झाझा (जमुई)। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) झाझा में शिशु रोग विशेषज्ञ चिकित्सक की कमी के कारण विशेष शिशु ओपीडी पूरी तरह ठप हो गया है। इसका सीधा असर क्षेत्र के हजारों बच्चों की स्वास्थ्य सेवाओं पर पड़ रहा है। स्वास्थ्य व्यवस्था की यह गंभीर खामी न केवल बच्चों के बेहतर इलाज में बाधा बन रही है, बल्कि गरीब और ग्रामीण परिवारों की परेशानी भी बढ़ा रही है।

शिशु रोग विशेषज्ञ नहीं, बच्चों के इलाज पर पड़ रहा इसका असर

झाझा प्रखंड के सबसे बड़े सरकारी स्वास्थ्य केंद्र में लंबे समय से शिशु रोग विशेषज्ञ चिकित्सक की नियुक्ति नहीं होने के कारण बच्चों के लिए संचालित विशेष ओपीडी बंद पड़ी है। अस्पताल में प्रतिदिन आने वाले मरीजों में करीब 20 प्रतिशत बच्चे होते हैं, लेकिन विशेषज्ञ चिकित्सक के अभाव में उन्हें आवश्यक चिकित्सा सुविधा नहीं मिल पा रही है।

ग्रामीण इलाकों से बड़ी संख्या में लोग अपने बच्चों के इलाज के लिए अस्पताल पहुंचते हैं, लेकिन उन्हें निराश होकर लौटना पड़ता है या फिर सामान्य ओपीडी में इलाज कराना पड़ता है।

जेनरल ओपीडी पर बढ़ा बोझ, बच्चों को नहीं मिल रहा विशेषज्ञ इलाज

विशेष शिशु ओपीडी बंद होने के कारण बच्चों के परिजन मजबूरी में जेनरल ओपीडी का सहारा ले रहे हैं। यहां पहले से ही मरीजों की भारी भीड़ रहती है। ऐसे में ड्यूटी पर मौजूद चिकित्सकों को सभी प्रकार के मरीजों को देखना पड़ता है, जिससे बच्चों को समुचित और विशेषज्ञ चिकित्सा सेवा नहीं मिल पाती।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि बच्चों की बीमारियां सामान्य मरीजों से अलग होती हैं और उनके इलाज के लिए विशेष प्रशिक्षण प्राप्त शिशु रोग विशेषज्ञ की आवश्यकता होती है।

स्वास्थ्य विभाग बैसाखी के सहारे चल रही व्यवस्था

स्थानीय लोगों का कहना है कि झाझा का स्वास्थ्य विभाग कई महत्वपूर्ण पदों की कमी से जूझ रहा है। शिशु रोग विशेषज्ञ की अनुपस्थिति यह दर्शाती है कि स्वास्थ्य व्यवस्था फिलहाल अस्थायी व्यवस्थाओं और सीमित संसाधनों के सहारे संचालित हो रही है।

लोगों का आरोप है कि वर्षों से इस समस्या के समाधान के लिए कोई ठोस पहल नहीं की गई, जिसके कारण आम जनता को स्वास्थ्य सेवाओं के लिए निजी अस्पतालों और क्लीनिकों पर निर्भर होना पड़ रहा है।

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झाझा अस्पताल में शिशु रोग विशेषज्ञ नहीं, बच्चों का इलाज प्रभावित

मजबूरी में प्राइवेट क्लीनिकों का रुख कर रहे अभिभावक

सरकारी अस्पताल में विशेषज्ञ सुविधा उपलब्ध नहीं होने के कारण बच्चों के परिजन निजी चिकित्सकों के पास जाने को विवश हैं। इससे गरीब और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा है।

कई अभिभावकों का कहना है कि सरकारी अस्पताल में यदि शिशु रोग विशेषज्ञ उपलब्ध हो जाएं तो उन्हें महंगे निजी इलाज से राहत मिल सकती है।

झाझा में स्वास्थ्य व्यवस्था पर उठ रहे सवाल

एक ओर सरकार ग्रामीण क्षेत्रों में बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के दावे करती है, वहीं दूसरी ओर झाझा जैसे महत्वपूर्ण प्रखंड अस्पताल में शिशु रोग विशेषज्ञ का नहीं होना कई सवाल खड़े करता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि बच्चों की स्वास्थ्य सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए जल्द से जल्द शिशु रोग विशेषज्ञ की नियुक्ति की जानी चाहिए, ताकि बंद पड़े शिशु ओपीडी को फिर से शुरू किया जा सके।

स्थानीय लोगों की मांग

  • सीएचसी झाझा में तत्काल शिशु रोग विशेषज्ञ की नियुक्ति हो।
  • बंद पड़े शिशु ओपीडी को शीघ्र चालू किया जाए।
  • बच्चों के लिए आवश्यक दवाओं और उपकरणों की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए।
  • ग्रामीण क्षेत्रों के बच्चों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान की जाएं।

झाझा सीएचसी शिशु रोग विशेषज्ञ की कमी क्षेत्र के गरीब और ग्रामीण परिवारों को भुगतना पड़ेगा

झाझा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में शिशु रोग विशेषज्ञ की कमी केवल एक पद रिक्त रहने का मामला नहीं है, बल्कि यह हजारों बच्चों के स्वास्थ्य अधिकार से जुड़ा गंभीर मुद्दा है। यदि समय रहते इस समस्या का समाधान नहीं किया गया तो इसका खामियाजा क्षेत्र के गरीब और ग्रामीण परिवारों को भुगतना पड़ेगा। स्वास्थ्य विभाग और जिला प्रशासन को इस दिशा में तत्काल कार्रवाई करनी चाहिए।

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Edited and Written by : Chandan Patel.

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By Chandan Patel

चंदन पटेल AVN News से लंबे समय से जुड़े पत्रकार हैं। उन्होंने वर्ष 2020 से रिपोर्टर के रूप में पत्रकारिता की शुरुआत की और जमीनी स्तर की खबरों को प्रमुखता से उठाते हुए लगातार अपनी पहचान बनाई। वर्तमान में वे AVN News के एडिटर-इन-चीफ के रूप में समाचार संपादन, कवरेज और डिजिटल पत्रकारिता का नेतृत्व कर रहे हैं। राजनीति, खेल,स्थानीय मुद्दों, जनसमस्याओं, प्रशासनिक गतिविधियों और सामाजिक सरोकारों से जुड़ी खबरों को तथ्यपरक और सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचाना उनकी पत्रकारिता की प्रमुख विशेषता है। उनका उद्देश्य आम लोगों की आवाज को प्रमुखता देना और विश्वसनीय खबरों के माध्यम से समाज को जागरूक करना है।

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