नई दिल्ली: चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर विपक्ष और निर्वाचन आयोग के बीच टकराव तेज हो गया है। INDIA गठबंधन की बैठक में पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए उनके इस्तीफे की मांग की। ममता ने उन्हें ‘वैनिश कुमार’ कहकर संबोधित किया और वोट चोरी, EVM तथा मतगणना में कथित गड़बड़ियों को लेकर गंभीर आरोप लगाए।
वहीं, कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने चुनावी प्रक्रिया से जुड़े सवालों को लोकतंत्र और संविधान से जोड़ते हुए कहा कि विपक्ष इन मुद्दों को चुपचाप स्वीकार नहीं करेगा। बैठक के बाद कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने 2 से 8 अक्टूबर तक देशव्यापी ‘सेव डेमोक्रेसी’ मार्च और जिला स्तर पर प्रदर्शन करने की घोषणा की। इसके अलावा, 6 अक्टूबर को विपक्षी सांसद चुनाव आयोग तक मार्च निकालेंगे।
30 सितंबर 2026 को दिल्ली में हुई इस बैठक के बाद मतदाता सूची, SIR और चुनाव आयोग की निष्पक्षता का मुद्दा INDIA गठबंधन के साझा राजनीतिक अभियान के केंद्र में आ गया है।
ममता बनर्जी ने ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की
INDIA गठबंधन की बैठक में ममता बनर्जी ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि मतदाता सूची में बदलाव और चुनावी प्रक्रिया में कथित गड़बड़ियों के कारण लोगों के मतदान के अधिकार पर असर पड़ रहा है।
ममता बनर्जी ने ज्ञानेश कुमार के लिए ‘वैनिश कुमार’ नाम का इस्तेमाल करते हुए कहा कि उनके कार्यकाल में लोगों के नाम मतदाता सूची से गायब हुए हैं। उन्होंने अपने भाषण में मुख्य चुनाव आयुक्त को ‘चोर’ और ‘डाकू’ तक कहा तथा तत्काल इस्तीफे की मांग की।
Our Hon’ble Chairperson Smt @MamataOfficial along with INDIA Bloc leaders addressed the media today, in New Delhi. pic.twitter.com/NXlOhz5xWy
— All India Trinamool Congress (@AITCofficial) September 30, 2026
ममता ने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग और बीजेपी के बीच मिलीभगत के कारण चुनावी प्रक्रिया प्रभावित हुई। उन्होंने EVM को जलाने और मतगणना में गड़बड़ी किए जाने के भी दावे किए।
हालांकि, ये ममता बनर्जी और अन्य विपक्षी नेताओं के आरोप हैं। इन दावों को स्वतंत्र रूप से प्रमाणित तथ्य के रूप में प्रस्तुत नहीं किया जा सकता।
‘वैनिश कुमार’ नाम क्यों दिया?
ममता बनर्जी मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के लिए पहले भी ‘वैनिश कुमार’ नाम का इस्तेमाल कर चुकी हैं। इस नाम के जरिए वह मतदाता सूची से कथित तौर पर नाम गायब होने के मुद्दे को उठा रही हैं।
दरअसल, SIR यानी Special Intensive Revision के तहत मतदाता सूचियों का विशेष गहन पुनरीक्षण किया जा रहा है। विपक्ष का आरोप है कि इस प्रक्रिया में बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम हटाए जाने से वास्तविक मतदाताओं के मतदान के अधिकार पर असर पड़ सकता है।
विपक्षी दलों ने मतदाता सूची में नाम जोड़ने और हटाने की प्रक्रिया, दस्तावेजों के सत्यापन तथा चुनाव आयोग के फैसलों में पारदर्शिता को लेकर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि किसी भी पात्र मतदाता का नाम गलत तरीके से सूची से नहीं हटना चाहिए।
चुनाव आयोग के भीतर 14 बार आपत्ति का दावा
SIR को लेकर विवाद उस समय और बढ़ गया, जब द इंडियन एक्सप्रेस की एक पड़ताल में दावा किया गया कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले करीब 10 महीनों में चुनाव आयोग के फैसलों और प्रक्रियाओं पर कम से कम 14 बार औपचारिक आपत्तियां दर्ज की थीं।
रिपोर्ट के मुताबिक, ये आपत्तियां मतदाता सूची में संशोधन, नए मतदाताओं के पंजीकरण के लिए इस्तेमाल होने वाले फॉर्म-6, चुनावी डेटाबेस और कुछ राज्यों में मतदाता सूची से जुड़े फैसलों को लेकर थीं।
इस रिपोर्ट के सामने आने के बाद विपक्ष ने मुख्य चुनाव आयुक्त की भूमिका और आयोग के भीतर फैसले लेने की प्रक्रिया पर सवाल उठाए।
दूसरी ओर, हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, चुनाव आयोग के अधिकारियों ने इन मतभेदों से जुड़ी खबरों के बाद कहा था कि SIR सहित आयोग के सभी फैसले तीनों चुनाव आयुक्तों की मंजूरी से लिए गए थे। इस तरह आयोग के भीतर फैसले लेने की प्रक्रिया को लेकर सामने आए दावों और आधिकारिक पक्ष के बीच विवाद बना हुआ है।
राहुल गांधी बोले- लोकतंत्र को नुकसान पहुंचाने वालों पर कार्रवाई हो
INDIA गठबंधन की बैठक के बाद कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने कहा कि बैठक में वोट चोरी और चुनावी प्रक्रिया से जुड़े सवालों पर विस्तार से चर्चा हुई।
राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि बीजेपी, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की भूमिका लोकतांत्रिक व्यवस्था से जुड़े गंभीर सवाल खड़े करती है। उन्होंने कहा कि विपक्ष इन मुद्दों को चुपचाप स्वीकार नहीं करेगा।
राहुल गांधी के मुताबिक, लोकतंत्र और संविधान की रक्षा करना विपक्षी दलों की सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि किसी व्यक्ति का पद कितना भी बड़ा क्यों न हो, लोकतंत्र उससे बड़ा है।
उन्होंने विपक्षी नेताओं से संविधान के सामूहिक रक्षक के रूप में काम करने की अपील भी की। राहुल के बयान का मुख्य जोर मतदाता सूची की पारदर्शिता, चुनावी प्रक्रिया में जवाबदेही और कथित अनियमितताओं की जांच की मांग पर रहा।
INDIA गठबंधन की बैठक में काफी अच्छी चर्चा हुई है और वोट चोरी से जुड़े मामले पर सभी से बात हुई।
हम सभी का मानना है कि BJP, नरेंद्र मोदी, अमित शाह और ज्ञानेश कुमार ने लोकतांत्रिक व्यवस्था पर हमला किया है।
🔹We are not going to take this lying down. We are going to ensure, and… pic.twitter.com/L9axfWtyQV
— Congress (@INCIndia) September 30, 2026
खड़गे ने किया देशव्यापी ‘सेव डेमोक्रेसी’ मार्च का ऐलान
बैठक के बाद कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने INDIA गठबंधन के साझा आंदोलन की घोषणा की। विपक्षी दलों ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों के खिलाफ देशभर में विरोध प्रदर्शन करने का फैसला किया है।
घोषित कार्यक्रम के मुताबिक:
- 2 से 8 अक्टूबर: देशभर में ‘सेव डेमोक्रेसी’ मार्च और जिला स्तर पर प्रदर्शन।
- 6 अक्टूबर: विपक्षी सांसदों का चुनाव आयोग तक मार्च।
- आगे की रणनीति: मतदाता सूची में पारदर्शिता और चुनाव आयोग की जवाबदेही को लेकर संयुक्त राजनीतिक अभियान।
विपक्षी दलों का कहना है कि मतदाता सूची में कथित अनियमितताओं के मुद्दे को राष्ट्रीय स्तर पर उठाया जाएगा। इन कार्यक्रमों के जरिए SIR की प्रक्रिया और चुनाव आयोग के फैसलों पर जवाब मांगा जाएगा।
तेजस्वी यादव ने भी उठाए चुनावी प्रक्रिया पर सवाल
RJD नेता तेजस्वी यादव ने बैठक से पहले कहा कि INDIA गठबंधन की बैठक में चुनावी प्रक्रिया से जुड़ी कथित गड़बड़ियों और चुनाव आयोग के भीतर उठाए गए सवालों पर चर्चा होगी।
तेजस्वी के मुताबिक, मतदाता सूची में बदलाव किस प्रक्रिया के तहत किए गए और इन फैसलों की जवाबदेही किसकी है, यह महत्वपूर्ण सवाल है।
विपक्षी दलों की मांग है कि मतदाता सूची के पुनरीक्षण में पारदर्शिता सुनिश्चित की जाए और पात्र मतदाताओं के नाम गलत तरीके से हटाए जाने की शिकायतों की जांच हो।
अभिषेक बनर्जी ने कहा- आयोग के भीतर से भी उठ रहे सवाल
तृणमूल कांग्रेस के सांसद अभिषेक बनर्जी ने भी चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि पहले राजनीतिक दल चुनावी प्रक्रिया में कथित गड़बड़ियों को लेकर सवाल उठाते थे, लेकिन अब आयोग के भीतर से भी आपत्तियों की खबरें सामने आ रही हैं।
अभिषेक बनर्जी ने चुनाव आयुक्तों की कथित आपत्तियों का हवाला देते हुए आयोग की निर्णय प्रक्रिया पर सवाल किया। उन्होंने दावा किया कि पश्चिम बंगाल सहित कई क्षेत्रों में मतदाता सूची से जुड़े मुद्दे सामने आए हैं।
हालांकि, चुनाव आयुक्तों की ओर से आपत्तियां दर्ज किए जाने की मीडिया रिपोर्ट और विपक्ष के राजनीतिक आरोप अपने आप में चुनाव में धांधली का अंतिम प्रमाण नहीं हैं। इन दावों की वास्तविक स्थिति संबंधित दस्तावेजों, आधिकारिक जवाबों और जांच के निष्कर्षों से स्पष्ट होगी।
EVM और वोटर लिस्ट पर भी हुई चर्चा
NCP-शरदचंद्र पवार गुट के नेता जितेंद्र आव्हाड ने बताया कि बैठक में EVM और मतदाता सूची में बदलावों को लेकर चर्चा हुई।
उन्होंने EVM की सुरक्षा और चुनावी प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर सवाल उठाए। आव्हाड ने आरोप लगाया कि मतदाता सूची में नाम हटाने और जोड़ने की प्रक्रिया को लेकर लोगों में नाराजगी है।
उन्होंने पश्चिम बंगाल और बिहार में चुनावी प्रक्रिया को लेकर भी सवाल उठाए। हालांकि, EVM में छेड़छाड़ या चुनाव परिणामों को प्रभावित करने के आरोपों की पुष्टि के लिए ठोस तकनीकी साक्ष्य और संबंधित संस्थाओं के निष्कर्ष जरूरी हैं।
SIR पर क्या है विपक्ष और चुनाव आयोग का पक्ष?
SIR को लेकर विवाद के केंद्र में मतदाता सूची की शुद्धता, पात्र मतदाताओं के नामों की सुरक्षा और पुनरीक्षण प्रक्रिया की पारदर्शिता है।
विपक्ष का पक्ष: विपक्षी दलों का कहना है कि SIR के दौरान वास्तविक मतदाताओं के नाम गलत तरीके से हटने की आशंका है। वे प्रक्रिया में पारदर्शिता, शिकायतों के निपटारे और चुनाव आयोग की जवाबदेही की मांग कर रहे हैं।
चुनाव आयोग का पक्ष: आयोग की ओर से अधिकारियों ने कहा है कि SIR सहित आयोग के फैसले तीनों चुनाव आयुक्तों की मंजूरी से लिए गए। आयोग की प्रक्रिया और फैसलों को लेकर उठाए गए सवालों का आकलन आधिकारिक दस्तावेजों और लागू कानूनी प्रावधानों के आधार पर किया जाना जरूरी है।
इस विवाद का महत्वपूर्ण पहलू यह है कि मतदाता सूची की शुद्धता सुनिश्चित करने के साथ-साथ किसी भी पात्र मतदाता का नाम गलत तरीके से न हटे, यह भी लोकतांत्रिक प्रक्रिया के लिए जरूरी है।
INDIA गठबंधन के लिए एकजुटता का मुद्दा बना SIR
INDIA गठबंधन में शामिल दलों के बीच अलग-अलग मुद्दों पर मतभेद रहे हैं। लेकिन SIR, मतदाता सूची और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर उठे सवालों ने विपक्षी दलों को एक साझा राजनीतिक मंच पर लाने का अवसर दिया है।
ममता बनर्जी ने मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग की है, राहुल गांधी ने इसे लोकतंत्र और संविधान से जुड़ा मुद्दा बताया है, जबकि मल्लिकार्जुन खड़गे ने देशव्यापी आंदोलन की घोषणा की है।
अब 2 से 8 अक्टूबर तक प्रस्तावित विरोध कार्यक्रमों और 6 अक्टूबर को चुनाव आयोग तक मार्च पर नजर रहेगी। इन कार्यक्रमों के दौरान विपक्ष अपनी मांगों को किस तरह आगे बढ़ाता है और चुनाव आयोग की ओर से इन सवालों पर क्या प्रतिक्रिया आती है, यह आगे की राजनीतिक घटनाओं के लिए महत्वपूर्ण होगा।
विपक्ष ने देशव्यापी आंदोलन का रास्ता चुना है।
INDIA गठबंधन की बैठक के बाद SIR, वोटर लिस्ट और चुनाव आयोग की निष्पक्षता को लेकर राजनीतिक टकराव और तेज हो गया है। विपक्ष ने देशव्यापी आंदोलन का रास्ता चुना है। वहीं, इन आरोपों की सच्चाई और चुनावी प्रक्रिया से जुड़े विवादों का अंतिम आकलन तथ्यों, आधिकारिक रिकॉर्ड और संबंधित कानूनी प्रक्रियाओं के आधार पर ही किया जाना चाहिए।
Written & Edit by : Chandan Patel
Reported by : Chandan Patel
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