जमुई/गिद्धौर। गिद्धौर रेलवे स्टेशन पर यात्री सुविधाओं की कमी और महत्वपूर्ण ट्रेनों के ठहराव बंद होने का मुद्दा अब एक बार फिर जोर पकड़ने लगा है। आरक्षण काउंटर बहाल करने और प्रमुख ट्रेनों का ठहराव सुनिश्चित करने की मांग को लेकर गिद्धौर में धरना-प्रदर्शन किया गया। प्रदर्शन के दौरान स्थानीय लोगों ने रेलवे और जनप्रतिनिधियों से क्षेत्र की वर्षों पुरानी समस्या का समाधान कराने की मांग की।
गिद्धौर प्रखंड सहित आसपास के ग्रामीण इलाकों के लोगों का कहना है कि रेलवे स्टेशन क्षेत्र की बड़ी आबादी के लिए आवागमन का महत्वपूर्ण साधन है। बावजूद इसके आरक्षण काउंटर नहीं होने और कई महत्वपूर्ण ट्रेनों के ठहराव नहीं होने से यात्रियों को परेशानी उठानी पड़ रही है।
कोरोना काल के बाद बदली स्टेशन की तस्वीर, कई ट्रेनों का ठहराव बंद होने का दावा
स्थानीय लोगों के अनुसार कोरोना काल के दौरान रेलवे परिचालन में हुए बदलाव के बाद गिद्धौर स्टेशन पर कई महत्वपूर्ण ट्रेनों का ठहराव बंद हो गया। लोगों का कहना है कि पहले जिन ट्रेनों से ग्रामीण क्षेत्र के यात्री आसानी से पटना, दिल्ली, हावड़ा, भागलपुर, वाराणसी और दूसरे शहरों की यात्रा कर लेते थे, उनके ठहराव नहीं होने से अब उन्हें दूसरे स्टेशनों का रुख करना पड़ता है।
इसका सबसे ज्यादा असर गरीब, मजदूर, छोटे व्यापारी, विद्यार्थी, नौकरीपेशा लोगों और रोजमर्रा के काम से यात्रा करने वाले लोगों पर पड़ने की बात कही जा रही है।
आरक्षण काउंटर नहीं होने से लोगों की बढ़ रही परेशानी
गिद्धौर रेलवे स्टेशन पर आरक्षण काउंटर बहाल करने की मांग भी लगातार उठ रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि टिकट आरक्षण के लिए उन्हें जमुई या झाझा जैसे स्टेशनों तक जाना पड़ता है।
ग्रामीण क्षेत्र के बुजुर्गों, महिलाओं, विद्यार्थियों और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए यह अतिरिक्त दूरी परेशानी का कारण बनती है। कई लोगों को सिर्फ टिकट आरक्षण कराने के लिए आने-जाने में समय और किराया खर्च करना पड़ता है।
गरीब और मध्यम वर्ग पर पड़ रहा अतिरिक्त आर्थिक बोझ
स्थानीय लोगों के मुताबिक गिद्धौर और आसपास के गांवों में बड़ी संख्या में लोग खेती, मजदूरी, छोटे कारोबार और निजी रोजगार पर निर्भर हैं। ऐसे परिवारों के लिए रेलवे स्टेशन तक पहुंचने के बाद दूसरे स्टेशन जाकर ट्रेन पकड़ना अतिरिक्त खर्च बढ़ाता है।
एक तरफ परिवार को यात्रा का किराया देना पड़ता है, तो दूसरी तरफ दूसरे स्टेशन तक पहुंचने के लिए ऑटो, ई-रिक्शा, बस या निजी वाहन का खर्च भी जुड़ जाता है।
लोगों का कहना है कि यदि गिद्धौर में पर्याप्त ट्रेनों का ठहराव हो और आरक्षण काउंटर फिर से शुरू किया जाए तो हजारों यात्रियों को राहत मिल सकती है।
छात्रों के लिए भी जरूरी है गिद्धौर स्टेशन पर ट्रेनों का ठहराव
इस समस्या का सीधा असर विद्यार्थियों पर भी पड़ रहा है। प्रतियोगी परीक्षाओं, उच्च शिक्षा और नौकरी के सिलसिले में पटना, गया, भागलपुर, वाराणसी, दिल्ली, रांची और अन्य शहरों में जाने वाले छात्रों को कई बार पहले दूसरे स्टेशन तक पहुंचना पड़ता है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि सीमित आर्थिक संसाधनों वाले विद्यार्थियों के लिए यह अतिरिक्त यात्रा खर्च बड़ी समस्या बन जाता है। समय पर ट्रेन नहीं मिलने की स्थिति में उनकी पढ़ाई, परीक्षा और नौकरी से जुड़े कार्यक्रम भी प्रभावित हो सकते हैं।
छोटे व्यापारियों और रोज कमाने-खाने वालों की भी परेशानी
गिद्धौर और आसपास के बाजारों से जुड़े छोटे व्यापारी भी बेहतर रेल कनेक्टिविटी की मांग कर रहे हैं। व्यापारियों के अनुसार दूसरे शहरों से सामान लाने या व्यापारिक काम से बाहर जाने वाले लोगों के लिए सुविधाजनक ट्रेन कनेक्शन बेहद जरूरी है।
वहीं रोजमर्रा के काम के लिए जमुई, झाझा या अन्य शहरों में आने-जाने वाले लोगों का कहना है कि ट्रेन का ठहराव नहीं होने से उन्हें अतिरिक्त समय और पैसा खर्च करना पड़ता है।
सांसद अरुण भारती को सौंपा गया आवेदन
गिद्धौर के निवर्तमान प्रखंड प्रमुख एवं वर्तमान में भाजपा जमुई जिला मंत्री शम्भू कुमार केशरी ने 30 मई 2026 को जमुई लोकसभा क्षेत्र के सांसद अरुण भारती को आवेदन देकर गिद्धौर रेलवे स्टेशन पर आरक्षण काउंटर बहाल करने और महत्वपूर्ण ट्रेनों का ठहराव सुनिश्चित कराने की मांग की थी।
आवेदन में कहा गया कि गिद्धौर क्षेत्र के लोगों को दिल्ली, हावड़ा, पटना, भागलपुर, दरभंगा, वाराणसी और मुंबई सहित विभिन्न शहरों में आने-जाने के लिए जमुई या झाझा स्टेशन जाना पड़ता है। इससे यात्रियों को समय और आर्थिक परेशानी का सामना करना पड़ता है।
आवेदन में क्षेत्र की जनता के हस्ताक्षर और मोबाइल नंबर भी संलग्न किए जाने का उल्लेख है।

किन ट्रेनों के ठहराव की मांग?
आवेदन में गिद्धौर रेलवे स्टेशन पर निम्न ट्रेनों के ठहराव की मांग की गई है :
- झाझा–दानापुर फास्ट पैसेंजर
- साउथ बिहार एक्सप्रेस
- जनशताब्दी एक्सप्रेस
- गोड्डा–रांची एक्सप्रेस
- मिथिला एक्सप्रेस (रक्सौल–हावड़ा)
- मधुपुर–आनंद विहार हमसफर एक्सप्रेस
स्थानीय लोगों की मांग है कि रेलवे यात्रियों की संख्या, क्षेत्र की आबादी और आसपास के प्रखंडों की जरूरतों को देखते हुए गिद्धौर स्टेशन पर इन ट्रेनों के ठहराव की व्यवहार्यता पर गंभीरता से विचार करे।
गिद्धौर का रेल कनेक्शन सिर्फ यात्रियों का नहीं, पूरे क्षेत्र की अर्थव्यवस्था का सवाल
गिद्धौर स्टेशन की समस्या को केवल ट्रेन पकड़ने की सुविधा से जोड़कर देखना पर्याप्त नहीं होगा। बेहतर रेल कनेक्टिविटी का सीधा संबंध स्थानीय बाजार, रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य और छोटे कारोबार से भी है।
किसी मरीज को इलाज के लिए बाहर जाना हो, छात्र को परीक्षा देने जाना हो, व्यापारी को दूसरे शहर जाना हो या मजदूर को रोजगार के लिए बाहर निकलना हो—सुलभ और किफायती परिवहन हर परिवार की जरूरत है।
इसी वजह से स्थानीय लोगों का कहना है कि गिद्धौर रेलवे स्टेशन पर सुविधाओं का विस्तार क्षेत्र के सामाजिक और आर्थिक विकास से भी जुड़ा मुद्दा है।
धरना-प्रदर्शन से रेलवे तक पहुंची जनता की आवाज
गिद्धौर में हुए धरना-प्रदर्शन ने इस मुद्दे को एक बार फिर सार्वजनिक बहस के केंद्र में ला दिया है। प्रदर्शनकारियों ने मांग की कि रेलवे प्रशासन और जनप्रतिनिधि केवल आश्वासन तक सीमित न रहें, बल्कि यात्रियों की वास्तविक समस्याओं का समाधान निकालने के लिए ठोस पहल करें।
धरना प्रदर्शन में शामिल लोग
पूर्व प्रमुख मंडल शम्भु कुमार केसरी (गिद्धौर ) , राजा बाबू (केवाल), दिगम्बर (मौरा) , शिवशंकर तांती (मोहली) , सोनू कुमार (धोगाट),प्रभाकरक कुमार (गिद्धौर), माने रजक (सेवा) , महेंद्रपंडित, मिंटू पासवान,फलदेव पांडे (गिद्धौर.
लोगों की मांग है कि गिद्धौर स्टेशन का निरीक्षण कराकर यात्री सुविधाओं, आरक्षण व्यवस्था और ट्रेनों के ठहराव की स्थिति की समीक्षा की जाए।
अब निगाहें रेलवे और जनप्रतिनिधियों पर
गिद्धौर की जनता ने अपनी मांग जनप्रतिनिधि के माध्यम से रेलवे तक पहुंचाने की कोशिश की है। अब लोगों की नजर इस बात पर है कि रेलवे प्रशासन और संबंधित मंत्रालय इस मांग पर क्या कदम उठाते हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि गिद्धौर रेलवे स्टेशन को बेहतर यात्री सुविधाओं से जोड़ना किसी एक व्यक्ति या संगठन की मांग नहीं, बल्कि आसपास के गांवों और प्रखंडों में रहने वाले हजारों लोगों की रोजमर्रा की जरूरत है।
जनता का सवाल साफ है—अगर गिद्धौर रेलवे स्टेशन पर यात्रियों की जरूरत है, तो आरक्षण काउंटर और जरूरी ट्रेनों के ठहराव के लिए ठोस पहल कब होगी?
गिद्धौर रेलवे स्टेशन से जुड़ी यह मांग गरीब परिवारों की आर्थिक बचत
गिद्धौर रेलवे स्टेशन से जुड़ी यह मांग अब सिर्फ रेलवे सुविधा का मुद्दा नहीं रह गई है। यह गरीब परिवारों की आर्थिक बचत, छात्रों की शिक्षा, व्यापारियों के कारोबार, मजदूरों के रोजगार और आम लोगों की रोजमर्रा की यात्रा से जुड़ा सवाल बन चुकी है।
अब जरूरत है कि संबंधित जनप्रतिनिधि और रेलवे प्रशासन क्षेत्र की मांगों पर गंभीरता से विचार करें और यात्रियों की सुविधा के अनुरूप आवश्यक निर्णय लें।
Written & Edit by : Chandan Patel
Ground Report by: Bikki Kumar

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