रोहतास, बिहार | AVN News | रोहतास जिले के नोखा प्रखंड की चनकी पंचायत के इटवा गांव में भूमि सर्वेक्षण (भूमि गणना) को लेकर ग्रामीणों में भारी नाराजगी है। ग्रामीणों का आरोप है कि राजस्व कर्मचारियों ने ऐसे समय में भूमि गणना का कार्यक्रम तय किया है, जब पूरा इलाका बाढ़ और बरसाती पानी से घिरा हुआ है। खेतों में कहीं घुटने तक तो कहीं कमर तक पानी भरा है, वहीं दूसरी ओर धान की रोपनी का भी महत्वपूर्ण समय चल रहा है।
ग्रामीणों का कहना है कि इस परिस्थिति में खेतों तक पहुंचना ही मुश्किल है, लेकिन इसके बावजूद कर्मचारियों ने सभी दस्तावेज लेकर खेत और प्लॉट पर पहुंचने का निर्देश दिया है।
एक दिन पहले दी सूचना, अगले दिन सुबह खेत पहुंचने का आदेश
ग्रामीणों के अनुसार, राजस्व कर्मचारियों ने 9 जुलाई की दोपहर करीब 2 बजे सूचना दी कि सभी लोग अपने भूमि संबंधी दस्तावेज तैयार रखें और 10 जुलाई की सुबह 6:30 बजे अपने-अपने खेत एवं प्लॉट पर उपस्थित हों, जहां भूमि गणना की जाएगी।
ग्रामीणों का कहना है कि पहले से कोई सूचना नहीं दी गई थी। अचानक आदेश मिलने से लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
बाढ़ के बीच खेतों तक पहुंचना बना चुनौती
इटवा गांव और आसपास के इलाकों में काओ नदी का जलस्तर बढ़ने से बाढ़ जैसी स्थिति बनी हुई है। खेतों में पानी भर जाने के कारण आवागमन प्रभावित है। कई जगहों पर कमर तक पानी जमा है, जबकि कुछ खेतों में घुटनों तक पानी भरा हुआ है।
ऐसी स्थिति में दस्तावेज लेकर खेतों तक पहुंचना ग्रामीणों के लिए जोखिम भरा और कठिन कार्य बन गया है।

रोपनी का समय, किसान पहले ही व्यस्त
ग्रामीणों का कहना है कि यह धान की रोपनी का सबसे महत्वपूर्ण समय है। किसान पूरे दिन खेती-किसानी में लगे हुए हैं। ऐसे समय में भूमि गणना के लिए खेतों पर बुलाना उनकी खेती और दैनिक कार्यों को प्रभावित कर रहा है।
ग्रामीणों का मानना है कि प्रशासन यदि मौसम और स्थानीय परिस्थितियों को ध्यान में रखकर सर्वेक्षण की तिथि तय करता तो लोगों को इतनी परेशानी नहीं होती।
ग्रामीणों ने क्या कहा
ग्रामीण शिव कुमार सिंह, जगरनाथ सिंह, विजेंद्र कुमार सिंह और लाल बाबू सिंह सहित कई लोगों ने बताया कि वर्तमान हालात में खेतों तक पहुंचना बेहद मुश्किल है। उनका कहना है कि प्रशासन को पहले बाढ़ की स्थिति सामान्य होने का इंतजार करना चाहिए था और उसके बाद भूमि गणना करानी चाहिए थी।
प्रशासन से मांग
ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि बाढ़ और रोपनी के मौसम को देखते हुए भूमि गणना की प्रक्रिया को कुछ दिनों के लिए स्थगित किया जाए या फिर ऐसी वैकल्पिक व्यवस्था बनाई जाए जिससे किसानों और आम लोगों को अनावश्यक परेशानी का सामना न करना पड़े।
Written & Edit by : Chandan Patel.
