खैरा के केंडीह पंचायत में शिक्षा की अनोखी पहल
जमुई जिले के खैरा प्रखंड अंतर्गत केंडीह पंचायत के टोला सेवक जयकांत मांझी आज शिक्षा के क्षेत्र में एक प्रेरणादायक उदाहरण बन चुके हैं। महादलित समाज के बच्चों को शिक्षा से जोड़ने के उनके प्रयास की चर्चा अब पूरे जिले में हो रही है। शुक्रवार शाम करीब 6 बजे जमुई के सांसद अरुण भारती स्वयं उनके घर पहुंचे और उन्हें 11 हजार रुपये की सहयोग राशि देकर सम्मानित किया।
सांसद अरुण भारती ने जयकांत मांझी के कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि समाज में ऐसे लोगों की वजह से गांव-गांव तक शिक्षा का प्रकाश पहुंच रहा है। उन्होंने कहा कि शिक्षा ही समाज को आगे बढ़ाने का सबसे बड़ा माध्यम है और जयकांत मांझी जैसे लोग समाज में सकारात्मक बदलाव ला रहे हैं।

ई-रिक्शा से बच्चों को स्कूल पहुंचाने का अनोखा अभियान
जयकांत मांझी उत्क्रमित मध्य विद्यालय केंडीह से टैग महादलित प्राइमरी स्कूल में टोला सेवक के रूप में कार्यरत हैं। वे प्रतिदिन अपने ई-रिक्शा से करीब 80 बच्चों को घर से स्कूल और स्कूल से वापस घर तक पहुंचाते हैं बच्चों को।
सुबह-सुबह वे गांव के अलग-अलग टोले में जाकर बच्चों को आवाज लगाते हैं, कई बच्चों को तैयार करवाते हैं और फिर उन्हें स्कूल लेकर जाते हैं। गांव के लोगों का कहना है कि जिस तरह निजी स्कूलों की गाड़ियां बच्चों को लेने पहुंचती हैं, उसी तरह अब केंडीह गांव में जयकांत मांझी का ई-रिक्शा शिक्षा की नई पहचान बन चुका है।
गरीबी और संघर्ष से निकली प्रेरणादायक कहानी
जयकांत मांझी ने बताया कि उन्होंने खुद गरीबी और अभाव में रहकर अपनी पढ़ाई पूरी की है। आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण उन्हें बचपन में मजदूरी तक करनी पड़ी थी। कठिन परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने पढ़ाई जारी रखी और आज वही संघर्ष उन्हें समाज के बच्चों के लिए कुछ अलग करने की प्रेरणा देता है।
उन्होंने कहा कि जब तक समाज के सभी बच्चों को विद्यालय से नहीं जोड़ देंगे, तब तक वे हार नहीं मानेंगे।
बाइक से शुरू हुआ सफर, अब शिक्षा का बना सहारा
जयकांत मांझी ने बताया कि शुरुआत में वे बच्चों को अपनी बाइक से स्कूल पहुंचाते थे, लेकिन एक बार में सीमित बच्चों को ही ले जाना संभव था। इसके बाद उन्होंने अपनी कमाई और बचत से ई-रिक्शा खरीदा और उसे पूरी तरह बच्चों की शिक्षा के लिए ही समर्पित कर दिया है।
बारिश, गर्मी या ठंड—हर मौसम में उनका यह अभियान लगातार जारी रहता है। उनके इस प्रयास का असर अब पूरे इलाके में दिखाई देने लगा है। पहले जो बच्चे स्कूल नहीं जाते थे, वे अब नियमित रूप से पढ़ाई करने पहुंच रहे हैं।
महादलित समाज के करीब 100 बच्चे शिक्षा से जुड़े
जयकांत मांझी के प्रयास से महादलित मांझी समाज के करीब सौ बच्चे शिक्षा से जुड़ चुके हैं। विद्यालय की शिक्षिका खुशी राज ने बताया है कि बच्चों की उपस्थिति में काफी सुधार हुआ है और अब बच्चे बहुत उत्साह के साथ पढ़ाई कर रहे हैं।
वहीं विद्यालय प्रधान शिवेंदु कुमार ने कहा कि स्कूल परिवार की ओर से बच्चों के लिए यूनिफॉर्म की व्यवस्था भी की गई है, ताकि कोई बच्चा खुद को अलग महसूस न करे।
गांव में शिक्षा के प्रति बढ़ी नई जागरूकता
गांव के लोगों का मानना है कि जयकांत मांझी ने सिर्फ बच्चों को स्कूल पहुंचाने का काम नहीं किया है, बल्कि पूरे समाज में शिक्षा के प्रति नई जागरूकता पैदा की है। उनका यह प्रयास साबित करता है कि बदलाव किसी बड़े मंच से नहीं, बल्कि गांव की छोटी गलियों से भी शुरू हो सकता है।
आज केंडीह पंचायत में शिक्षा की जो नई अलख जगी है, उसमें जयकांत मांझी की मेहनत और समर्पण की बड़ी भूमिका मानी जा रही है।
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Ground Reporte by: Bikki Kumar
Edited and Written by : Chandan Patel.
