आर्थिक तंगी बनी मौत की वजह: गिद्धौर थाना क्षेत्र के कोल्हुआ पंचायत अंतर्गत सिमरिया महादलित टोला से एक हृदयविदारक मामला सामने आया है। आर्थिक तंगी और समुचित इलाज के अभाव में 32 वर्षीय महादलित युवक मीतू मांझी की मौत हो गई। इस घटना ने गरीब परिवारों की स्वास्थ्य सुविधाओं तक पहुंच और आर्थिक बदहाली की गंभीर तस्वीर उजागर कर दी है।
छह महीने से बीमारी से जूझ रहे थे मीतू
जानकारी के अनुसार, सिमरिया महादलित टोला निवासी सौदागर मांझी के पुत्र मीतू मांझी पिछले करीब छह माह से बीमार चल रहे थे। बीते एक सप्ताह से उनकी तबीयत और अधिक खराब हो गई थी। परिजनों ने इलाज कराने की कोशिश की, लेकिन आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण उन्हें बेहतर चिकित्सा सुविधा नहीं मिल सकी।

मजदूरी करने वाला परिवार नहीं जुटा सका इलाज का खर्च
मृतक का परिवार मेहनत-मजदूरी कर अपना जीवन यापन करता है। परिवार की आमदनी इतनी नहीं थी कि लंबे समय तक बीमारी का खर्च उठा सके। आर्थिक तंगी के कारण मीतू मांझी का समुचित इलाज नहीं हो पाया और अंततः उनकी मौत हो गई।
पत्नी और तीन मासूम बच्चों के सामने रोजी-रोटी का संकट
मीतू मांझी अपने पीछे पत्नी वीणा देवी और तीन छोटे बच्चों को छोड़ गए हैं। परिवार के मुखिया की असमय मौत के बाद घर की आर्थिक स्थिति और भी दयनीय हो गई है। पत्नी वीणा देवी का रो-रोकर बुरा हाल है। उन्होंने प्रशासन से आर्थिक सहायता और बच्चों के भविष्य को सुरक्षित करने की मांग की है।
गांव में पसरा मातम, ग्रामीणों ने उठाई मदद की मांग
घटना के बाद पूरे सिमरिया महादलित टोला में शोक का माहौल है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय पर बेहतर इलाज और आर्थिक सहायता मिल जाती तो शायद मीतू मांझी की जान बचाई जा सकती थी। स्थानीय लोगों ने प्रशासन से पीड़ित परिवार को तत्काल राहत देने की मांग की है।
प्रशासन से लगाई आर्थिक सहायता की गुहार
मृतक के परिजन और ग्रामीण प्रशासन से आर्थिक मदद, सरकारी योजनाओं का लाभ और बच्चों के भरण-पोषण की व्यवस्था करने की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि परिवार की स्थिति बेहद दयनीय है और सरकारी सहायता ही उनके लिए सहारा बन सकती है।
क्या कहती हैं अंचल अधिकारी
मामले पर गिद्धौर की अंचल अधिकारी आरती भूषण ने बताया कि उन्हें घटना की जानकारी मिली है। उन्होंने कहा कि सरकारी प्रावधानों के तहत पीड़ित परिवार को हरसंभव सहायता उपलब्ध कराने का प्रयास किया जाएगा।
गरीब परिवार की पीड़ा ने झकझोरा
मीतू मांझी की मौत केवल एक व्यक्ति की मौत नहीं, बल्कि उन हजारों गरीब परिवारों की पीड़ा की कहानी है जो आर्थिक अभाव के कारण बेहतर इलाज से वंचित रह जाते हैं। यह घटना समाज और प्रशासन दोनों के लिए एक गंभीर सोच का विषय बन गई है।
Written by : Chandan Patel.
Reported by: Bikki Kumar
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