जम्मू-कश्मीर के कठुआ जिले के बसोहली में फायरिंग की घटना से सुरक्षा बलों में हड़कंप मच गया। शुरुआती जानकारी के मुताबिक, दो जवानों के बीच विवाद के बाद एक जवान ने अपने साथियों पर गोलियां चला दीं। घटना में एक असिस्टेंट कमांडेंट समेत CISF के चार जवानों की मौत हो गई। पुलिस ने आरोपी जवान को गिरफ्तार कर लिया है।

क्या है पूरा मामला?

जम्मू-कश्मीर के कठुआ जिले की बसोहली तहसील में स्थित एक पावर प्रोजेक्ट परिसर में केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) के जवान ने कथित तौर पर अपने साथियों पर अंधाधुंध फायरिंग कर दी। इस घटना में चार जवानों की जान चली गई। मृतकों में एक असिस्टेंट कमांडेंट और एक सब-इंस्पेक्टर भी शामिल हैं।

जानकारी के अनुसार, CISF के जवान हिमाचल प्रदेश की सीमा से सटे बसोहली इलाके में पावर प्रोजेक्ट की सुरक्षा में तैनात थे। इसी दौरान किसी बात को लेकर दो जवानों के बीच विवाद हुआ। देखते ही देखते विवाद ने गंभीर रूप ले लिया और एक जवान ने अपनी सर्विस राइफल से फायरिंग शुरू कर दी।

घटना के बाद सुरक्षा बलों और स्थानीय प्रशासन में अफरा-तफरी मच गई। कठुआ पुलिस ने कार्रवाई करते हुए आरोपी जवान को गिरफ्तार कर लिया। CISF के वरिष्ठ अधिकारी भी घटनास्थल पर पहुंचकर पूरे मामले की जानकारी जुटाने में लगे हैं।

फायरिंग में इन चार जवानों की मौत

इस घटना में जान गंवाने वाले CISF कर्मियों के नाम इस प्रकार बताए गए हैं:

  • अंकित कुमार पांडे  – असिस्टेंट कमांडेंट
  • लक्ष्मण सिंह – सब-इंस्पेक्टर (SI)
  • रफीक अहमद – कॉन्स्टेबल
  • संदीप कुमार – कॉन्स्टेबल

एक ही सुरक्षा इकाई के चार जवानों की मौत से बल के भीतर शोक का माहौल है। घटना के कारणों और घटनाक्रम को लेकर विस्तृत जानकारी जुटाई जा रही है।

आरोपी हेड कॉन्स्टेबल के पास थी AK-47 और 150 गोलियां

सूत्रों के हवाले से मिली जानकारी के मुताबिक, आरोपी की पहचान हेड कॉन्स्टेबल अवधेश कुमार सिंह के रूप में बताई जा रही है। आरोप है कि वह कार्यालय परिसर में घुसा और अपनी सरकारी AK-47 राइफल से अंधाधुंध फायरिंग करने लगा। उसके पास कथित तौर पर 150 राउंड गोलियां थीं।

पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है। हालांकि, फायरिंग के पीछे की वास्तविक वजह, विवाद की प्रकृति और घटना से जुड़ी अन्य परिस्थितियों की पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी।

12 साल से बंद पड़े पावर प्रोजेक्ट की सुरक्षा में तैनात थे जवान

जानकारी के अनुसार, जिस स्थान पर CISF के जवान तैनात थे, वह सेवा-3 पावर प्रोजेक्ट बसोहली तहसील में रावी नदी पर स्थित है। परियोजना का काम वर्ष 1993 में शुरू हुआ था।

बताया जाता है कि वर्ष 2013 में आई बाढ़ के दौरान परियोजना का लगभग 300 मीटर लंबा हिस्सा बह गया था। इसके बाद से परियोजना बंद पड़ी है। इसी परियोजना परिसर की सुरक्षा के लिए CISF के जवानों की तैनाती की गई थी।

आखिर सुरक्षा बलों के भीतर क्यों होते हैं ऐसे विवाद?

सुरक्षा बलों में जवानों के बीच तनाव, आपसी विवाद और कार्यस्थल से जुड़ी समस्याएं गंभीर चिंता का विषय हो सकती हैं। हालांकि, इस घटना को किसी व्यापक प्रवृत्ति से जोड़ने से पहले आधिकारिक आंकड़ों और जांच के निष्कर्षों को देखना जरूरी है।

कठुआ की इस घटना में अब सबसे अहम सवाल यह है कि जवानों के बीच विवाद किस बात को लेकर हुआ, क्या फायरिंग से पहले कोई संकेत मिले थे और परिसर में मौजूद सुरक्षा व्यवस्था के बावजूद इतनी बड़ी घटना कैसे हुई।

इन सवालों के जवाब पुलिस और CISF की जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेंगे।

नोट: घटना के कारणों, मृतकों की परिस्थितियों और आरोपी के पास मौजूद गोला-बारूद से संबंधित विवरणों की आधिकारिक पुष्टि होने पर खबर को अपडेट किया जाना चाहिए।

Written & Edit by : Chandan Patel

Reported by : Chandan Patel 

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By Chandan Patel

चंदन पटेल AVN News से लंबे समय से जुड़े पत्रकार हैं। उन्होंने वर्ष 2020 से रिपोर्टर के रूप में पत्रकारिता की शुरुआत की और जमीनी स्तर की खबरों को प्रमुखता से उठाते हुए लगातार अपनी पहचान बनाई। वर्तमान में वे AVN News के एडिटर-इन-चीफ के रूप में समाचार संपादन, कवरेज और डिजिटल पत्रकारिता का नेतृत्व कर रहे हैं। राजनीति, खेल,स्थानीय मुद्दों, जनसमस्याओं, प्रशासनिक गतिविधियों और सामाजिक सरोकारों से जुड़ी खबरों को तथ्यपरक और सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचाना उनकी पत्रकारिता की प्रमुख विशेषता है। उनका उद्देश्य आम लोगों की आवाज को प्रमुखता देना और विश्वसनीय खबरों के माध्यम से समाज को जागरूक करना है।

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