नई दिल्ली: देश की शिक्षा व्यवस्था, परीक्षा घोटालों और युवाओं के भविष्य को लेकर उठी चिंगारी अब एक बड़े जनआंदोलन का रूप ले चुकी है। राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर से शुरू हुआ यह विरोध अब देशभर के कई राज्यों में फैल गया है। छात्रों के साथ अभिभावक, शिक्षक, सामाजिक संगठन और विभिन्न राजनीतिक दल भी इस आंदोलन के समर्थन में खुलकर सामने आ गए हैं। संसद मार्च के दौरान प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच हुई तीखी झड़प, लाठीचार्ज और हिरासत की कार्रवाई ने पूरे देश का ध्यान इस आंदोलन की ओर खींच लिया है। इसके बाद राजनीतिक माहौल भी पूरी तरह गर्म हो गया है।
जंतर-मंतर से शुरू हुआ आंदोलन, कई राज्यों तक पहुंची लहर
देश में शिक्षा व्यवस्था और परीक्षा घोटालों के खिलाफ शुरू हुआ यह आंदोलन अब दिल्ली तक सीमित नहीं रहा। जंतर-मंतर से शुरू हुए प्रदर्शन ने देखते ही देखते राष्ट्रीय अब स्वरूप ले लिया। छात्रों, अभिभावकों और शिक्षकों के साथ कई सामाजिक संगठनों ने भी आंदोलन को समर्थन दिया, जबकि कांग्रेस समेत कई विपक्षी दल भी प्रदर्शनकारियों के साथ खड़े नजर आए।

संसद मार्च के दौरान पुलिस से टकराव
आंदोलन का सबसे अहम मोड़ तब आया, जब प्रदर्शनकारियों ने संसद की ओर मार्च करने की कोशिश की। पुलिस ने सुरक्षा व्यवस्था का हवाला देते हुए बैरिकेड लगाकर उन्हें रोक दिया। इस दौरान कई स्थानों पर धक्का-मुक्की और झड़प हुई। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि पुलिस ने बल प्रयोग किया, जबकि पुलिस का कहना है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए आवश्यक कदम उठाए गए। घटना के बाद घायल छात्रों की तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुए, जिससे पूरे देश में बहस तेज हो गई।

विपक्ष सरकार पर हमलावर
घटना के बाद कांग्रेस ने केंद्र सरकार पर छात्रों की आवाज दबाने का आरोप लगाया। पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने प्रदर्शनकारियों के समर्थन में विरोध दर्ज कराया। कांग्रेस का कहना है कि युवाओं के भविष्य से जुड़े सवालों का समाधान करने के बजाय सरकार विरोध को दबाने का प्रयास कर रही है। वहीं सरकार ने विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि छात्रों के मुद्दे का राजनीतिकरण किया जा रहा है।
संसद में भी गूंजा मुद्दा
संसद के मानसून सत्र में भी शिक्षा व्यवस्था और परीक्षा घोटालों का मुद्दा जोर-शोर से उठा। विपक्ष ने सरकार से जवाब मांगा और पुलिस कार्रवाई पर सवाल खड़े किए। वहीं केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने विपक्ष पर छात्रों को राजनीतिक मोहरा बनाने का आरोप लगाया और कहा कि सरकार शिक्षा प्रणाली को मजबूत करने के लिए लगातार काम कर रही है।
दिल्ली से बाहर भी तेज हुए प्रदर्शन
दिल्ली के अलावा कई राज्यों में भी प्रदर्शन तेज हो गए हैं। अहमदाबाद में करीब 150 प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया, जिन्हें बाद में रिहा कर दिया गया। विभिन्न शहरों में छात्र संगठन लगातार प्रदर्शन कर रहे हैं। जंतर-मंतर पर भी आंदोलन जारी है और आयोजकों ने साफ कहा है कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।
देशभर की नजर सरकार के अगले कदम पर
लगातार बढ़ते आंदोलन और विपक्ष के हमलों के बीच अब सभी की निगाहें केंद्र सरकार के अगले फैसले पर टिकी हैं। आने वाले दिनों में यह आंदोलन किस दिशा में जाएगा और सरकार छात्रों की मांगों पर क्या रुख अपनाएगी, यह देश की राजनीति और शिक्षा व्यवस्था दोनों के लिए अहम माना जा रहा है।
Written & Edit by : Chandan Patel.
