Jamui Accident News: जमुई जिले के खैरा बाजार में गुरुवार की सुबह हुई एक दर्दनाक सड़क दुर्घटना ने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया। बरियारपुर गांव की रहने वाली 10वीं कक्षा की छात्रा मुस्कान कुमारी रोज की तरह साइकिल से कोचिंग पढ़ने जा रही थी, लेकिन उसे क्या पता था कि यह उसकी जिंदगी का आखिरी सफर साबित होगा।
खैरा पंचमंदिर के समीप तेज रफ्तार बालू लदे हाइवा ट्रक ने उसे अपनी चपेट में ले लिया। टक्कर इतनी भयावह थी कि छात्रा ट्रक के पिछले पहिए में फंस गई और लगभग 15 फीट तक घिसटती चली गई। घटनास्थल पर ही उसकी मौत हो गई।
सड़क पर बिखरा था दर्द, 7 घंटे तक ट्रक के नीचे दबी रही मुस्कान
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार दुर्घटना के बाद मुस्कान का शव ट्रक के पिछले पहिए के नीचे दबा रहा। कमर के ऊपर से पहिया गुजर जाने के कारण शव बुरी तरह क्षत-विक्षत हो गया था। सड़क पर खून और शरीर के अवशेष बिखरे पड़े थे।
घटना सुबह करीब 7 बजे हुई, लेकिन शव को ट्रक के नीचे से निकालने में करीब 7 घंटे लग गए। पहले जेसीबी की मदद ली गई, लेकिन सफलता नहीं मिली। बाद में जेक लगाकर ट्रक को ऊपर उठाया गया, तब जाकर शव बाहर निकाला जा सका।
परिवार का दर्द: हमें न्याय चाहिए, पैसे नहीं
मृतका की भाभी रुचि देवी का रो-रोकर बुरा हाल था। उन्होंने आरोप लगाया कि ट्रक चालक और मालिक को बचाने की कोशिश की जा रही है।
परिजनों का कहना है कि दोषियों पर कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए। परिवार ने निष्पक्ष जांच और न्याय की मांग की है।
मुस्कान के घर में मातम पसरा हुआ है। जिस बेटी के बेहतर भविष्य के सपने परिवार देख रहा था, आज उसी की अर्थी उठाने की तैयारी करनी पड़ी।
खैरा बाजार में भड़का आक्रोश, सड़क जाम और ट्रक में तोड़फोड़
घटना के बाद स्थानीय लोगों का गुस्सा फूट पड़ा। आक्रोशित भीड़ ने मुख्य सड़क जाम कर दी और दुर्घटनाग्रस्त हाइवा में तोड़फोड़ शुरू कर दी।
लोगों का कहना था कि खैरा बाजार में लगातार बालू लदे भारी वाहनों की आवाजाही होती है, लेकिन प्रशासन इस समस्या को लेकर गंभीर नहीं है।

पुलिस और भीड़ आमने-सामने, पथराव और फायरिंग
स्थिति तब और बिगड़ गई जब पुलिस मौके पर पहुंची। भीड़ और पुलिस के बीच तीखी झड़प हुई। थाने पर पथराव किया गया और पुलिस की गाड़ियों को नुकसान पहुंचाया गया।
पुलिस के अनुसार भीड़ को नियंत्रित करने और आत्मरक्षा के लिए फायरिंग करनी पड़ी। स्थानीय लोगों ने कई राउंड गोली चलने की बात कही है।

इस घटना में खैरा थाना के लगभग 12 पुलिसकर्मी घायल हुए हैं।
बड़ा सवाल: आखिर खैरा बाजार की सकरी सड़क पर क्यों दौड़ते हैं भारी हाइवा?
इस दर्दनाक हादसे ने प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
खैरा बाजार की सड़क पहले से ही संकरी है। यहां रोजाना हजारों लोग, स्कूली छात्र-छात्राएं, साइकिल सवार और छोटे वाहन गुजरते हैं। इसके बावजूद बालू लदे विशाल हाइवा ट्रकों की आवाजाही लगातार जारी रहती है।
स्थानीय लोगों का सवाल है कि:
क्या भारी वाहनों के लिए कोई वैकल्पिक मार्ग नहीं है?
बाजार क्षेत्र में ट्रकों के प्रवेश पर प्रतिबंध क्यों नहीं लगाया जाता?
स्कूली बच्चों की सुरक्षा को लेकर प्रशासन ने अब तक क्या कदम उठाए हैं?
ओवरलोडिंग और तेज रफ्तार पर निगरानी क्यों नहीं होती?
यदि समय रहते वैकल्पिक रूट की व्यवस्था की गई होती और बाजार क्षेत्र में भारी वाहनों की एंट्री नियंत्रित होती, तो शायद मुस्कान आज जिंदा होती।
प्रशासन और जनप्रतिनिधियों को लेना होगा सबक
यह केवल एक सड़क दुर्घटना नहीं है, बल्कि व्यवस्था की उन खामियों की कहानी है जो हर दिन किसी न किसी परिवार को दर्द दे रही हैं।
जरूरत है कि:
खैरा बाजार में भारी वाहनों की एंट्री पर समयबद्ध रोक लगे।
बालू परिवहन के लिए वैकल्पिक मार्ग तय किए जाएं।
स्पीड कंट्रोल और सीसीटीवी निगरानी बढ़ाई जाए।
पीड़ित परिवार को उचित मुआवजा और न्याय मिले।
दोषी चालक और वाहन मालिक पर कठोर कार्रवाई हो।
लापरवाही और अव्यवस्था ने मुस्कान कुमारी की जिंदगी छीन ली।
मुस्कान कुमारी की मौत केवल एक परिवार की त्रासदी नहीं, बल्कि पूरे समाज के लिए चेतावनी है। एक बेटी अपने सपनों के साथ घर से निकली थी, लेकिन लापरवाही और अव्यवस्था ने उसकी जिंदगी छीन ली।
अब सवाल यह है कि क्या प्रशासन इस हादसे से सबक लेकर कोई ठोस कदम उठाएगा, या फिर किसी और मुस्कान की जान जाने का इंतजार किया जाएगा।
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