वालों ने वोट का अधिकार सबको दिया है। हर नागरिक को बराबरी का दर्जा दिया।”
उन्होंने आगे कहा, “SIR के डिजाइन में ही खामियां हैं। हमने मार्च किया, राष्ट्रपति से मिले, सुप्रीम कोर्ट गए। हम प्रयास कर रहे हैं। आज हम मजबूरी में सड़क पर आए हैं। हमारी कोशिश रही है कि कानूनन हम जो कर सकते हैं, हम कर रहे हैं।”
खड़गे ने कहा कि विपक्ष मृत व्यक्तियों के नाम मतदाता सूची में बनाए रखने की मांग नहीं कर रहा है, बल्कि नाम हटाने की प्रक्रिया में पारदर्शिता और आंकड़ों की मांग कर रहा है।
उन्होंने कहा, “जब चोरी पकड़ी गई तो SIR का ऐलान कर दिया गया। मृतकों को वोटर लिस्ट में रखने की पैरवी कोई नहीं कर रहा है। आप हटाएं, हमने यह कभी नहीं कहा। हम यही चाहते हैं कि आप आंकड़े दो। कौन बाहर से है, कौन मर गया है। इसके आंकड़े दिए तो हमें मालूम होगा आपका तरीका सही है या झूठ।”
खड़गे ने यह भी आरोप लगाया कि चुनाव आयुक्तों को सुरक्षा देने वाले 2023 के कानून को विपक्षी सांसदों के निलंबन के दौरान पारित कराया गया था। उन्होंने इसे लोकतंत्र और जवाबदेही से जुड़ा गंभीर मुद्दा बताया।
ध्यान दें: खड़गे के आरोप और मांगें कांग्रेस का पक्ष हैं। कानून में बदलाव, पद से हटाने और SIR रोकने के सवालों पर संबंधित संवैधानिक और कानूनी प्रक्रियाएं लागू होती हैं।
खड़गे बोले- ‘वोट के अधिकार को ही हम बचा रहे हैं’
मल्लिकार्जुन खड़गे ने मतदान के अधिकार को लोकतंत्र की बुनियाद बताते हुए कहा, “वोट के अधिकार को ही हम बचा रहे हैं। नहीं तो कब के मर जाते या गुलाम ही रह जाते।”
उन्होंने कहा कि भारत में संविधान लागू होने के साथ ही वयस्क नागरिकों को मतदान का अधिकार मिला। खड़गे ने आरोप लगाया कि मतदाता सूची से नाम हटाए जाने की प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी है और विपक्ष की ओर से उठाए गए सवालों का संतोषजनक जवाब नहीं दिया जा रहा है।
खड़गे ने महाराष्ट्र और कर्नाटक के चुनावों में भी मतदाता सूची को लेकर गड़बड़ियों का आरोप लगाया। उन्होंने दावा किया कि महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में 40 लाख नए नाम जोड़े गए और SIR के दौरान पांच गुना अधिक नाम हटाए गए।
उन्होंने कहा कि राहुल गांधी ने कर्नाटक में कथित अनियमितताओं को लेकर चुनाव आयोग से कई बार जानकारी मांगी, लेकिन उनके मुताबिक जवाब नहीं मिला।
इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि और चुनाव आयोग का पक्ष इस विवाद को समझने के लिए अहम है।
मीरा कुमार ने कहा- ‘हर वयस्क को वोट का अधिकार है’
लोकसभा की पूर्व अध्यक्ष मीरा कुमार ने कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए मताधिकार को लोकतंत्र का केंद्र बताया।
उन्होंने कहा, “हमारा प्रजातंत्र, समता के सिद्धांत पर आधारित है। यहां हर वयस्क को वोट का अधिकार है। अमीर, गरीब, स्त्री, पुरुष, थर्ड जेंडर किसी भी जाति, धर्म का हो।”
मीरा कुमार ने आगे कहा, “हमारे यहां जो प्रजातंत्र है, वो चुनाव की ताकत से चलता है। चुनाव की ताकत के पीछे मतदाता की आत्मा है। मतदाता उसका केंद्र बिंदु है।”
उन्होंने मतदाता सूची से नाम हटाए जाने के मामलों में पारदर्शिता और जवाबदेही की जरूरत पर भी जोर दिया। मीरा कुमार ने कहा कि कार्यक्रम का उद्देश्य मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ विपक्ष की मांग को सामने रखना है।
महुआ मोइत्रा का दावा- बंगाल में हटाए गए नामों में 71% मुस्लिम और 51% महिलाएं
तृणमूल कांग्रेस की सांसद महुआ मोइत्रा ने पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची से हटाए गए नामों को लेकर दावा किया कि इनमें 71 प्रतिशत मुस्लिम और 51 प्रतिशत महिलाएं हैं।
INDIA गठबंधन के इस प्रतीकात्मक जनमहाभियोग कार्यक्रम में उन्होंने केंद्र सरकार और चुनाव आयोग पर मतदान के अधिकार को कमजोर करने का आरोप लगाया।
यह आंकड़ा महुआ मोइत्रा का दावा है। इसकी पुष्टि के लिए संबंधित आधिकारिक आंकड़ों, कुल हटाए गए नामों के विवरण और निर्वाचन आयोग के जवाब को देखना आवश्यक है।
TMC सांसद सागरिका घोष ने भी आरोप लगाया कि 2026 का पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव चोरी किया गया। उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर मतदाता सूची से कथित तौर पर नाम हटाए जाने के मामले में केंद्र सरकार के साथ मिलीभगत करने का आरोप लगाया।
VIDEO | Delhi: “71 per cent of deleted voters in Bengal are Muslims, 51 per cent women”, says TMC MP Mahua Moitra, accusing Modi government, EC of undermining voting rights at symbolic public impeachment by INDIA bloc.
(Source: Third Party)
(Full video available on PTI Videos -… pic.twitter.com/alByaEhZCS
— Press Trust of India (@PTI_News) October 31, 2026
नेहा बोरा बोलीं- ‘SIR लोकतंत्र को बर्बाद करने की साजिश’
AISA अध्यक्ष नेहा बोरा ने SIR को लेकर तीखा बयान दिया।
उन्होंने कहा, “जिन लोगों ने इस देश के लोगों की इज्जत नहीं की, न आजादी की इज्जत की। उन्हें न सिर्फ महाभियोग से हटाया जाएगा बल्कि सलाखों के पीछे भी डाला जाएगा। SIR एक सोची समझी साजिश है इस लोकतंत्र को बर्बाद करने की।”
नेहा बोरा का यह बयान विपक्ष के उस आरोप को दर्शाता है, जिसमें SIR की प्रक्रिया पर सवाल उठाए जा रहे हैं।
मतदाता सूची से नाम कटने का दर्द: कांता प्रसाद, इफ्तिकार और अनीता ने बताई अपनी परेशानी
कार्यक्रम में उन लोगों को भी अपनी बात रखने का मौका दिया गया, जिन्होंने दावा किया कि उनके नाम मतदाता सूची से हटा दिए गए हैं।
कांता प्रसाद बोले- ‘मैं जिंदा हूं, फिर भी मेरा नाम काट दिया’
कांता प्रसाद ने कहा, “मैं जिंदा हूं फिर भी मेरा नाम काट दिया है। मुझे मरा हुआ घोषित कर दिया गया। मैं जन सुनवाई में गया। BLO मेरे घर आया, सादे कागज पर साइन करवाए।”
उन्होंने आगे कहा, “फॉर्म 6 भरवा दिया। कहा वोटर कार्ड घर पर बनकर आ जाएगा। मंगोलपुरी में मैं रहता हूं। 35 साल से वोट करता आ रहा हूं। सारे चुनाव में वोट दिया है। अब नहीं कर पाऊंगा।”
उनकी शिकायत मतदाता सूची में नाम हटाए जाने और उसे दोबारा दर्ज कराने की प्रक्रिया से जुड़ी है।
बंगाल के इफ्तिकार बोले- ‘मेरे सारे कागज पूरे, फिर भी नाम कटा’
इफ्तिकार ने कहा, “मेरे पिता 50 साल से वोट दे रहे थे। मेरा कार्ड भी वहीं का है। मेरे पास सारे कागज हैं। एजुकेशन के सर्टिफिकेट भी मैंने जमा किए।”
उन्होंने कहा कि वह केवल अपनी समस्या लेकर नहीं आए हैं, बल्कि उन लोगों के लिए भी आवाज उठा रहे हैं जिनके नाम कथित तौर पर जानबूझकर हटाए गए।
इफ्तिकार ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाने की मांग भी की।
दिल्ली की अनीता जायसवाल बोलीं- ‘मेरा नाम कटा, अब कहां जाऊं?’
दिल्ली की अनीता जायसवाल ने अपनी परेशानी बताते हुए कहा, “मैं दिहाड़ी मजदूर हूं। सिंगल मदर हूं। सरकार ने मेरा वोटर आईडी कार्ड काट दिया। इसी पहचान पत्र से मैंने आधार कार्ड बनवाया है। स्कूल में मेरी बेटी को स्कॉलरशिप मिल रही है। अब सब बंद हो जाएगा। आप साबित करें मैं किस देश की नागरिक हूं।”
अनीता की बात ने मतदाता सूची से नाम हटने के मानवीय पहलू को सामने रखा। हालांकि, मतदाता सूची से नाम हटने और आधार या छात्रवृत्ति पर पड़ने वाले प्रभाव के संबंध में संबंधित विभागों से आधिकारिक जानकारी लेना जरूरी है।
शशि थरूर बोले- ‘सरकार ने हमारे पास दूसरा विकल्प नहीं छोड़ा’
कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने कहा कि विपक्षी दलों की ओर से मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ दिए गए महाभियोग नोटिस को लोकसभा और राज्यसभा में स्वीकार नहीं किया गया।
उन्होंने कहा, “मैं समझता हूं कि कांग्रेस पार्टी और अन्य विपक्षी दलों की ओर से दिए गए महाभियोग के नोटिस को लोकसभा या राज्यसभा, किसी भी सदन के पीठासीन अधिकारियों ने स्वीकार नहीं किया है। इसी वजह से हमारे पास यहां महाभियोग की प्रक्रिया आयोजित करने के अलावा कोई विकल्प नहीं है।”
थरूर ने आगे कहा कि यदि गृह मंत्री, राज्यसभा के सभापति और लोकसभा अध्यक्ष संबंधित नोटिस स्वीकार करने की सलाह दें, तो विपक्ष यह प्रक्रिया संसद के भीतर ही करेगा।
TMC सांसद कीर्ति आजाद ने भी कहा कि अगर संसद में जनता की आवाज नहीं सुनी जाती, तो जनप्रतिनिधियों का कर्तव्य है कि वे लोगों के बीच जाकर उनकी चिंताओं को सामने रखें।
जम्मू-कश्मीर नेशनल कॉन्फ्रेंस के नासिर असलम ने चुनाव आयोग की जिम्मेदारी को रेखांकित करते हुए कहा कि आयोग का काम प्रत्येक नागरिक के वोट की रक्षा करना, निष्पक्ष चुनाव कराना और सभी राजनीतिक दलों को समान नजर से देखना है।
CPI सांसद पी. संतोष कुमार ने कहा कि भारत एक महत्वपूर्ण दौर से गुजर रहा है और लोकतंत्र को कायम रखने के लिए ज्ञानेश कुमार तथा उनके सहयोगियों को जाना होगा।
नेहरू की कुर्सी पर बैठीं मीरा कुमार, पवन खेड़ा ने किया दावा
कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने सोशल मीडिया मंच X पर पोस्ट कर दावा किया कि जनमहाभियोग की कार्यवाही के दौरान पूर्व लोकसभा अध्यक्ष मीरा कुमार जिस कुर्सी पर बैठी थीं, उस पर कभी भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू बैठा करते थे।
खेड़ा के अनुसार, प्रधानमंत्री के रूप में अपने पूरे कार्यकाल के दौरान नेहरू इसी कुर्सी पर बैठे थे। यह ऐतिहासिक दावा पवन खेड़ा की पोस्ट के आधार पर सामने आया है।

जनमहाभियोग और महाभियोग में क्या अंतर है?
इस कार्यक्रम के संदर्भ में दोनों शब्दों के बीच अंतर समझना जरूरी है।
जनमहाभियोग: यह जनता या राजनीतिक दलों की ओर से किसी संवैधानिक पदाधिकारी के खिलाफ विरोध दर्ज कराने का प्रतीकात्मक राजनीतिक कार्यक्रम हो सकता है। इससे अपने आप किसी पदाधिकारी को हटाने की संवैधानिक प्रक्रिया शुरू या पूरी नहीं हो जाती।
महाभियोग या पद से हटाने की संवैधानिक प्रक्रिया: यह संबंधित पद और संविधान के प्रावधानों के अनुसार निर्धारित कानूनी प्रक्रिया है। मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने की प्रक्रिया संविधान के अनुच्छेद 324(5) से जुड़ी है, जिसके तहत उन्हें सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश को हटाने के निर्धारित आधारों और प्रक्रिया के अनुरूप ही पद से हटाया जा सकता है।
इसलिए 31 अक्टूबर को आयोजित कार्यक्रम को विपक्ष का प्रतीकात्मक जनमहाभियोग कहना अधिक सटीक है। इस कार्यक्रम में प्रस्ताव पारित होने का दावा अपने आप मुख्य चुनाव आयुक्त को पद से हटाने का कानूनी प्रभाव पैदा नहीं करता।
राहुल गांधी का वीडियो संदेश: ‘प्रदर्शन के साथ खरीदारी भी करें’
राजनीतिक विवाद के बीच राहुल गांधी ने शनिवार रात सोशल मीडिया मंच X पर एक वीडियो जारी किया। इसमें उन्होंने 1 नवंबर को दिल्ली आने वाले लोगों से आंदोलन में शामिल होने के साथ स्थानीय व्यापारियों से खरीदारी करने की अपील की।
राहुल गांधी ने कहा, “1 नवंबर को लाखों लोग रामलीला मार्च के लिए दिल्ली आ रहे हैं। त्योहारों का मौसम है। दिवाली, छठ, भाई दूज का समय है। मैं चाहता हूं जो लाखों लोग बाहर से दिल्ली आ रहे हैं, वो यहां के व्यापारियों की मदद करें। प्रोटेस्ट, मार्च, रैली कीजिए, साथ में थोड़ी सी खरीदारी भी कीजिए।”
उन्होंने आगे कहा, “व्यापारियों का फायदा हो जाएगा। मैं जानता हूं व्यापारियों को रैली नुकसान नहीं पहुंचाएगी। BJP डरी हुई है इसलिए अफवाह फैला रही है।”
राहुल गांधी की यह अपील ऐसे समय आई है, जब दिल्ली के व्यापारी संगठनों ने त्योहारी कारोबार पर संभावित असर को लेकर रैली स्थगित करने की मांग की है।
व्यापारियों का दावा- रैली से 10 से 12 हजार करोड़ रुपये के कारोबार पर असर
दिल्ली के चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री (CTI) ने रैली को लेकर कांग्रेस और विपक्षी नेताओं को पत्र लिखे। संगठन ने राहुल गांधी, सोनिया गांधी और अन्य विपक्षी नेताओं से रैली को दिवाली के बाद कराने या किसी दूसरे स्थान पर आयोजित करने की अपील की।
CTI के चेयरमैन बृजेश गोयल के मुताबिक, रैली में बड़ी संख्या में लोगों और 15 से 20 हजार वाहनों के पहुंचने का अनुमान है। संगठन ने दावा किया कि रैली के कारण दिल्ली के करीब 20 बड़े थोक और खुदरा बाजारों में 10 हजार से 12 हजार करोड़ रुपये तक के कारोबार पर असर पड़ सकता है।
व्यापारियों का कहना है कि 1 नवंबर खरीदारी और माल की आपूर्ति के लिहाज से महत्वपूर्ण दिन है। वहीं, राहुल गांधी ने व्यापारियों को नुकसान की आशंका को खारिज करते हुए लोगों से खरीदारी करने की अपील की है।
इस तरह रैली को लेकर राजनीतिक विरोध के साथ-साथ व्यापारिक गतिविधियों पर संभावित असर का सवाल भी चर्चा में है। कारोबार के नुकसान का वास्तविक आंकड़ा रैली के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।
रामलीला मैदान में सुरक्षा के कड़े इंतजाम, 3,500 पुलिसकर्मियों की तैनाती की तैयारी
1 नवंबर को होने वाली रैली को देखते हुए दिल्ली में सुरक्षा और यातायात व्यवस्था को लेकर व्यापक तैयारियों की जानकारी दी गई है।
उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, रामलीला मैदान को 14 जोन में बांटा गया है। प्रत्येक जोन की जिम्मेदारी ACP रैंक के अधिकारी को दिए जाने की योजना है। रैली के दौरान करीब 3,000 से 3,500 पुलिसकर्मियों की तैनाती की जानकारी सामने आई है। इसके साथ केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों की टुकड़ियां भी तैनात रहेंगी।
250 CCTV कैमरों से निगरानी
रामलीला मैदान और आसपास के क्षेत्रों में 200 से 250 हाई-डेफिनिशन CCTV कैमरों से निगरानी किए जाने की जानकारी दी गई है। प्रवेश और निकास द्वारों पर विशेष नजर रखने तथा लाइव फुटेज के लिए कंट्रोल रूम बनाने की तैयारी है।
पुलिसकर्मी बॉडी-वॉर्न कैमरों का भी इस्तेमाल कर सकते हैं। सुरक्षा व्यवस्था के तहत बैरिकेडिंग, मेटल डिटेक्टर और बैगेज स्क्रीनिंग जैसी व्यवस्थाएं भी शामिल हैं।
रामलीला मैदान के आठ में से तीन गेट से प्रवेश
कार्यक्रम के लिए रामलीला मैदान के आठ गेटों में से तीन गेट आम लोगों के प्रवेश के लिए खोले जाने की जानकारी दी गई है। VIP और वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के लिए अलग प्रवेश व्यवस्था निर्धारित किए जाने की बात कही गई है।
दिल्ली में ट्रैफिक डायवर्जन
दिल्ली ट्रैफिक पुलिस की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक, 1 नवंबर को सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक रामलीला मैदान और आसपास के इलाकों में यातायात प्रभावित रह सकता है।
नेताजी सुभाष मार्ग टी-पॉइंट, राजघाट, दिल्ली गेट, ITO ए-पॉइंट, अजमेरी गेट रेड लाइट, रंजीत सिंह फ्लाईओवर, झंडेवालान गोलचक्कर, तुर्कमान गेट और मीर दर्द चौक सहित कई स्थानों पर ट्रैफिक डायवर्जन की जानकारी दी गई है।
दिल्ली आने-जाने वाले लोगों को यात्रा से पहले आधिकारिक ट्रैफिक एडवाइजरी देखने की सलाह दी जाती है।
दिल्ली में 16 नवंबर तक केंद्रीय बलों की तैनाती बढ़ाने की जानकारी
रिपोर्ट में दी गई जानकारी के अनुसार, केंद्र सरकार ने दिल्ली में केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (CAPF) की 270 कंपनियों की तैनाती 16 नवंबर तक बढ़ाई है। इन बलों की तैनाती का प्रबंधन दिल्ली पुलिस करेगी।
उपलब्ध विवरण में CRPF की 125, BSF की 46, ITBP की 39, SSB की 31, RAF की 20 और CISF की 12 कंपनियों का उल्लेख है। हालांकि, इन आंकड़ों का कुल योग 273 कंपनियां होता है, न कि 270। इसलिए अंतिम प्रकाशन से पहले आधिकारिक आदेश से बलों की संख्या की पुष्टि करना जरूरी है।
विपक्ष के प्रदर्शन और SIR विवाद की पृष्ठभूमि
अक्टूबर महीने में INDIA गठबंधन और अन्य संगठनों ने SIR तथा मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग को लेकर कई प्रदर्शन किए। विपक्ष का आरोप है कि मतदाता सूची से नाम हटाने की प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी है और इससे पात्र मतदाताओं के मतदान के अधिकार पर असर पड़ सकता है।
वहीं, मतदाता सूची का पुनरीक्षण निर्वाचन प्रक्रिया का हिस्सा है। किसी नाम को हटाए जाने के कारण, संबंधित व्यक्ति की पात्रता और पुनः नाम दर्ज कराने की प्रक्रिया को संबंधित आधिकारिक रिकॉर्ड के आधार पर जांचना जरूरी है।
इस विवाद में एक ओर विपक्ष चुनाव आयोग की जवाबदेही और मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों पर सवाल उठा रहा है, तो दूसरी ओर आयोग का आधिकारिक पक्ष और राज्यवार सत्यापित आंकड़े पूरे मामले की निष्पक्ष पड़ताल के लिए अहम हैं।
अब सबकी नजर 1 नवंबर यानी आज की रामलीला मैदान रैली पर
31 अक्टूबर को हुए प्रतीकात्मक जनमहाभियोग कार्यक्रम ने SIR, मतदाता सूची से नाम हटाए जाने और चुनाव आयोग की जवाबदेही को राष्ट्रीय राजनीतिक बहस के केंद्र में ला दिया है। राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे ने मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया, जबकि विपक्षी दलों ने इसे मतदान के अधिकार की रक्षा से जुड़ा मुद्दा बताया।
दूसरी ओर, दिल्ली के व्यापारियों ने त्योहारी कारोबार पर संभावित असर की चिंता जताई है। अब 1 नवंबर यानी आज रामलीला मैदान में होने वाली INDIA गठबंधन की रैली पर सबकी नजर है।
Written & Edit by : Chandan Patel
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