जमुई: बिहार के जमुई जिले से अंधविश्वास का एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। सिकंदरा थाना क्षेत्र के करमा गांव में सांप के काटने के बाद एक 10 वर्षीय बच्चे को तत्काल अस्पताल ले जाने के बजाय घंटों तक झाड़फूंक कराई गई। इस पूरी घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसने ग्रामीण इलाकों में आज भी व्याप्त अंधविश्वास और स्वास्थ्य जागरूकता की कमी पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। राहत की बात यह रही कि बच्चे की जान बच गई, लेकिन स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि यदि सांप विषैला होता तो यह लापरवाही जानलेवा साबित हो सकती थी।

क्या है पूरा मामला?

जानकारी के अनुसार, गुरुवार देर शाम सिकंदरा थाना क्षेत्र के करमा गांव निवासी कारु मांझी का 10 वर्षीय पुत्र घर के पास खेल रहा था। इसी दौरान उसे सांप ने काट लिया। घटना के बाद परिजन और ग्रामीण बच्चे को अस्पताल ले जाने के बजाय गांव के ओझा-गुणी के पास ले गए, जहां कई घंटों तक झाड़फूंक की जाती रही।

नीम के पत्तों से झाड़फूंक, वीडियो हुआ वायरल

वायरल वीडियो में देखा जा सकता है कि ओझा-गुणी नीम के पत्तों का इस्तेमाल करते हुए गीत गा-गाकर बच्चे की झाड़फूंक कर रहा है। इस दौरान गांव के दर्जनों लोग मौके पर मौजूद रहे और पूरी प्रक्रिया देखते रहे, लेकिन किसी ने बच्चे को तत्काल अस्पताल पहुंचाने की पहल नहीं की।

सांप
झाड़फूंक करते हुए ओझा-गुणी

ग्रामीण बोले- सांप विषैला नहीं था, इसलिए बच गई जान

घटना के दौरान मौजूद कुछ ग्रामीणों का कहना है कि जिस सांप ने बच्चे को काटा था, वह जहरीला नहीं था। इसी वजह से बच्चे की जान बच गई। ग्रामीणों का मानना है कि यदि सांप विषैला होता तो बड़ा हादसा हो सकता था।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने जताई चिंता

स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने इस घटना को बेहद गंभीर बताते हुए कहा कि सांप काटने के बाद झाड़फूंक, टोना-टोटका या घरेलू उपायों पर भरोसा करना मरीज की जान को खतरे में डाल सकता है। ऐसे मामलों में हर मिनट महत्वपूर्ण होता है। इसलिए बिना देरी किए मरीज को नजदीकी अस्पताल पहुंचाकर एंटी-स्नेक वेनम (ASV) सहित आवश्यक चिकित्सकीय उपचार कराना चाहिए।

ग्रामीण क्षेत्रों में अब भी अंधविश्वास बड़ी चुनौती

विशेषज्ञों के अनुसार, ग्रामीण इलाकों में आज भी जागरूकता की कमी के कारण कई परिवार पहले ओझा-गुणी और झाड़फूंक का सहारा लेते हैं। इससे इलाज में देरी होती है और कई मामलों में मरीज की मौत तक हो जाती है। इस घटना में बच्चे की जान केवल इसलिए बच गई क्योंकि सांप विषैला नहीं था।

सांप काटने पर क्या करें?

  • मरीज को बिना घबराए तुरंत नजदीकी अस्पताल ले जाएं।
  • झाड़फूंक, टोना-टोटका या घरेलू नुस्खों पर भरोसा न करें।
  • सांप के काटे गए अंग को अधिक हिलाने-डुलाने से बचाएं।
  • किसी भी प्रकार से जहर चूसने, चीरा लगाने या कसकर रस्सी बांधने की कोशिश न करें।
  • डॉक्टर की सलाह यानी परामर्श के अनुसार ही इलाज कराएं।

करमा गांव की यह घटना बताती है कि वैज्ञानिक सोच और स्वास्थ्य जागरूकता की जरूरत

जमुई के करमा गांव की यह घटना बताती है कि वैज्ञानिक सोच और स्वास्थ्य जागरूकता की आज भी ग्रामीण क्षेत्रों में कितनी जरूरत है। समय पर अस्पताल पहुंचना ही सांप के काटने का सबसे प्रभावी इलाज है। अंधविश्वास पर भरोसा कई बार जिंदगी और मौत के बीच का अंतर बन सकता है।

Written & Edit by : Chandan Patel.

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By Chandan Patel

चंदन पटेल AVN News से लंबे समय से जुड़े पत्रकार हैं। उन्होंने वर्ष 2020 से रिपोर्टर के रूप में पत्रकारिता की शुरुआत की और जमीनी स्तर की खबरों को प्रमुखता से उठाते हुए लगातार अपनी पहचान बनाई। वर्तमान में वे AVN News के एडिटर-इन-चीफ के रूप में समाचार संपादन, कवरेज और डिजिटल पत्रकारिता का नेतृत्व कर रहे हैं। राजनीति, खेल,स्थानीय मुद्दों, जनसमस्याओं, प्रशासनिक गतिविधियों और सामाजिक सरोकारों से जुड़ी खबरों को तथ्यपरक और सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचाना उनकी पत्रकारिता की प्रमुख विशेषता है। उनका उद्देश्य आम लोगों की आवाज को प्रमुखता देना और विश्वसनीय खबरों के माध्यम से समाज को जागरूक करना है।

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