नई दिल्ली: एक छात्र की शिकायत दर्ज कराने के लिए नेता प्रतिपक्ष लोक सभा और कांग्रेस नेता राहुल गांधी को करीब छह घंटे तक थाने के बाहर धरने पर बैठना पड़ा। जंतर-मंतर पर 20 जुलाई को हुए प्रदर्शन के दौरान पैलेट गन के छर्रे लगने से आंख की रोशनी जाने का आरोप लगाने वाले 19 वर्षीय छात्र साहिल की शिकायत पर आखिरकार दिल्ली पुलिस ने FIR दर्ज कर ली। हालांकि, FIR अज्ञात आरोपियों के खिलाफ दर्ज की गई है।

राहुल गांधी शुक्रवार दोपहर करीब 12:30 बजे साहिल और उसके परिवार के साथ संसद मार्ग थाने पहुंचे थे। पुलिस से बातचीत और DCP से मुलाकात के बाद भी जब FIR दर्ज नहीं हुई तो राहुल गांधी थाने के बाहर धरने पर बैठ गए। उन्होंने साफ कहा कि जब तक FIR दर्ज नहीं होगी, वह वहां से नहीं हटेंगे।

करीब छह घंटे बाद FIR दर्ज होने के बाद राहुल गांधी साहिल और उसके परिवार के साथ थाने से बाहर निकले।

राहुल गांधी
पैलेट गन मामले में छात्र साहिल की FIR दर्ज कराने की मांग को लेकर संसद मार्ग थाने के बाहर धरने पर बैठे राहुल गांधी।

 

 

साहिल का दावा- पैलेट गन के छर्रों से गई आंख की रोशनी

साहिल का आरोप है कि 20 जुलाई को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान सुरक्षाबलों की ओर से पैलेट गन का इस्तेमाल किया गया और उसे कई छर्रे लगे। शिकायत में दावा किया गया है कि उसके शरीर में 200 से अधिक छर्रे फंसे हुए हैं और उसकी दाहिनी आंख की रोशनी लगभग खत्म हो गई है।

साहिल की शिकायत के अनुसार, उसके चेहरे, गर्दन, जबड़े और दाहिनी आंख के आसपास छर्रे मौजूद हैं। शिकायत में यह भी कहा गया है कि कुछ छर्रे नसों और महत्वपूर्ण अंगों के बेहद करीब हैं, इसलिए उन्हें निकालना संभव नहीं है।

राहुल गांधी बोले- अगर पुलिस ने पैलेट नहीं चलाई तो किसने चलाई?

थाने के बाहर राहुल गांधी ने पुलिस से सवाल करते हुए कहा कि साहिल के शरीर से निकले छर्रे इस मामले में अहम सबूत हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि अगर दिल्ली पुलिस ने पैलेट गन नहीं चलाई तो फिर यह गोली किसने चलाई?

राहुल गांधी ने कहा कि साहिल के शरीर में 200 से ज्यादा छर्रे होने की बात मेडिकल रिकॉर्ड में दर्ज है। उन्होंने मांग की कि पूरे मामले में FIR दर्ज कर जांच शुरू की जाए और जांच अधिकारी का नाम बताया जाए।

राहुल गांधी ने कहा कि उनकी मांग सिर्फ इतनी है कि पीड़ित की शिकायत दर्ज हो और निष्पक्ष जांच शुरू की जाए।

FIR के बाद राहुल गांधी ने कहा- यह न्याय की दिशा में पहला कदम

FIR दर्ज होने के बाद राहुल गांधी ने कहा कि शिकायत दर्ज कराने में कई घंटे लग गए और यह स्थिति गंभीर सवाल खड़े करती है।

उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस के अधिकारी शिकायत दर्ज करना चाहते थे, लेकिन उन्हें ऊपर से रोक दिया गया था। राहुल गांधी ने दावा किया कि FIR दर्ज करने के लिए अंतिम मंजूरी उच्च स्तर से मिलने की बात कही गई।

हालांकि, इन आरोपों पर संबंधित अधिकारियों की ओर से आधिकारिक तौर पर विस्तृत प्रतिक्रिया सामने आना बाकी है।

साहिल की मां की शिकायत पर दर्ज हुई FIR

दिल्ली पुलिस ने साहिल की मां की शिकायत के आधार पर FIR दर्ज की है। इसमें अज्ञात आरोपियों के खिलाफ BNS की धारा 118 और 125 के तहत मामला दर्ज किए जाने की जानकारी दी गई है।

धारा 118 खतरनाक हथियार या साधन से चोट पहुंचाने से संबंधित है, जबकि धारा 125 ऐसे लापरवाही या उतावलेपन वाले कृत्य से संबंधित है जिससे किसी व्यक्ति की जान या व्यक्तिगत सुरक्षा खतरे में पड़ सकती है।

अब जांच में यह स्पष्ट करना होगा कि साहिल को चोट किस परिस्थिति में लगी, पैलेट गन का इस्तेमाल किसने किया और घटना के दौरान वहां कौन-कौन से सुरक्षाकर्मी तैनात थे।

साहिल की शिकायत में क्या-क्या मांग की गई?

साहिल की ओर से दी गई शिकायत में पूरे मामले की निष्पक्ष जांच के लिए कई महत्वपूर्ण मांगें की गई हैं।

1. CCTV फुटेज सुरक्षित रखने की मांग

शिकायत में 20 जुलाई की घटना से संबंधित जंतर-मंतर, कनॉट प्लेस और राजीव चौक मेट्रो स्टेशन के आसपास के CCTV फुटेज सुरक्षित रखने की मांग की गई है।

2. बॉडी कैमरा और ड्रोन फुटेज की जांच

पुलिस और RAF के बॉडी-वॉर्न कैमरों के साथ-साथ घटना के दौरान उपलब्ध ड्रोन फुटेज को भी सुरक्षित रखने की मांग की गई है।

3. ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मियों की सूची

शिकायत में उस दिन जंतर-मंतर पर तैनात पुलिस और सुरक्षाबलों की ड्यूटी लिस्ट मंगाने की मांग की गई है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि पैलेट गन चलाने का आदेश किसने दिया और किसने उसका इस्तेमाल किया।

4. छर्रों को FSL भेजने की मांग

शिकायत में शरीर से निकले छर्रों को फॉरेंसिक साइंस लैबोरेटरी यानी FSL भेजकर उनकी जांच कराने की मांग भी की गई है।

5. इलाज और मेडिकल रिकॉर्ड को जांच में शामिल करने की मांग

साहिल की शिकायत में उसके इलाज से जुड़े मेडिकल दस्तावेजों और जांच रिपोर्ट को भी केस का हिस्सा बनाने की मांग की गई है।

साहिल के भविष्य पर भी संकट का दावा

शिकायत में साहिल ने कहा है कि वह पढ़ाई कर रहा था और उसका सपना दिल्ली पुलिस में भर्ती होने का था। आंख में गंभीर चोट के बाद उसका भविष्य और करियर प्रभावित होने की बात शिकायत में कही गई है।

शिकायत के अनुसार, साहिल परिवार का बड़ा बेटा है और उसके पिता दिव्यांग हैं। ऐसे में घटना के बाद परिवार के सामने आर्थिक और सामाजिक मुश्किलें भी बढ़ गई हैं।

कांग्रेस ने उठाया जीरो FIR का मुद्दा

दिल्ली प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष देवेंद्र यादव ने FIR दर्ज करने में हुई देरी को लेकर दिल्ली पुलिस पर सवाल उठाए। कांग्रेस का कहना है कि कानून में जीरो FIR का प्रावधान है और शिकायतकर्ता किसी भी थाने में अपनी शिकायत दर्ज करा सकता है।

कांग्रेस ने आरोप लगाया कि मेडिकल दस्तावेज और गंभीर चोट के बावजूद शिकायत दर्ज करने में देरी की गई।

दिल्ली पुलिस का क्या कहना है?

दिल्ली पुलिस से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, 20 जुलाई की घटना से जुड़े मामलों की जांच पहले से ही क्राइम ब्रांच कर रही है। पुलिस का कहना है कि साहिल की शिकायत भी क्राइम ब्रांच को भेजी जाएगी।

यानीअबइस पूरे मामले की जांच में यह महत्वपूर्ण होगा कि साहिल को चोट कैसे लगी और पैलेट गन के इस्तेमाल को लेकर लगाए गए आरोपों में कितनी सच्चाई है।

भाजपा ने राहुल गांधी के धरने पर उठाए सवाल

राहुल गांधी के धरने को लेकर भाजपा ने कांग्रेस नेता पर निशाना साधा। भाजपा की ओर से कहा गया कि जंतर-मंतर प्रदर्शन का मामला सुप्रीम कोर्ट में है और जांच कमेटी भी बनाई गई है।

भाजपा नेताओं ने यह भी कहा कि प्रदर्शन के दौरान सुरक्षाबलों पर हमले के आरोपों पर राहुल गांधी को भी अपनी बात रखनी चाहिए।

अब जांच के सामने सबसे बड़े सवाल

FIR दर्ज होने के बाद मामला अब राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप से आगे बढ़कर जांच के स्तर पर पहुंच गया है। जांच में मुख्य सवाल यही होंगे कि 20 जुलाई को जंतर-मंतर पर पैलेट गन का इस्तेमाल किसने किया, आदेश किस स्तर से आया, साहिल को लगी चोट किस हथियार से हुई और घटना के समय मौजूद CCTV, बॉडी कैमरा तथा अन्य वीडियो फुटेज क्या बताते हैं।

FIR दर्ज होना फिलहाल इस मामले में न्याय की प्रक्रिया की शुरुआत है। आरोपों की पुष्टि या खंडन जांच और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही हो सकेगा।

Written & Edit by : Chandan Patel

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