गिद्धौर (जमुई): बिहार सरकार जहां सरकारी स्कूलों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, नियमित उपस्थिति और बेहतर पठन-पाठन के लिए लगातार करोड़ों रुपये खर्च कर रही है, वहीं जमीनी हकीकत कई बार इन प्रयासों पर सवाल खड़े कर देती है। जमुई जिले के गिद्धौर प्रखंड से सामने आया एक मामला शिक्षा व्यवस्था की निगरानी और जवाबदेही पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा रहा है। सोशल मीडिया पर वायरल एक तस्वीर में एक शिक्षिका कथित तौर पर कक्षा के भीतर कूलर चलाकर आराम करती दिखाई दे रही हैं। हालांकि AVN News इस वायरल तस्वीर की स्वतंत्र पुष्टि नहीं करता है, लेकिन तस्वीर के सामने आने के बाद स्थानीय लोगों और अभिभावकों में नाराजगी देखी जा रही है।

शिक्षा
सोशल मीडिया पर वायरल तस्वीर में कक्षा के भीतर आराम करती दिख रही शिक्षिका। (तस्वीर की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।)

सोशल मीडिया पर वायरल तस्वीर से मचा हड़कंप

बताया जा रहा है कि वायरल तस्वीर गिद्धौर प्रखंड की सेवा पंचायत स्थित प्राथमिक विद्यालय उपरी सेवा मुसहरी टोला की है। तस्वीर बुधवार को सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुई। दावा किया जा रहा है कि किसी ग्रामीण या अभिभावक ने यह तस्वीर खींचकर इंटरनेट मीडिया पर साझा कर दी।

यदि वायरल तस्वीर सही साबित होती है तो यह न केवल विद्यालय की कार्यशैली बल्कि शिक्षा व्यवस्था की निगरानी पर भी गंभीर सवाल खड़े करती है।

पठन-पाठन की गुणवत्ता पर उठने लगे सवाल

ग्रामीणों का कहना है कि विद्यालय में बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। उनका आरोप है कि नियमित कक्षाओं और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के दावों के बावजूद विद्यालय में अपेक्षित शैक्षणिक माहौल नहीं दिख रहा है। अभिभावकों का कहना है कि बच्चों के भविष्य से किसी भी तरह की लापरवाही स्वीकार नहीं की जा सकती।

विभाग कर रहा दावे, लेकिन जमीनी तस्वीर अलग

शिक्षा विभाग लगातार यह दावा करता रहा है कि विद्यालयों में नियमित कक्षाएं संचालित हों और विद्यार्थियों को बेहतर शिक्षा मिले। विद्यालयों की आधारभूत संरचना सुधारने से लेकर संसाधन उपलब्ध कराने तक विभाग लगातार प्रयासरत है।

इसके बावजूद यदि विद्यालयों में इस तरह की स्थिति सामने आती है तो विभागीय दावों की प्रभावशीलता पर सवाल उठना स्वाभाविक है।

निगरानी व्यवस्था भी सवालों के घेरे में

विद्यालयों की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए प्रखंड शिक्षा प्रसार पदाधिकारी सहित अन्य अधिकारियों को नियमित निरीक्षण के निर्देश दिए गए हैं। लेकिन स्थानीय लोगों का आरोप है कि कई बार निरीक्षण केवल औपचारिकता बनकर रह जाता है।

ग्रामीणों का कहना है कि विभागीय ग्रुप में विद्यालय की तस्वीरें साझा कर निरीक्षण की प्रक्रिया पूरी कर ली जाती है, जबकि यह सुनिश्चित नहीं किया जाता कि बच्चे वास्तव में कक्षा में पढ़ रहे हैं या नहीं।

क्या होगी कार्रवाई?

इस पूरे मामले पर गिद्धौर के बीईईओ नीलेश कुमार ने कहा है कि,

“प्रसारित हो रही तस्वीर अभी मेरे संज्ञान में नहीं आई है। यदि मामला संज्ञान में आता है तो इसकी जांच कराई जाएगी और दोषी पाए जाने पर विभागीय कार्रवाई की जाएगी।”

निष्पक्षता के लिए आवश्यक तथ्य

  • वायरल तस्वीर की अभी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
  • मामले की विभागीय जांच के बाद ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
  • जांच पूरी होने तक किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं होगा।

Written & Edit by : Chandan Patel.

Reported by: Bikki Kumar.

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