गिद्धौर/जमुई। बारिश ने गिद्धौर-जमुई बाईपास सड़क की पोल खोलकर रख दी है। सड़क पर जगह-जगह बने गहरे गड्ढे अब सिर्फ राहगीरों के लिए परेशानी नहीं, बल्कि हादसे का खुला न्योता बन चुके हैं। रोजाना इसी सड़क से प्रखंड और जिला मुख्यालय पहुंचने वाले ग्रामीण सवाल कर रहे हैं—आखिर कब जागेगा शासन और प्रशासन?
लगातार बारिश के बाद सड़क की हालत इतनी खराब हो गई है कि दोपहिया वाहन चालकों को हर कदम संभलकर चलना पड़ रहा है। कई जगह सड़क पर बने गड्ढों में बारिश का पानी जमा होने से उनकी गहराई का अंदाजा लगाना भी मुश्किल हो गया है। ऐसे में जरा सी चूक किसी बड़े हादसे का कारण बन सकती है।
आधा दर्जन से अधिक गांवों का मुख्य रास्ता, फिर भी बदहाल
गिद्धौर-जमुई बाईपास सड़क आसपास के कई गांवों के लोगों के लिए बेहद महत्वपूर्ण संपर्क मार्ग है। निचली महुली, खड़हुआ, कोल्हुआ, कुमरडीह, ललमटिया और कहरडीह समेत कई गांवों के ग्रामीण इसी रास्ते से गिद्धौर प्रखंड मुख्यालय और जमुई जिला मुख्यालय तक पहुंचते हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि सड़क की हालत खराब होने के कारण रोजमर्रा के काम के लिए निकलना भी चुनौती बन गया है। खासकर बच्चों, बुजुर्गों, महिलाओं और दोपहिया वाहन चालकों को सबसे ज्यादा परेशानी हो रही है।
दर्जनों गड्ढे बने हादसे का कारण
स्थानीय ग्रामीणों के मुताबिक सड़क पर छोटे-बड़े दर्जनों गड्ढे बन चुके हैं। बारिश के बाद इन गड्ढों में पानी भर जाता है और सड़क का खतरनाक हिस्सा दिखाई नहीं देता।
ग्रामीणों का आरोप है कि कई बार दोपहिया वाहन चालक गड्ढों में गिरकर चोटिल हो चुके हैं। इसके बावजूद सड़क की मरम्मत को लेकर अब तक कोई ठोस पहल नहीं होने से लोगों में नाराजगी बढ़ती जा रही है।
“सड़क पर चलना है या मौत से मुकाबला करना?”
स्थानीय ग्रामीणों का दर्द सिर्फ खराब सड़क तक सीमित नहीं है। उनका कहना है कि सड़क खराब होने के कारण समय और पैसे दोनों की बर्बादी होती है। वहीं, सबसे बड़ा डर हादसे का रहता है।
ग्रामीण सुभाष राजहंस, जयनारायण राव, रघु सिंह, पप्पू रावत,नबलु मिश्रा, बिमल मिश्रा, संजय कुमार, दीपक कुमार और दिनेश साव ने सड़क की बदहाली पर चिंता जताते हुए कहा कि बारिश के मौसम में स्थिति और भी गंभीर हो गई है।
उनका कहना है कि जब सड़क का इस्तेमाल रोजाना बड़ी संख्या में लोग करते हैं तो इसकी मरम्मत और रखरखाव शासन-प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी होनी चाहिए।
बारिश आई तो विकास की तस्वीर भी सामने आ गई
सरकार और प्रशासन लगातार ग्रामीण इलाकों में सड़क और संपर्क व्यवस्था बेहतर होने का दावा करते हैं, लेकिन बारिश के दौरान जमीनी हकीकत इन दावों पर सवाल खड़े करती नजर आ रही है।
गिद्धौर-जमुई बाईपास सड़क की मौजूदा स्थिति यह सवाल पूछ रही है कि अगर सड़क की मरम्मत समय रहते नहीं की गई तो क्या प्रशासन किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है?
बारिश के मौसम में सड़क पर पानी जमा होना और गड्ढों का बढ़ना किसी भी समय गंभीर दुर्घटना का कारण बन सकता है।

ग्रामीणों की मांग – तुरंत भरे जाएं गड्ढे
ग्रामीणों ने स्थानीय प्रशासन और जिला प्रशासन से मांग की है कि सड़क का तत्काल निरीक्षण कराया जाए और सड़क पर बने गड्ढों को जल्द से जल्द भरवाया जाए।
ग्रामीणों का कहना है कि फिलहाल उन्हें किसी बड़े निर्माण कार्य का इंतजार नहीं है। कम से कम खतरनाक गड्ढों को भरकर सड़क को आवागमन योग्य बनाया जाए, ताकि बारिश के दौरान लोगों की जान जोखिम में न पड़े।
प्रशासन से सवाल: हादसे के बाद होगी कार्रवाई या पहले?
गिद्धौर-जमुई बाईपास सड़क की बदहाली अब सिर्फ विकास का मुद्दा नहीं, बल्कि जनसुरक्षा का सवाल बन चुकी है। रोजाना इस रास्ते से गुजरने वाले लोगों को उम्मीद है कि प्रशासन उनकी परेशानी को गंभीरता से लेगा और जल्द सड़क की मरम्मत कराएगा।
क्योंकि सड़क पर गड्ढे भरना सिर्फ सुविधा का काम नहीं है, बल्कि किसी परिवार के घर का चिराग बुझने से रोकने की जिम्मेदारी भी है।
ग्रामीणों की आवाज साफ है – हमें आश्वासन नहीं, सुरक्षित सड़क चाहिए। अब देखना यह है कि शासन और प्रशासन इस आवाज को कब सुनता है।
Written & Edit by : Chandan Patel
Ground Report by: Bikki Kumar

