गिद्धौर स्वास्थ्य केंद्र की लापरवाही का वीडियो वायरल, मरीज के परिजनों का फूटा गुस्सा
जमुई: बिहार सरकार जहां बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं का दावा कर रही है, वहीं जमुई जिले के गिद्धौर स्थित दिग्विजय सिंह सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की एक वायरल वीडियो ने स्वास्थ्य व्यवस्था की पोल खोलकर रख दी है। वायरल वीडियो में अस्पताल की लचर व्यवस्था, डॉक्टरों की अनुपस्थिति और गंभीर मरीज के इलाज में बरती गई कथित लापरवाही साफ दिखाई दे रही है।
गंभीर हालत में अस्पताल पहुंची महिला मरीज
जानकारी के अनुसार, इंद्रजला देवी नामक महिला की तबीयत अचानक बिगड़ गई। परिजन आनन-फानन में उन्हें इलाज के लिए दिग्विजय सिंह स्वास्थ्य केंद्र गिद्धौर लेकर पहुंचे। लेकिन अस्पताल पहुंचने के बाद जो स्थिति सामने आई, उसने परिजनों की चिंता और बढ़ा दी।
परिजनों का आरोप है कि अस्पताल में मौजूद डॉक्टर और स्वास्थ्यकर्मी अपनी जिम्मेदारियों के प्रति गंभीर नहीं दिखे। मरीज की हालत लगातार बिगड़ती रही, लेकिन समय पर समुचित इलाज नहीं मिल पाया।
डॉक्टर से सवाल पूछने पर अस्पताल छोड़कर चले गए डॉक्टर?
वायरल वीडियो में देखा जा सकता है कि जब मरीज के परिजनों ने डॉक्टर राहुल से इलाज में हो रही देरी और अस्पताल की व्यवस्था को लेकर सवाल पूछे, तो माहौल तनावपूर्ण हो गया। आरोप है कि सवालों का जवाब देने के बजाय डॉक्टर वहां से चले गए। वही जीएनएम सरिता भी मरीज को ऑक्सीजन लगाने आना कानी कर रही थी कि ये आप लगाओ वो लगाए।
इस घटना के बाद मरीज के परिजनों का गुस्सा फूट पड़ा। उनका कहना था कि जब अस्पताल में डॉक्टर ही जिम्मेदारी से काम नहीं करेंगे, तो गरीब और जरूरतमंद मरीज आखिर कहां जाएं।
ऑक्सीजन लगाने वाला कर्मचारी भी नहीं था मौजूद
सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि मरीज की हालत गंभीर होने के बावजूद अस्पताल में ऑक्सीजन लगाने के लिए प्रशिक्षित कर्मी तक उपलब्ध नहीं था। परिजन अस्पताल परिसर में इधर-उधर मदद की गुहार लगाते रहे, लेकिन उन्हें तत्काल सहायता नहीं मिल सकी।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यह कोई पहली घटना नहीं है। अक्सर अस्पताल में डॉक्टरों और जीएनएम सरिता (GNM) कर्मियों की अनुपस्थिति की शिकायतें सामने आती रहती हैं।

देर से पहुंची एंबुलेंस, बढ़ी मरीज की परेशानी
परिजनों का आरोप है कि मरीज को बेहतर इलाज के लिए रेफर करने का निर्णय भी काफी देर से लिया गया। एंबुलेंस समय पर नहीं पहुंची, जिससे मरीज की स्थिति और अधिक गंभीर हो गई।
स्वास्थ्य सेवाओं में इस तरह की देरी कई बार मरीजों की जान पर भारी पड़ सकती है। यही कारण है कि लोगों में अस्पताल प्रशासन के प्रति नाराजगी लगातार बढ़ रही है।
अस्पताल प्रबंधन पर भी उठ रहे सवाल
स्थानीय लोगों और मरीज के परिजनों का कहना है कि अस्पताल में लंबे समय से अव्यवस्था का माहौल है। इसके बावजूद जिम्मेदार अधिकारियों द्वारा कोई ठोस कार्रवाई नहीं की जाती।
लोगों का आरोप है कि यदि अस्पताल में डॉक्टर, जीएनएम और अन्य स्वास्थ्यकर्मी नियमित रूप से अपनी ड्यूटी निभाएं तो ऐसी घटनाओं को रोका जा सकता है। अब सवाल यह उठ रहा है कि आखिर अस्पताल की इन कमियों के लिए जिम्मेदार कौन है?
मरीज के परिजनों का दर्द
मरीज के परिजनों की आंखों में डर और बेबसी साफ दिखाई दे रही थी। उनका कहना था कि वे अपनी मरीज को बचाने की उम्मीद लेकर अस्पताल पहुंचे थे, लेकिन वहां की बदहाल व्यवस्था ने उनका भरोसा तोड़ दिया।
एक परिजन ने भावुक होकर कहा, “अगर समय पर इलाज और ऑक्सीजन मिल जाती तो शायद हमें इतनी परेशानी नहीं झेलनी पड़ती। अस्पताल में मरीजों की जिंदगी से खिलवाड़ नहीं होना चाहिए।”
स्वास्थ्य व्यवस्था पर बड़ा सवाल
गिद्धौर स्वास्थ्य केंद्र का यह मामला एक बार फिर सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। यदि वायरल वीडियो में लगाए जा रहे आरोप सही साबित होते हैं तो यह सिर्फ एक अस्पताल की समस्या नहीं, बल्कि पूरे स्वास्थ्य तंत्र के लिए चिंता का विषय है।
अब देखना होगा कि स्वास्थ्य विभाग इस मामले की जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करता है या फिर यह मामला भी अन्य मामलों की तरह फाइलों में दबकर रह जाएगा।
(नोट: यह रिपोर्ट वायरल वीडियो और स्थानीय लोगों द्वारा लगाए गए आरोपों पर आधारित है। संबंधित पक्ष का आधिकारिक बयान आने पर खबर को अपडेट किया जाएगा।)
Written by : Chandan Patel.
