Jamui News | Khaira News | Bihar News: जमुई जिले के खैरा प्रखंड से आस्था, संवेदना और सामाजिक एकजुटता की एक अनोखी तस्वीर सामने आई है। यहां नवडीहा गांव में एक मृत बंदर को भगवान हनुमान का स्वरूप मानते हुए पूरे हिंदू रीति-रिवाज के साथ अंतिम विदाई दी गई। ढोल-बाजे, जय श्रीराम और जय बजरंगबली के जयकारों के बीच निकली इस अनोखी शवयात्रा में सैकड़ों ग्रामीण शामिल हुए। इतना ही नहीं, ग्रामीणों ने बंदर के सम्मान में मृत्यु भोज आयोजित करने का भी फैसला लिया है। यह अनोखी घटना अब पूरे इलाके में चर्चा का विषय बनी हुई है।

पेड़ से गिरने के बाद हुई बंदर की मौत

जानकारी के अनुसार, गुरुवार को नवडीहा गांव के पास एक बंदर अचानक पेड़ से गिर पड़ा। गिरने से उसकी मौके पर ही मौत हो गई। वही घटना की जानकारी मिलते ही आसपास के गांव के लोग बड़ी संख्या में वहां पहुंच गए।

ग्रामीणों ने बंदर को भगवान हनुमान का प्रतीक मानते हुए उसका सम्मानपूर्वक अंतिम संस्कार करने का निर्णय लिया।

बंदर
रास्ते भर लोगों ने किए अंतिम दर्शन

चंदा जुटाकर की गई अंतिम संस्कार की व्यवस्था

गांव के लोगों ने आपस में चंदा एकत्र कर अंतिम संस्कार की पूरी व्यवस्था की। बंदर के शव को फूल-मालाओं से सजाया गया और एक ठेले पर रखकर पूरे सम्मान के साथ शवयात्रा निकाली गई।

ढोल-बाजे और धार्मिक जयकारों के बीच यह शवयात्रा नवडीहा गांव से जमुई-खैरा मुख्य मार्ग तक पहुंची, जहां बड़ी संख्या में ग्रामीण, महिलाएं, बुजुर्ग और युवा शामिल हुए।

रास्ते भर लोगों ने किए अंतिम दर्शन

शवयात्रा के दौरान कई स्थानों पर लोगों ने रुककर बंदर के अंतिम दर्शन किए और पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी। कुछ समय के लिए शव को सड़क किनारे भी रखा गया, जहां श्रद्धालुओं ने श्रद्धा-सुमन अर्पित किए।

इस दौरान कई दुकानदारों ने श्रद्धालुओं के लिए पेयजल की व्यवस्था कर सामाजिक सहयोग का परिचय दिया।

“बंदर हमारे लिए हनुमान जी का स्वरूप”

ग्रामीणों का कहना है कि बंदर उनके लिए केवल एक वन्यजीव नहीं, बल्कि भगवान हनुमान का स्वरूप है। इसलिए उसकी मृत्यु के बाद सम्मानपूर्वक अंतिम संस्कार करना उनका धार्मिक और नैतिक दायित्व है।

ग्रामीण नेपाली गोस्वामी ने कहा कि किसी भी जीव की मृत्यु के बाद उसका सम्मान किया जाना चाहिए। यही हमारी संस्कृति और मानवीय संवेदना की पहचान है।

मृत्यु भोज का भी होगा आयोजन

ग्रामीणों ने बताया कि अंतिम संस्कार के बाद बंदर की स्मृति में मृत्यु भोज का भी आयोजन किया जाएगा, जिसमें गांव के लोग शामिल होंगे।

पूरे इलाके में चर्चा का विषय बनी यह घटना

खैरा प्रखंड के नवडीहा गांव की यह अनोखी शवयात्रा आस्था, मानवीय संवेदना और सामाजिक सहभागिता का एक अनूठा उदाहरण बन गई है। वही इस घटना की चर्चा अब जमुई ही नहीं, बल्कि आसपास के कई क्षेत्रों में भी हो रही है।

Written & Edit by : Chandan Patel.

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