चकाई (जमुई): “शिक्षा ही भविष्य की नींव है” सरकार के इस दावे की सच्चाई जाननी हो तो जमुई जिले के चकाई प्रखंड की पोझा पंचायत स्थित आदिवासी बहुल गोबरदाहा (सरजम बेड़ा) गांव पहुंच जाइए। वही बिहार में शिक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने के बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं, लेकिन जमुई जिले के चकाई प्रखंड की पोझा पंचायत स्थित आदिवासी बहुल गोबरदाहा (सरजम बेड़ा) गांव की तस्वीर इन दावों की हकीकत उजागर करती है। वर्ष 2010 में स्वीकृत नवसृजित प्राथमिक विद्यालय आज तक अपने भवन का इंतजार कर रहा है। करीब 15 वर्षों से मासूम बच्चे कभी पेड़ की छांव तो कभी एक छोटे चबूतरे पर बैठकर पढ़ाई करने को मजबूर हैं। बरसात में किताबें भीग जाती हैं और गर्मी में तेज धूप के बीच पढ़ाई करना उनकी मजबूरी बन गई है। यह स्थिति सरकारी शिक्षा व्यवस्था और विकास के दावों पर गंभीर सवाल खड़े करती है।

15 वर्षों से भवन का इंतजार, खुले आसमान के नीचे चल रही पढ़ाई

गोबरदाहा गांव में संचालित नवसृजित प्राथमिक विद्यालय के पास आज तक अपना भवन नहीं है। विद्यालय की सभी कक्षाएं खुले आसमान के नीचे संचालित होती हैं। कभी बच्चे चबूतरे पर बैठते हैं तो कभी पेड़ की छांव में पढ़ाई करते हैं। मौसम खराब होने पर पढ़ाई पूरी तरह बाधित हो जाती है।

शिक्षा गोबरदाहा गांव में पेड़ के नीचे पढ़ाई करते सरकारी स्कूल के बच्चे
15 साल से बिना भवन के चल रहा गोबरदाहा स्कूल

बारिश और गर्मी दोनों बनीं बच्चों की सबसे बड़ी चुनौती

विद्यालय के बच्चों ने बताया कि बारिश के दौरान उनकी किताबें और कॉपियां भीग जाती हैं, जबकि गर्मी में तेज धूप के कारण लंबे समय तक बैठकर पढ़ाई करना मुश्किल हो जाता है। इससे नियमित कक्षाएं प्रभावित होती हैं और बच्चों की पढ़ाई पर सीधा असर पड़ रहा है।

भाकपा माले नेताओं ने किया विद्यालय का निरीक्षण

शुक्रवार को भाकपा माले नेता मनोज पाड़े और आदिवासी किसान नेता कालू मरांडी गांव पहुंचे। उन्होंने विद्यालय का निरीक्षण किया और बच्चों व ग्रामीणों से बातचीत कर उनकी समस्याएं सुनीं। निरीक्षण के दौरान विद्यालय की बदहाल स्थिति को लेकर उन्होंने चिंता जताई।

बुनियादी सुविधाओं से भी वंचित है पूरा गांव

निरीक्षण के बाद मनोज पाड़े ने कहा कि आजादी के आठ दशक बाद भी गोबरदाहा गांव बुनियादी सुविधाओं से वंचित है। उन्होंने आरोप लगाया कि विद्यालय स्वीकृत होने के बावजूद भवन का निर्माण नहीं कराया गया। गांव तक पहुंचने वाली सड़क बदहाल है, बिजली के पोल लगने के बावजूद नियमित बिजली आपूर्ति नहीं होती और गांव में एक भी प्रधानमंत्री आवास का निर्माण नहीं हुआ है।

सरकार और प्रशासन पर उठे सवाल

ग्रामीणों का कहना है कि कई बार स्थानीय प्रशासन और संबंधित विभाग को विद्यालय भवन निर्माण की मांग से अवगत कराया गया, लेकिन अब तक कोई ठोस पहल नहीं हुई। बच्चों का भविष्य खुले आसमान के भरोसे छोड़ दिया गया है, जबकि शिक्षा को सरकार की प्राथमिकता बताया जाता है।

आंदोलन की चेतावनी

भाकपा माले नेता मनोज पाड़े ने चेतावनी दी कि यदि जल्द विद्यालय भवन निर्माण शुरू नहीं कराया गया तो भाकपा माले के बैनर तले स्कूली बच्चों के साथ चकाई मुख्यालय में सड़क पर कक्षा लगाकर विरोध-प्रदर्शन किया जाएगा। उन्होंने कहा कि यदि ऐसी स्थिति उत्पन्न होती है तो इसकी पूरी जिम्मेदारी जिला प्रशासन की होगी।

मौके पर तालो हेम्ब्रम, बिनय सोरेन, चुड़ा मुर्मू, बैजनाथ हेम्ब्रम समेत बड़ी संख्या में ग्रामीण और स्कूली बच्चे मौजूद थे.

Written & Edit by : Chandan Patel.

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