लक्ष्मीपुर के दिग्घी मौजा में भूमि विवाद से मचा हड़कंप: जमुई जिले के लक्ष्मीपुर अंचल अंतर्गत दिग्घी मौजा में सरकारी भूमि की कथित रजिस्ट्री का मामला सामने आने के बाद राजस्व विभाग से लेकर निबंधन कार्यालय तक हलचल तेज हो गई है। एक ग्रामीण द्वारा शिकायत दर्ज कराए जाने के बाद पूरे मामले की जांच की मांग उठने लगी है।
क्या है पूरा मामला?
विवाद दिग्घी मौजा के खाता संख्या 171 और प्लॉट संख्या 707 से जुड़ा हुआ है। उपलब्ध अभिलेखों के अनुसार वर्ष 2019 में इसी भूमि के दाखिल-खारिज (म्यूटेशन) आवेदन को तत्कालीन अंचलाधिकारी ने अस्वीकार कर दिया था।
अधिकारी ने अपने आदेश में स्पष्ट उल्लेख किया था कि सीएस खतियान के अनुसार संबंधित भूमि गैरमजरूआ खाते में दर्ज है। ऐसे में म्यूटेशन की प्रक्रिया संभव नहीं थी।

2026 में उसी भूमि की हो गई रजिस्ट्री
अब वर्ष 2026 में इसी प्लॉट की रजिस्ट्री होने के बाद कई गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। मामले को लेकर स्थानीय निवासी कुबेर झा ने जिला प्रशासन को शिकायत भेजी है।
शिकायत में आरोप लगाया गया है कि गैरमजरूआ भूमि की रजिस्ट्री कर दी गई है, जो सरकारी नियमों के बिलकुल विपरीत प्रतीत होती है।
शिकायत में किन तथ्यों का किया गया उल्लेख?
शिकायतकर्ता ने 19 जून 2026 को संपन्न रजिस्ट्री संख्या 7638 तथा खाता संख्या 171/203, प्लॉट संख्या 707 का हवाला देते हुए इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है।
उनका कहना है कि जिस भूमि को पूर्व में सरकारी प्रकृति की मानते हुए म्यूटेशन से वंचित किया गया था, उसकी बिक्री और रजिस्ट्री कैसे संभव हुई?
म्यूटेशन रिकॉर्ड क्या कहता है?
उपलब्ध म्यूटेशन रिकॉर्ड के अनुसार दाखिल-खारिज वाद संख्या 161/2018-19 को अंचलाधिकारी द्वारा खारिज कर दिया गया था।
आदेश में कहा गया था कि सीएस खतियान के अनुसार संबंधित भूमि गैरमजरूआ खाते में दर्ज है। यही दस्तावेज अब पूरे विवाद का आधार बन गया है।
निबंधन कार्यालय ने क्या कहा?
जिला अवर निबंधक विनीत कुमार ने बताया कि निबंधन कार्यालय अपने स्तर पर किसी भूमि की रजिस्ट्री नहीं रोक सकता।
उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकारी भूमि की रजिस्ट्री रोकने के लिए संबंधित अंचलाधिकारी की रिपोर्ट, सक्षम न्यायालय का आदेश अथवा एडीएम की अध्यक्षता वाली रोक समिति का निर्णय आवश्यक होता है।
उन्होंने कहा कि ऐसे किसी आदेश या प्रतिवेदन के अभाव में निबंधन प्रक्रिया नियमानुसार पूरी की जाती है।
अंचलाधिकारी की प्रतिक्रिया
लक्ष्मीपुर अंचलाधिकारी रविकांत ने बताया कि रजिस्ट्री से पहले अंचल कार्यालय से किसी प्रतिवेदन का कोई प्रावधान नहीं है। इसलिए यह मामला उनके संज्ञान में नहीं आया था।
उन्होंने यह भी कहा कि सरकारी भूमि का दाखिल-खारिज संभव नहीं है।
खरीदार और विक्रेता पर उठ रहे सवाल
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि वर्ष 2019 में भूमि को गैरमजरूआ मानते हुए म्यूटेशन आवेदन खारिज कर दिया गया था, तो खरीदार मुकेश मोदी ने विक्रेता धर्मेंद्र कुमार झा से उक्त भूमि की खरीदारी क्यों की?
क्या खरीदार को भूमि की वास्तविक स्थिति की जानकारी थी, या उसे गलत जानकारी देकर जमीन बेची गई?
जांच के बाद ही सामने आएगी सच्चाई
इस मामले में कई सवाल जांच के दायरे में हैं—
क्या 2019 के बाद भूमि की प्रकृति में कोई बदलाव हुआ?
क्या राजस्व अभिलेखों में संशोधन किया गया?
क्या किसी स्तर पर रिकॉर्ड में छेड़छाड़ हुई?
क्या खरीदार को भ्रमित कर जमीन की बिक्री की गई?
इन सभी सवालों का जवाब राजस्व विभाग की जांच रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।
दिग्घी मौजा की यह भूमि रजिस्ट्री जांच का विषय
दिग्घी मौजा की यह भूमि रजिस्ट्री अब प्रशासनिक और कानूनी जांच का एक विषय बन चुकी है। यदि शिकायत में लगाए गए आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह मामला सरकारी भूमि की सुरक्षा और भूमि निबंधन प्रक्रिया पर गंभीर प्रश्न खड़े कर सकता है।
Written & Edit by : Chandan Patel.
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