ग्रामीणों की शिकायत और मीडिया रिपोर्ट के बाद हरकत में आया प्रशासन
जमुई: जिले में अवैध बालू खनन और पर्यावरणीय नियमों के सरेआम उल्लंघन के खिलाफ जिला प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई करते हुए चकाई प्रखंड के बलिया डाबर घाट के संवेदक पर 5 लाख 47 हजार रुपये का आर्थिक दंड लगाया है। यह कार्रवाई जिला पदाधिकारी नवीन कुमार के निर्देश पर जिला खनिज विकास पदाधिकारी और खनन निरीक्षक की संयुक्त जांच टीम द्वारा की गई है।
जांच में सामने आया स्वीकृत सीमा से बाहर बालू खनन का मामला
प्राप्त जानकारी के अनुसार स्थानीय ग्रामीणों द्वारा दिए गए आवेदन और मीडिया में प्रकाशित समाचारों के आधार पर जिला प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लिया। इसके बाद खनन विभाग की टीम ने बलिया डाबर घाट का स्थलीय निरीक्षण किया।
जांच के दौरान पाया गया कि संवेदक द्वारा आवंटित 1600 मीटर की स्वीकृत सीमा का उल्लंघन करते हुए मेझनी एवं बढ़िया घाट मौजा क्षेत्र में पोकलेन मशीनों के माध्यम से बालू का अवैध खनन और उठाव किया जा रहा था। यह गतिविधि पर्यावरण स्वीकृति एवं खनन नियमों के स्पष्ट उल्लंघन की श्रेणी में पाई गई।
प्रशासन ने लगाया 5.47 लाख रुपये का जुर्माना
मामले को गंभीर अनियमितता मानते हुए जिला प्रशासन ने संबंधित संवेदक पर नियमानुसार 5 लाख 47 हजार रुपये का आर्थिक दंड लगाया है। वही प्रशासन का कहना है कि प्राकृतिक संसाधनों के अवैध दोहन को किसी भी कीमत पर बिलकुल बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

ग्रामीणों की सुरक्षा के लिए पुलिस को निर्देश
जांच के दौरान ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि अवैध खनन का विरोध करने पर उन्हें डराया-धमकाया जा रहा है तथा क्षेत्र में भय का माहौल बनाया जा रहा है। इन शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए प्रशासन ने अंचल अधिकारी चकाई एवं चंद्रमंडीह थाना पुलिस को क्षेत्र में नियमित गश्त और निगरानी बढ़ाने के निर्देश दिए हैं।
नियम तोड़ने वालों पर होगी और भी सख्त कार्रवाई
जिला खनिज विकास पदाधिकारी ने स्पष्ट कहा कि अवैध खनन, ओवरलोडिंग और पर्यावरणीय नियमों के उल्लंघन के मामलों में कठोर कार्रवाई जारी रहेगी। सभी संवेदकों को चेतावनी दी गई है कि वे केवल स्वीकृत क्षेत्र के भीतर ही खनन कार्य करें।
उन्होंने कहा कि भविष्य में नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर भारी जुर्माने के अलावा प्राथमिकी दर्ज करने और टेंडर रद्द करने जैसी कठोर कार्रवाई भी की जाएगी।
पर्यावरण संरक्षण के प्रति प्रशासन की सख्ती
जिला प्रशासन का यह कदम अवैध खनन पर नियंत्रण और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। प्रशासन ने स्पष्ट संदेश दिया है कि प्राकृतिक संसाधनों के दोहन में नियमों की अनदेखी करने वालों को किसी भी हालत में बख्शा नहीं जाएगा।
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