नई दिल्ली। मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार को लेकर चुनाव आयोग और विपक्षी दलों के बीच विवाद अब सड़कों से लेकर विधानसभा तक पहुंच गया है। शुक्रवार, 25 सितंबर को कांग्रेस ने देश के कई हिस्सों में प्रदर्शन कर CEC के इस्तीफे या हटाए जाने की मांग की। जम्मू-कश्मीर विधानसभा में कांग्रेस विधायकों ने बैनर और पोस्टर के साथ विरोध जताया, जबकि असम समेत कई जगहों पर प्रदर्शनकारियों और नेताओं को हिरासत में लिए जाने की खबर सामने आई।
इसी बीच उत्तर प्रदेश में ज्ञानेश कुमार के प्रस्तावित दो युवा संवाद कार्यक्रम स्थगित कर दिए गए। हालांकि चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया कि इन कार्यक्रमों को स्थगित करने का फैसला 21 सितंबर को ही लिया गया था और इसका मौजूदा विवाद से कोई संबंध नहीं है।
दूसरी तरफ Cockroach Janta Party (CJP) ने घोषणा की है कि यदि ज्ञानेश कुमार शनिवार, 26 सितंबर तक इस्तीफा नहीं देते हैं तो 2 अक्टूबर यानी गांधी जयंती से मुंबई से देशव्यापी आंदोलन शुरू किया जाएगा।
इस पूरे विवाद के केंद्र में Special Intensive Revision (SIR), मतदाता सूची में बदलाव और चुनाव आयोग के भीतर कथित मतभेदों से जुड़ी रिपोर्टें हैं।
मेरठ और वाराणसी के कार्यक्रम स्थगित
चुनाव आयोग ने उत्तर प्रदेश में प्रस्तावित दो Electoral Literacy Club यानी ELC 2.0 कार्यक्रम स्थगित कर दिए हैं।
मेरठ में 25 सितंबर को क्षेत्रीय ELC सम्मेलन और युवाओं के साथ संवाद प्रस्तावित था। इसमें पश्चिमी उत्तर प्रदेश के स्कूलों, कॉलेजों और विश्वविद्यालयों के विद्यार्थियों एवं शिक्षकों को चुनाव प्रक्रिया, मतदाता पंजीकरण, मतदान तथा ECINET से संबंधित जानकारी दी जानी थी।
वहीं वाराणसी में 28 सितंबर को Gen-Z और युवा मतदाताओं के साथ संवाद का कार्यक्रम निर्धारित था।
पटना में CEC ज्ञानेश कुमार को हटाने की मांग को लेकर कांग्रेस कार्यकर्ताओं का प्रदर्शन। pic.twitter.com/QeHzenRNTF
— Lutyens Media (@LutyensMediaIN) September 25, 2026
चुनाव आयोग के एक अधिकारी के मुताबिक दोनों कार्यक्रमों को स्थगित करने का फैसला 21 सितंबर को लिया गया था। अधिकारी ने कहा कि कार्यक्रमों की तारीखों में बदलाव सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया का हिस्सा है और इसके पीछे स्थल की उपलब्धता, वरिष्ठ अधिकारियों के कार्यक्रम तथा प्राकृतिक परिस्थितियों जैसे कारण हो सकते हैं। आयोग ने हिमाचल प्रदेश, लद्दाख और उत्तराखंड में भी ऐसे कार्यक्रमों के पुनर्निर्धारण का उदाहरण दिया।
चुनाव आयोग के भीतर मतभेदों की रिपोर्ट से बढ़ा विवाद
CEC ज्ञानेश कुमार को लेकर राजनीतिक विवाद उस समय और तेज हुआ जब इंडियन एक्सप्रेस की एक जांच रिपोर्ट में दावा किया गया कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में कम से कम 14 बार चुनाव आयोग के कुछ फैसलों और प्रक्रियाओं पर लिखित आपत्ति दर्ज कराई।
रिपोर्ट के अनुसार इन आपत्तियों का संबंध नए मतदाताओं के पंजीकरण, मतदाता नाम हटाने और बहाल करने, Form-6 में बदलाव तथा चुनावी डेटा और सॉफ्टवेयर के नियंत्रण जैसे मुद्दों से था।
हालांकि चुनाव आयोग ने इन मतभेदों को किसी संस्थागत संकट के रूप में स्वीकार नहीं किया। आयोग का कहना है कि बहु-सदस्यीय संस्था में अलग-अलग विचार, लिखित टिप्पणियां, तकनीकी सुझाव और आंतरिक जांच-परख सामान्य निर्णय प्रक्रिया का हिस्सा हैं तथा आयोग के फैसले वैधानिक प्रक्रिया के अनुसार लिए जाते हैं।
SIR बना विवाद का सबसे बड़ा मुद्दा
Special Intensive Revision यानी SIR मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण की प्रक्रिया है। चुनाव आयोग का उद्देश्य मतदाता सूची को अपडेट करना और अपात्र, मृत या डुप्लीकेट नामों की पहचान करना है।
लेकिन विपक्षी दलों का आरोप है कि इस प्रक्रिया में पात्र मतदाताओं के नाम प्रभावित होने का खतरा पैदा हुआ है। इसी को लेकर कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल चुनाव आयोग से पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग कर रहे हैं।
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक SIR से जुड़े मुद्दों पर आयोग के दो चुनाव आयुक्तों ने भी आपत्तियां दर्ज की थीं। रिपोर्ट में Form-6 में किए गए बदलाव और मतदाता डेटा तक पहुंच के केंद्रीकरण को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं।
यह ध्यान रखना जरूरी है कि इन रिपोर्टों में उठाए गए आरोपों और राजनीतिक दावों को चुनाव आयोग ने अपने संस्थागत पक्ष के साथ अलग तरीके से देखा है।
दिल्ली के जंतर-मंतर पर भी प्रदर्शन
CEC के खिलाफ दिल्ली के जंतर-मंतर पर भी विरोध प्रदर्शन हुआ। विभिन्न नागरिक और राजनीतिक समूहों से जुड़े लोग चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली तथा SIR को लेकर अपनी आपत्तियां दर्ज कराने पहुंचे।
प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने बैरिकेडिंग की और कुछ नेताओं एवं कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिए जाने की खबर सामने आई।
इस विरोध में सामाजिक कार्यकर्ता योगेंद्र यादव और अन्य लोगों के शामिल होने की रिपोर्टें भी सामने आई हैं।

कांग्रेस का कई राज्यों में प्रदर्शन
25 सितंबर को कांग्रेस ने कई राज्यों में CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रदर्शन किया।
दिल्ली, बिहार, पश्चिम बंगाल, असम, उत्तराखंड, जम्मू-कश्मीर और अन्य स्थानों पर कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन कर चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और SIR को लेकर सवाल उठाए। कांग्रेस की मांग है कि चुनाव प्रक्रिया से जुड़े विवादों की समीक्षा की जाए और ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कार्रवाई की जाए।
असम में प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई को हिरासत में लिए जाने की खबर भी सामने आई।

लखनऊ में राजेंद्र पाल गौतम भी प्रदर्शन में शामिल
लखनऊ में हुए कांग्रेस के प्रदर्शन में पूर्व दिल्ली मंत्री और कांग्रेस नेता राजेंद्र पाल गौतम भी शामिल हुए। उन्होंने CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए।
उनके बयान राजनीतिक विरोध के संदर्भ में दिए गए थे और उन्होंने चुनाव प्रक्रिया से जुड़े विवादों पर जिम्मेदारी तय करने की मांग की।
जम्मू-कश्मीर विधानसभा में कांग्रेस विधायकों का हंगामा
CEC को लेकर विवाद की गूंज जम्मू-कश्मीर विधानसभा तक पहुंच गई।
शुक्रवार को कांग्रेस विधायकों ने सदन में ज्ञानेश कुमार के खिलाफ बैनर और पोस्टर प्रदर्शित किए तथा नारे लगाए। कांग्रेस सदस्यों ने CEC के इस्तीफे और कार्रवाई की मांग की।
रिपोर्टों के मुताबिक विधायक सदन के वेल की ओर जाने की कोशिश भी कर रहे थे। विधानसभा अध्यक्ष अब्दुल रहीम राठर ने सदस्यों से अपनी सीटों पर लौटने को कहा और स्पष्ट किया कि विधानसभा के पास चुनाव आयोग के प्रमुख को हटाने का अधिकार नहीं है। इसके बाद कांग्रेस सदस्य अपनी सीटों पर लौटे और सदन की कार्यवाही आगे बढ़ी।
आज जम्मू-कश्मीर विधानसभा में कांग्रेस विधायकों ने काले झंडे दिखाकर विरोध प्रदर्शन किया और CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की। pic.twitter.com/37xzGZhKis
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CJP का 2 अक्टूबर से देशव्यापी आंदोलन का ऐलान
विवाद को नया राजनीतिक आयाम Cockroach Janta Party (CJP) की घोषणा से मिला है।
CJP के संस्थापक अभिजीत दिपके ने कहा है कि यदि ज्ञानेश कुमार 26 सितंबर तक इस्तीफा नहीं देते हैं तो संगठन 2 अक्टूबर, गांधी जयंती के दिन मुंबई से देशव्यापी विरोध आंदोलन शुरू करेगा और इसे अन्य शहरों तक ले जाएगा।
CJP ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और मतदाता सूची से जुड़े कई आरोप लगाए हैं। हालांकि इन आरोपों को संबंधित पक्षों के दावों के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
विपक्ष संसद में भी उठा सकता है हटाने का मुद्दा
विवाद सिर्फ सड़कों तक सीमित नहीं है। इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक विपक्षी दल संसद में CEC ज्ञानेश कुमार को हटाने के लिए प्रस्ताव लाने की तैयारी पर भी विचार कर रहे हैं। कांग्रेस के एक सूत्र ने कहा था कि इस संबंध में कानूनी विशेषज्ञों के साथ प्रक्रिया पर काम किया जा रहा है।
इससे संकेत मिलता है कि विवाद आने वाले दिनों में संसद और संवैधानिक संस्थाओं के स्तर पर भी आगे बढ़ सकता है।
ज्ञानेश कुमार विवाद में अब तीन बड़े सवाल
फिलहाल पूरे घटनाक्रम में तीन प्रमुख मुद्दे सामने हैं :
पहला, SIR और मतदाता सूची में बदलाव को लेकर विपक्ष के सवाल।
दूसरा, चुनाव आयोग के भीतर दो चुनाव आयुक्तों द्वारा दर्ज की गई कथित आपत्तियों को लेकर उठे सवाल।
तीसरा, CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर विपक्षी दलों और विभिन्न संगठनों का बढ़ता विरोध।
चुनाव आयोग दूसरी ओर यह स्पष्ट कर चुका है कि आंतरिक मतभेद या अलग-अलग राय संस्थागत निर्णय प्रक्रिया का हिस्सा हो सकती हैं और उसके निर्णय वैधानिक प्रक्रिया के तहत लिए जाते हैं।
25 सितंबर 2026 तक क्या है स्थिति?
25 सितंबर की स्थिति में CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर कांग्रेस और अन्य समूहों का विरोध जारी है। उत्तर प्रदेश में उनके दो युवा संवाद कार्यक्रम स्थगित किए जा चुके हैं, हालांकि आयोग ने इसे विवाद से जोड़ने से इनकार किया है।
वहीं CJP ने 26 सितंबर तक इस्तीफा नहीं होने की स्थिति में 2 अक्टूबर से मुंबई से देशव्यापी आंदोलन शुरू करने का ऐलान किया है।
अब नजर इस बात पर है कि CEC ज्ञानेश कुमार, चुनाव आयोग और विपक्ष के बीच बढ़ता यह टकराव आने वाले दिनों में किस दिशा में जाता है और SIR से जुड़े सवालों पर संस्थागत स्तर पर क्या स्पष्टीकरण सामने आता है।
Written & Edit by : Chandan Patel
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