गिद्धौर (जमुई): गिद्धौर दुर्गा मंदिर के सामने उलाई नदी पर बना पुल इन दिनों गंभीर संकट का सामना कर रहा है। वर्षों से बालू से लदे ओवरलोड ट्रकों और भारी वाहनों के लगातार आवागमन के कारण पुल की स्थिति दिन-प्रतिदिन खराब होती जा रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते प्रशासन ने इस दिशा में ठोस कदम नहीं उठाया तो यह पुल कभी भी बड़ी दुर्घटना का कारण बन सकता है।

उलाई नदी का पुल बना दर्जनों गांवों की जीवनरेखा

उलाई नदी पर बना यह पुल केवल एक आवागमन का साधन नहीं, बल्कि क्षेत्र के हजारों लोगों की जीवनरेखा है। मौरा, बंधोरा, धोबघट, मांगोबंदर, निजुआरा, बाघाखांड, हरदीमोह समेत दर्जनों गांवों के लोग प्रतिदिन इसी पुल के माध्यम से गिद्धौर बाजार, अस्पताल, स्कूल, कॉलेज और सरकारी कार्यालयों तक पहुंचते हैं।

ग्रामीणों का कहना है कि पुल की स्थिति लगातार कमजोर होती जा रही है, लेकिन इसके संरक्षण और सुरक्षा की दिशा में कोई ठोस पहल नहीं की जा रही है।

बालू लदे ओवरलोड ट्रकों से बढ़ा दबाव

स्थानीय लोगों के अनुसार, प्रतिदिन सैकड़ों बालू लदे ट्रक और भारी वाहन इस पुल से गुजरते हैं। कई बार ट्रक पुल पर घंटों तक खड़े रहते हैं, जिससे पुल पर अत्यधिक भार पड़ता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी पुल की भार क्षमता सीमित होती है। लगातार ओवरलोड वाहनों के दबाव से पुल की संरचना कमजोर होने लगती है और समय के साथ दुर्घटना की आशंका बढ़ जाती है।

गिद्धौर
ओवरलोड बालू ट्रकों के पुल पर जाते हुए फोटो

पुल की जर्जर स्थिति से ग्रामीणों में भय

ग्रामीणों का कहना है कि पुल के कई हिस्सों में दरारें और क्षति के संकेत दिखाई देने लगे हैं। लोगों को डर है कि यदि समय रहते इसकी जांच और मरम्मत नहीं कराई गई तो आने वाले दिनों में बड़ी दुर्घटना हो सकती है।

स्थानीय नागरिकों ने बताया कि बारिश के मौसम में स्थिति और भी गंभीर हो सकती है, क्योंकि नदी में जलस्तर बढ़ने के साथ पुल पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है।

वैकल्पिक मार्ग की मांग तेज

ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि बालू लदे ट्रकों और अन्य भारी वाहनों के लिए अलग वैकल्पिक मार्ग निर्धारित किया जाए। उनका कहना है कि यदि भारी वाहनों का दबाव कम किया जाए तो पुल की उम्र बढ़ सकती है और हजारों लोगों की आवाजाही सुरक्षित रह सकती है।

लोगों का कहना है कि विकास के नाम पर यदि गांवों की जीवनरेखा ही खतरे में पड़ जाए तो यह पूरे क्षेत्र के लिए चिंता का विषय है।

पुल क्षतिग्रस्त हुआ तो टूट जाएगा गांवों का संपर्क

यदि किसी कारणवश पुल क्षतिग्रस्त होता है या आवागमन बंद करना पड़ता है तो दर्जनों गांवों का संपर्क मुख्य सड़क और बाजार से कट सकता है। इससे छात्रों, किसानों, मरीजों और आम लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ेगा।

किसानों को अपनी उपज बाजार तक पहुंचाने में कठिनाई होगी, वहीं मरीजों को अस्पताल तक पहुंचने में समय लगेगा। इसका सीधा असर ग्रामीण अर्थव्यवस्था और दैनिक जीवन पर पड़ेगा।

प्रशासन से ग्रामीणों की अपील

क्षेत्र के लोगों ने जिला प्रशासन, पथ निर्माण विभाग और संबंधित अधिकारियों से जल्द पुल का तकनीकी निरीक्षण कराने, भार क्षमता की जांच करने और भारी वाहनों के लिए वैकल्पिक मार्ग की व्यवस्था करने की मांग की है।

ग्रामीणों का कहना है कि समय रहते कार्रवाई की गई तो बड़ी दुर्घटना को टाला जा सकता है और हजारों लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सकती है।

गिद्धौर का उलाई नदी पुल ओवरलोड बालू ट्रकों के दबाव से इसकी स्थिति चिंताजनक

गिद्धौर का उलाई नदी पुल केवल कंक्रीट और लोहे का ढांचा नहीं, बल्कि दर्जनों गांवों के लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी का महत्वपूर्ण हिस्सा है। लगातार ओवरलोड बालू ट्रकों के दबाव से इसकी स्थिति चिंताजनक होती जा रही है। प्रशासन को इस मामले को गंभीरता से लेते हुए तत्काल जांच और आवश्यक कदम उठाने चाहिए, ताकि भविष्य में किसी बड़ी दुर्घटना से बचा जा सके।

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Edited and Written by : Chandan Patel.

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