जमुई जिले के सिकंदरा बाजार स्थित सरकारी भूमि पर वर्षों से चले आ रहे अवैध कब्जे के मामले में बड़ा प्रशासनिक फैसला सामने आया है। जमुई के अपर समाहर्ता (ADM) न्यायालय ने सरकारी भूमि पर कायम 24 अवैध जमाबंदियों को रद्द करने का आदेश जारी किया है। साथ ही सिकंदरा के अंचल अधिकारी को भूमि को अतिक्रमणमुक्त कराने और सरकारी अभिलेखों में पुनः दर्ज करने का निर्देश दिया गया है।

किसान रघुनंदन यादव के परिवाद पर हुआ फैसला

यह महत्वपूर्ण निर्णय किसान रघुनंदन यादव द्वारा दायर परिवाद के आधार पर सुनाया गया है। मामले की सुनवाई के दौरान न्यायालय ने उपलब्ध अभिलेखों, जांच प्रतिवेदन और पटना उच्च न्यायालय के पूर्व आदेशों का अवलोकन किया। इसके बाद अदालत ने पाया कि संबंधित भूमि पर गलत तरीके से निजी स्वामित्व का दावा स्थापित कर जमाबंदी कायम की गई थी।

सरकारी भूमि पर अवैध जमाबंदी को बताया कानून के विपरीत

अपर समाहर्ता न्यायालय ने अपने आदेश में स्पष्ट कहा है कि सार्वजनिक उपयोग की सरकारी भूमि पर अवैध जमाबंदी कायम रहने देना लोकहित और कानून दोनों के विरुद्ध है। अदालत ने कहा कि किसी भी सरकारी भूमि पर निजी स्वामित्व का दावा तभी स्वीकार्य होगा, जब उसका वैधानिक आधार सरकारी अभिलेखों में प्रमाणित हो।

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खाता संख्या 454 और खेसरा संख्या 1280 समेत कई भूखंड शामिल

न्यायालय के आदेश के अनुसार खाता संख्या 454, खेसरा संख्या 1280 सहित अन्य गैरमजरुआ सरकारी भूमि पर गलत तरीके से जमाबंदियां कायम की गई थीं। जांच के दौरान इन जमाबंदियों को नियमों के विरुद्ध पाया गया, जिसके बाद इन्हें रद्द करने का निर्णय लिया गया।

अंचल अधिकारी को भूमि खाली कराने का निर्देश

न्यायालय ने सिकंदरा के अंचल अधिकारी को निर्देश दिया है कि संबंधित भूमि को सरकारी रिकॉर्ड में पुनः दर्ज किया जाए तथा आवश्यक सुधारात्मक प्रविष्टियां की जाएं। साथ ही पटना उच्च न्यायालय के निर्देशों के अनुरूप अतिक्रमणवाद चलाकर भूमि को अतिक्रमणमुक्त कराया जाए।

सिकंदरा
अंचल अधिकारी को भूमि खाली कराने का निर्देश

जमुई के सिकंदरा बाजार में हटेगा अवैध कब्जा

इस फैसले के बाद सिकंदरा बाजार के बड़े भूभाग से अवैध कब्जा हटने का रास्ता साफ हो गया है। प्रशासनिक स्तर पर आगे की कार्रवाई शुरू होने के बाद सरकारी भूमि को मुक्त कर सार्वजनिक उपयोग के लिए उपलब्ध कराया जा सकेगा।

प्रशासनिक कार्रवाई पर टिकी लोगों की नजर

अदालत के आदेश के बाद अब स्थानीय लोगों की निगाहें प्रशासनिक कार्रवाई पर टिकी हुई हैं। लोगों को उम्मीद है कि वर्षों से विवादित रही सरकारी भूमि को जल्द अतिक्रमणमुक्त कराकर सरकारी रिकॉर्ड में बहाल किया जाएगा।

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Edited and Written by : Chandan Patel.

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