नई दिल्ली: देशभर में छात्रों के आंदोलन, शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे और पेपर लीक विवाद के बाद आज संसद में एक ऐसा दिन है जिस पर करोड़ों छात्रों, अभिभावकों और शिक्षा जगत की नजरें टिकी हुई हैं। लोकसभा में लोक परीक्षा (अनुचित साधन निवारण) संशोधन विधेयक पर करीब छह घंटे चर्चा होगी। सरकार इसे परीक्षा व्यवस्था में बड़ा सुधार बता रही है, जबकि विपक्ष छात्रों पर कथित पुलिस कार्रवाई और सरकार की जवाबदेही को प्रमुख मुद्दा बना रहा है।
मनीष तिवारी का स्थगन प्रस्ताव, छात्र प्रदर्शन पर चर्चा की मांग
कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने लोकसभा में स्थगन प्रस्ताव का नोटिस देकर 20 जुलाई 2026 को संसद मार्च के दौरान हुए छात्र प्रदर्शन पर चर्चा कराने की मांग की है।
अपने नोटिस में उन्होंने आरोप लगाया कि निहत्थे छात्र प्रदर्शनकारियों पर रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) द्वारा कथित रूप से पेलेट गन का इस्तेमाल किया गया, जिसमें 80 से अधिक लोग घायल हुए। कांग्रेस का कहना है कि इस पूरे घटनाक्रम पर संसद में विस्तृत चर्चा होनी चाहिए और जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए।

36 दिन के आंदोलन के बाद सरकार बैकफुट पर, सुधारों का ऐलान
पेपर लीक के खिलाफ चले 36 दिनों के आंदोलन ने देश की राजनीति और शिक्षा व्यवस्था दोनों को प्रभावित किया। लगातार बढ़ते दबाव के बीच केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफा देना पड़ा।
इसके बाद केंद्र सरकार ने परीक्षा प्रणाली में सुधार के लिए कई अहम फैसलों का ऐलान किया। सरकार ने नंदन निलेकणि की अध्यक्षता में एक टास्क फोर्स गठित की है, जिसका उद्देश्य परीक्षा प्रणाली को अधिक पारदर्शी और सुरक्षित बनाना है।
सरकार का दावा है कि भविष्य में पेपर लीक जैसी घटनाओं को रोकने के लिए तकनीकी और प्रशासनिक स्तर पर व्यापक बदलाव किए जा रहे हैं।
प्रधानमंत्री मोदी ने छात्रों से किया था सीधा संवाद
20 जुलाई को संसद मार्च के दौरान छात्रों और पुलिस के बीच हुए टकराव के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इंस्टाग्राम वीडियो के माध्यम से छात्रों से संवाद किया था।
उन्होंने युवाओं को “फ्रेंड्स” कहकर संबोधित करते हुए भरोसा दिलाया कि सरकार उनकी चिंताओं को गंभीरता से समझती है और परीक्षा व्यवस्था को निष्पक्ष बनाने के लिए हरसंभव कदम उठाए जाएंगे।
छात्रों पर पुलिस कार्रवाई को लेकर संसद में हंगामा
सोमवार को संसद का मानसून सत्र विपक्ष के भारी हंगामे की भेंट चढ़ गया।
लोकसभा और राज्यसभा दोनों में विपक्ष ने छात्र प्रदर्शन के दौरान पुलिस द्वारा बल प्रयोग का मुद्दा उठाया। कांग्रेस समेत कई विपक्षी दलों ने प्रधानमंत्री से माफी और केंद्रीय गृह मंत्री के बयान की मांग की। विपक्ष का कहना था कि पहले इस मुद्दे पर चर्चा हो, उसके बाद ही अन्य कार्यवाही चले।
आज सदन में युवा सांसदों से लेकर बड़े नेताओं तक की परीक्षा
आज होने वाली बहस के लिए सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों ने पूरी तैयारी कर ली है।
एनडीए की ओर से:
बांसुरी स्वराज
सायोनी घोष
इन युवा सांसदों को सरकार का पक्ष मजबूती से रखने की जिम्मेदारी दी गई है।
विपक्ष की ओर से:
राहुल गांधी
अखिलेश यादव
महुआ मोइत्रा
सरकार को शिक्षा व्यवस्था, पेपर लीक और छात्र आंदोलन के मुद्दों पर घेरने की रणनीति तैयार की गई है।
ओम बिरला की पहल से टूटा संसद का गतिरोध
सोमवार को दिनभर हंगामे के बाद लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने सभी दलों के नेताओं के साथ बैठक कर बीच का रास्ता निकाला।
इसके बाद सरकार और विपक्ष इस बात पर सहमत हुए कि मंगलवार को विधेयक पर विस्तृत चर्चा होगी और चर्चा समाप्त होने के बाद मतदान कराया जाएगा।
इससे पहले केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने विपक्ष के विरोध के बीच विधेयक लोकसभा में पेश किया था। विपक्ष ने 92 संशोधन प्रस्ताव दिए थे, लेकिन चर्चा शुरू नहीं हो सकी थी।
आज की चर्चा क्यों है बेहद महत्वपूर्ण?
यह बहस केवल एक विधेयक तक सीमित नहीं है। इसके जरिए यह तय होगा कि देश की परीक्षा प्रणाली को अधिक पारदर्शी और सुरक्षित बनाने के लिए सरकार किन सुधारों पर आगे बढ़ेगी।
साथ ही छात्र आंदोलन, पुलिस कार्रवाई और सरकार की जवाबदेही जैसे राजनीतिक मुद्दों पर भी संसद में तीखी बहस देखने को मिल सकती है।
आज संसद में होने वाली चर्चा देश की शिक्षा व्यवस्था के भविष्य की दिशा तय
आज संसद में होने वाली चर्चा देश की शिक्षा व्यवस्था के भविष्य की दिशा तय करने वाली मानी जा रही है। एक ओर सरकार परीक्षा सुधारों को अपनी प्राथमिकता बता रही है, वहीं विपक्ष छात्र आंदोलन और पुलिस कार्रवाई के मुद्दे पर सरकार को घेरने की तैयारी में है। ऐसे में पूरे देश की निगाहें संसद की कार्यवाही और इस विधेयक के अंतिम स्वरूप पर टिकी हैं।

Written & Edit by : Chandan Patel.
