गिद्धौर (जमुई): बिहार के जमुई जिले के गिद्धौर जैसे छोटे कस्बे से निकलकर युवा लेखक रुपेश कुमार आज अपनी लेखनी के दम पर राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बना रहे हैं। सामाजिक सरोकारों से लेकर अपराध, राजनीति, हास्य-व्यंग्य, हॉरर और डिजिटल अपराध जैसे समकालीन विषयों पर उनकी लेखनी पाठकों के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रही है। साहित्य के साथ-साथ वेब सीरीज लेखन और आदिवासी कला संरक्षण के क्षेत्र में भी उनका योगदान उन्हें अन्य युवा लेखकों से अलग पहचान दिला रहा है।

गिद्धौर से राष्ट्रीय स्तर तक का सफर

रुपेश कुमार गिद्धौर निवासी शिक्षक चंद्रशेखर सिंह के पुत्र हैं। शुरुआती शिक्षा गोड्डा हाई स्कूल से प्राप्त करने के बाद उन्होंने आरमित्रा, देवघर कॉलेज, देवघर तथा मुंबई से एमबीए की पढ़ाई पूरी की। पढ़ाई के बाद उन्होंने एलजी, विप्रो और टीवीएस जैसी प्रतिष्ठित कंपनियों में अपनी सेवाएं दीं।

कॉर्पोरेट क्षेत्र में सफल करियर के बावजूद साहित्य के प्रति उनका लगाव लगातार बढ़ता गया। वर्ष 2017 में उन्होंने पेशेवर लेखक के रूप में अपने लेखन की शुरुआत की और देखते ही देखते अपनी अलग पहचान बना ली।

गिद्धौर
गिद्धौर निवासी युवा लेखक रुपेश कुमार

हिंदी और अंग्रेजी दोनों ही भाषाओं पर मजबूत पकड़

रुपेश कुमार हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं में समान दक्षता रखते हैं। उनकी लेखनी सामाजिक मुद्दों के साथ-साथ आधुनिक डिजिटल दुनिया की चुनौतियों को भी प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करती है।

उनकी अब तक प्रकाशित प्रमुख कृतियां हैं :

  • स्ट्रेट फ्रॉम लाइफ (Straight From Life)
  • जज्बात पतझड़ के पत्तों का गीत
  • डिजिटल ट्रैप (Digital Trap)
  • डिजिटल जाल (Digital Jaal)

इनके अलावा उनकी कुल 4 उपन्यास और 2 काव्य संग्रह प्रकाशित हो चुके हैं, जिन्हें Amazon और Flipkart जैसे ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर पाठकों का अच्छा प्रतिसाद मिल रहा है।

वेब सीरीज लेखन और आदिवासी कला संरक्षण पर भी कर रहे कार्य

साहित्य लेखन के साथ-साथ रुपेश कुमार इन दिनों वेब सीरीज लेखन पर भी सक्रिय रूप से कार्य कर रहे हैं। इसके अलावा वे सरकार के आदिवासी कला संरक्षण से जुड़े एक ड्रीम प्रोजेक्ट का हिस्सा बनकर पारंपरिक कला और संस्कृति के संरक्षण की दिशा में भी योगदान दे रहे हैं।

कई संस्थाओं से मिल चुका सम्मान

रुपेश कुमार की साहित्यिक उपलब्धियों और सामाजिक विषयों पर प्रभावशाली लेखन को देखते हुए विभिन्न प्रकाशन संस्थानों और सामाजिक संगठनों द्वारा उन्हें कई सम्मान प्रदान किए जा चुके हैं। उनकी सफलता गिद्धौर और पूरे जमुई जिले के युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बन रही है।

युवाओं के लिए प्रेरणा बने रुपेश कुमार

छोटे शहर से निकलकर राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाना आसान नहीं होता, लेकिन रुपेश कुमार ने अपनी मेहनत, निरंतर सीखने की इच्छा और लेखन के प्रति समर्पण से यह साबित कर दिया कि प्रतिभा किसी बड़े शहर की मोहताज नहीं होती। आज वे साहित्य, डिजिटल कंटेंट और सामाजिक विषयों पर अपने विचारों के माध्यम से नई पीढ़ी को प्रेरित कर रहे हैं।

Written & Edit by : Chandan Patel.

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