जमुई/झाझा: साल 2020 में जब जेडीयू के दामोदर रावत ने झाझा विधानसभा सीट से चुनाव जीता था, तो उनका जीत का अंतर बहुत मामूली रहा – महज़ 1,679 वोट। यह साफ संकेत था कि जनता का भरोसा जीतना आसान नहीं होगा और उन्हें जमीन पर काम करके दिखाना होगा। अब 2025 के चुनाव से पहले उनके कार्यकाल का आकलन जरूरी है।

स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार की कोशिश

झाझा और लक्ष्मीपुर क्षेत्र में 60-बेड का सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बनकर तैयार हुआ है, जिससे 24 घंटे इलाज की सुविधा मिलेगी।

झाझा प्रखंड के बूढ़ीखाड़ और चांय सहित तीन जगहों पर एपीएचसी (Additional Primary Health Centres) की स्वीकृति मिली है, जिन पर लगभग ₹1.30 करोड़ प्रति केंद्र खर्च होगा।

धमना और दिग्घी प्रखंडों में नए प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (PHC) बनाने का टेंडर जारी किया गया है, जिसकी लागत लगभग ₹2.89 करोड़ है।

सड़क और आधारभूत संरचना

जुलाई 2025 में झाझा में तीन बड़ी सड़क योजनाओं का शिलान्यास हुआ, जिन पर ₹7.19 करोड़ की लागत आएगी।

गंगरा ताराडीह से गिद्धौर रेलवे स्टेशन तक, निजुआरा-मांगोबंदर तक और गेनाड़ीह रेलवे गुमटी से चौरा नयागांव तक सड़कें बन रही हैं।

इसके अलावा, पूर्वी गुगुलडीह पंचायत में ₹3.20 करोड़ की लागत से छतनवा टोला से कहराकुरा यादव टोला तक सड़क निर्माण का काम भी शुरू किया गया है।

शिक्षा और समाज कल्याण

झाझा के कन्या उच्च विद्यालय का नया भवन बनाने की योजना प्रक्रिया में है, जिससे लड़कियों की शिक्षा को बढ़ावा मिलेगा।

छापा गांव (महादलित बस्ती) में शिशु घर का उद्घाटन हुआ, जहां 7 माह से 3 साल तक के बच्चों को पौष्टिक भोजन, देखभाल और शिक्षा सामग्री उपलब्ध कराई जा रही है।

झाझा में आंकड़ों की तस्वीर

मतदाता संख्या (2020): लगभग 3.11 लाख

मतदान संख्या: लगभग 1.88 लाख

जीत का अंतर: 1,679 वोट (लगभग 0.9%)

विकास योजनाओं की लागत: स्वास्थ्य, सड़क और शिक्षा मिलाकर कई करोड़ रुपये की परियोजनाएँ चालू।

 चुनौतियाँ और सवाल

हालांकि विधायक ने कई शिलान्यास और उद्घाटन किए हैं, लेकिन असली चुनौती इन योजनाओं को समय पर और गुणवत्तापूर्ण ढंग से पूरा करना है।

क्या स्वास्थ्य केंद्रों में डॉक्टर और दवाइयाँ समय पर उपलब्ध होंगी?

क्या सड़क निर्माण की गुणवत्ता और रखरखाव सुनिश्चित हो पाएगा?

क्या शिक्षा और सामाजिक कल्याण योजनाएँ वास्तव में गरीब परिवारों तक पहुँचेंगी?

आने वाले चुनाव में झाझा की जनता इन्हीं कामों और अधूरे वादों पर फैसला

दामोदर रावत का 2020 से 2025 का कार्यकाल सड़क, स्वास्थ्य और सामाजिक कल्याण की योजनाओं पर केंद्रित रहा है। उन्होंने कई परियोजनाएँ शुरू कराई हैं, लेकिन अभी जनता का सबसे बड़ा सवाल यही है – क्या ये योजनाएँ सिर्फ कागज़ और शिलान्यास तक सीमित रहेंगी या धरातल पर बदलाव लेकर आएँगी?

आने वाले चुनाव में जनता इन्हीं कामों और अधूरे वादों के आधार पर फैसला करेगी।

झाझा
फाइल फोटो: झाझा विधायक दामोदर रावत

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By Chandan Patel

चंदन पटेल AVN News से लंबे समय से जुड़े पत्रकार हैं। उन्होंने वर्ष 2020 से रिपोर्टर के रूप में पत्रकारिता की शुरुआत की और जमीनी स्तर की खबरों को प्रमुखता से उठाते हुए लगातार अपनी पहचान बनाई। वर्तमान में वे AVN News के एडिटर-इन-चीफ के रूप में समाचार संपादन, कवरेज और डिजिटल पत्रकारिता का नेतृत्व कर रहे हैं। राजनीति, खेल,स्थानीय मुद्दों, जनसमस्याओं, प्रशासनिक गतिविधियों और सामाजिक सरोकारों से जुड़ी खबरों को तथ्यपरक और सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचाना उनकी पत्रकारिता की प्रमुख विशेषता है। उनका उद्देश्य आम लोगों की आवाज को प्रमुखता देना और विश्वसनीय खबरों के माध्यम से समाज को जागरूक करना है।

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