गिद्धौर, जमुई। बिहार के जमुई जिले के गिद्धौर में नगर पंचायत के गठन को लेकर विवाद सामने आया है। गिद्धौर के पूर्व प्रखंड प्रमुख श्रवण कुमार यादव ने नगर पंचायत की सीमा में तीन अतिरिक्त राजस्व गांवों को शामिल करने के प्रस्ताव पर आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि गिद्धौर नगर पंचायत का गठन निर्धारित नियमों के अनुसार होना चाहिए और वर्तमान में केवल राजस्व ग्राम पतसंडा को नगर पंचायत में शामिल करना ही उचित होगा।
श्रवण कुमार यादव ने इस मामले में प्रखंड विकास पदाधिकारी (बीडीओ), गिद्धौर से हुई बातचीत का हवाला देते हुए कहा कि जिलाधिकारी, जमुई को भेजे गए प्रस्ताव में संशोधन किए जाने की बात सामने आई है। उन्होंने प्रस्तावित बदलाव पर सवाल उठाते हुए प्रशासन से नियमों के अनुसार निर्णय लेने की मांग की है।
गिद्धौर नगर पंचायत के प्रस्ताव में संशोधन की चर्चा
पूर्व प्रमुख श्रवण कुमार यादव के अनुसार, एक अक्टूबर को गिद्धौर प्रखंड कार्यालय से जिलाधिकारी, जमुई को नगर पंचायत गठन से संबंधित प्रस्ताव भेजा गया था। उन्होंने बताया कि बीडीओ से बातचीत के दौरान जानकारी मिली कि शुरुआती प्रस्ताव में केवल पतसंडा पंचायत की सीमा को शामिल किया गया था।
श्रवण कुमार यादव का दावा है कि बातचीत के दौरान बीडीओ ने तीन दिनों के भीतर संशोधित प्रस्ताव भेजने की बात कही थी। उनके अनुसार, इस संशोधित प्रस्ताव में कुछ अन्य राजस्व गांवों को शामिल करने की योजना पर चर्चा हुई।
हालांकि, संशोधित प्रस्ताव की वर्तमान स्थिति और उसमें शामिल गांवों की आधिकारिक पुष्टि संबंधित प्रशासनिक दस्तावेजों से होना बाकी है।
महुलीगढ़, केत्तरू नवादा और संसारपुर को शामिल करने पर आपत्ति
श्रवण कुमार यादव ने जिन गांवों को प्रस्तावित रूप से शामिल किए जाने पर आपत्ति जताई है, उनमें राजस्व ग्राम महुलीगढ़, केत्तरू नवादा और संसारपुर शामिल हैं।
उन्होंने कहा कि इन गांवों को गिद्धौर नगर पंचायत में शामिल करने का प्रस्ताव नियमों के अनुरूप नहीं है। उनका तर्क है कि नगर पंचायत के गठन में क्षेत्र की आबादी, भौगोलिक स्थिति और निर्धारित सरकारी मानकों को ध्यान में रखा जाना चाहिए।
उन्होंने यह भी कहा कि यदि निर्धारित मानकों के आधार पर केवल पतसंडा राजस्व ग्राम नगर पंचायत गठन के लिए उपयुक्त है, तो अन्य गांवों को शामिल करने की आवश्यकता नहीं होनी चाहिए।
पतसंडा की आबादी 20 हजार से अधिक होने का दावा
पूर्व प्रमुख श्रवण कुमार यादव के अनुसार, गिद्धौर को पतसंडा राजस्व ग्राम के नाम से भी जाना जाता है और इसकी आबादी 20 हजार से अधिक है। उन्होंने अपने बयान में पठारी क्षेत्रों के लिए 9 हजार से 30 हजार तथा गैर-पठारी क्षेत्रों के लिए 12 हजार से 40 हजार की आबादी का उल्लेख करते हुए कहा कि पतसंडा इन मानकों को पूरा करता है।
इसी आधार पर उनका कहना है कि गिद्धौर नगर पंचायत का गठन केवल पतसंडा राजस्व ग्राम को शामिल करके किया जाना चाहिए।
हालांकि, आबादी संबंधी इन सीमाओं और उनके लागू होने की आधिकारिक पुष्टि संबंधित सरकारी नियमावली से किया जाना आवश्यक है। नगर पंचायत के गठन के लिए लागू मानक, क्षेत्र की श्रेणी और अन्य जरूरी शर्तों की जांच के बाद ही इस संबंध में अंतिम निष्कर्ष निकाला जा सकता है।
छत्तरपुर और बंझुलिया को शामिल करने पर भी उठाए सवाल
श्रवण कुमार यादव ने पतसंडा पंचायत के अंतर्गत आने वाले राजस्व ग्राम छत्तरपुर और बंझुलिया को भी गिद्धौर नगर पंचायत में शामिल किए जाने पर आपत्ति जताई है।
उनका कहना है कि नगर पंचायत की सीमा तय करते समय नियमों का पालन किया जाना चाहिए। किसी भी गांव को नगर पंचायत में शामिल करने का निर्णय निर्धारित मानकों और प्रशासनिक प्रक्रिया के आधार पर ही लिया जाना चाहिए।
उन्होंने स्पष्ट किया कि वह ऐसे राजस्व गांवों को नगर पंचायत में शामिल करने का विरोध करते हैं, जिनके बारे में उनका मानना है कि वे निर्धारित शर्तों को पूरा नहीं करते हैं।
प्रशासन से नियमों के अनुसार निर्णय लेने की मांग
पूर्व प्रखंड प्रमुख श्रवण कुमार यादव ने गिद्धौर नगर पंचायत के गठन को लेकर अपनी आपत्ति दर्ज कराते हुए प्रशासन से प्रस्ताव की समीक्षा करने की मांग की है।
उनका कहना है कि नगर पंचायत की सीमा निर्धारित करते समय संबंधित राजस्व गांवों की आबादी, भौगोलिक स्थिति और सरकारी नियमों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। उनके मुताबिक, नियमों के अनुरूप सीमा निर्धारण होने से भविष्य में विवाद की स्थिति से बचा जा सकता है।
अब इस मामले में प्रशासन की आधिकारिक स्थिति और संशोधित प्रस्ताव में किए जाने वाले बदलावों पर लोगों की नजर रहेगी।
नोट: इस खबर में नगर पंचायत गठन को लेकर श्रवण कुमार यादव की ओर से व्यक्त की गई आपत्तियों और उनके बयान को आधार बनाया गया है। प्रस्ताव की वास्तविक स्थिति, संबंधित गांवों की पात्रता और लागू सरकारी मानकों की स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है।
Written & Edit by : Chandan Patel
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