गिद्धौर (जमुई): बिहार की स्वास्थ्य व्यवस्था को बेहतर बनाने के बड़े-बड़े दावों के बीच गिद्धौर का दिग्विजय सिंह सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र एक बार फिर अपनी बदहाल व्यवस्था को लेकर चर्चा में है। रविवार शाम बज्रपात से गंभीर रूप से घायल महिला को जब परिजन इलाज के लिए अस्पताल लेकर पहुंचे तो वहां का नजारा देखकर उनके होश उड़ गए। परिजनों का आरोप है कि अस्पताल में न कोई चिकित्सक मौजूद था, न कोई नर्स और न ही कोई स्वास्थ्यकर्मी। न ही लाइट की व्यवस्था और जनरेटर तो बस नाम मात्र की है और इतना ही नहीं, गंभीर मरीज को दूसरे अस्पताल भेजने के लिए एंबुलेंस तक उपलब्ध नहीं कराई गई। मजबूर होकर परिजनों को निजी वाहन से घायल महिला को जमुई सदर अस्पताल ले जाना पड़ा।
यह घटना एक बार फिर सवाल खड़े कर रही है कि आखिर कब तक सरकारी अस्पतालों की लापरवाही का खामियाजा गरीब और बेबस मरीज भुगतते रहेंगे?
बज्रपात से गंभीर रूप से घायल हुई महिला
जानकारी के अनुसार, मौरा गांव निवासी विनोद यादव की पत्नी ललिता देवी रविवार शाम बज्रपात की चपेट में आकर गंभीर रूप से घायल हो गईं। परिजन उन्हें आनन-फानन में इलाज के लिए गिद्धौर के दिग्विजय सिंह सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र लेकर पहुंचे।
अस्पताल पहुंचते ही दिखी बदहाल व्यवस्था
घायल महिला के परिजनों का आरोप है कि अस्पताल पहुंचने पर वहां कोई चिकित्सक ड्यूटी पर मौजूद नहीं था। नर्स और अन्य स्वास्थ्यकर्मी भी नजर नहीं आए। काफी देर तक इधर-उधर तलाश करने के बावजूद कोई जिम्मेदार व्यक्ति मरीज को देखने नहीं पहुंचा।
परिजनों का कहना है कि अस्पताल की यह स्थिति बेहद शर्मनाक है। जब सबसे ज्यादा जरूरत होती है, तब अस्पताल खुद बीमार नजर आता है।
एंबुलेंस भी नहीं मिली, निजी वाहन से जमुई ले गए मरीज
परिजनों ने बताया कि घायल महिला की हालत गंभीर थी, लेकिन अस्पताल में एंबुलेंस की भी कोई व्यवस्था नहीं मिली। समय पर इलाज नहीं मिलने की आशंका के बीच उन्होंने निजी वाहन की व्यवस्था की और महिला को इलाज के लिए जमुई सदर अस्पताल लेकर रवाना हुए।

परिजनों ने अस्पताल में किया हंगामा
अस्पताल की लचर व्यवस्था और कर्मचारियों की अनुपस्थिति से नाराज परिजनों ने अस्पताल परिसर में जमकर हंगामा किया। उनका कहना था कि यदि समय पर डॉक्टर और एंबुलेंस मिल जाती तो मरीज को बेहतर और तत्काल इलाज मिल सकता था। और उनका कहना है कि अस्पताल में लाइट भी नहीं था और जनरेटर भी चालू नहीं किया गया जब कर्मचारी को लाइट चालू करने को कहा तो कहना है कि जनरेटर खराब है।
पहले भी कई बार विवादों में रह चुका है गिद्धौर का यह अस्पताल
यह पहली बार नहीं है जब गिद्धौर का दिग्विजय सिंह सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र सवालों के घेरे में आया हो। इससे पहले भी डॉक्टरों की अनुपस्थिति, स्वास्थ्यकर्मियों की लापरवाही, मरीजों को समय पर इलाज नहीं मिलने और एंबुलेंस की कमी जैसी शिकायतें लगातार सामने आती रही हैं।
हर बार जांच और कार्रवाई की बात होती है, लेकिन मामला कुछ दिनों बाद ठंडे बस्ते में चला जाता है। कार्रवाई के नाम पर केवल स्पष्टीकरण पत्र जारी कर औपचारिकता पूरी कर दी जाती है।
जनप्रतिनिधियों की चुप्पी पर भी उठ रहे सवाल
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जिस क्षेत्र का प्रतिनिधित्व परिवहन मंत्री दामोदर रावत करते हैं और जमुई विधायक व खेल मंत्री श्रेयसी सिंह और उनका घर गिद्धौर में ही है और इस क्षेत्र का यह प्रमुख सरकारी अस्पताल लगातार बदहाल व्यवस्था का शिकार बना हुआ है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि अस्पताल का नाम श्रेयसी सिंह के पिता स्वर्गीय दिग्विजय सिंह के नाम पर है, लेकिन इसके बावजूद अस्पताल की हालत सुधारने की दिशा में ठोस पहल नहीं दिखाई दे रही है।
कब सुधरेगी स्वास्थ्य व्यवस्था?
लगातार सामने आ रही घटनाएं यह बताने के लिए काफी हैं कि गिद्धौर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में केवल भवन होने से स्वास्थ्य सेवा नहीं चलती। जरूरत है जिम्मेदार डॉक्टरों की मौजूदगी, पर्याप्त स्वास्थ्यकर्मियों, 24 घंटे एंबुलेंस सेवा और जवाबदेही तय करने की।
अगर समय रहते स्वास्थ्य विभाग ने गंभीर कदम नहीं उठाए तो किसी दिन यह लापरवाही किसी बड़ी अनहोनी का कारण बन सकती है।
Written & Edit by : Chandan Patel.
Reported by: Bikki Kumar.
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