जमुई में पुल बंद होने से बढ़ी लोगों की मुश्किलें: बिहार के जमुई जिले में लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी पर बड़ा असर डालने वाला फैसला सामने आया है। लंबे समय से जर्जर हालत में पड़े मांगोबंदर पुल और नरियाना पुल को आखिरकार पूरी तरह बंद कर दिया गया है। National Highways Authority of India (NHAI) के अधिकारियों की निंद  बुधवार को खुली और मौके पर पहुंचकर बेरिकेटिंग की कार्रवाई शुरू की और पुलों पर सभी प्रकार के वाहनों की आवाजाही रोक दी गई।

यह फैसला यात्रियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए लिया गया है, लेकिन इससे हजारों लोगों की परेशानी कई गुना बढ़ गई है। अब खैरा, सोनो और झारखंड की ओर जाने वाले यात्रियों को लंबा वैकल्पिक रास्ता अपनाना पड़ेगा।

क्यों बंद किया गया मांगोबंदर पुल?

जानकारी के अनुसार वर्ष 2017 में ही मांगोबंदर पुल के 11वें पिलर में दरार दिखाई दी थी। इसके बाद पुल पर भारी वाहनों के परिचालन पर रोक लगा दी गई थी। समय बीतने के साथ पुल की स्थिति लगातार खराब होती चली गई।
अब हालात इतने गंभीर हो चुके हैं कि छोटे वाहनों के लिए भी यह पुल खतरा बन गया था। प्रशासन और एनएचएआई अधिकारियों ने निरीक्षण के बाद किसी बड़े हादसे की आशंका को देखते हुए पुल को पूरी तरह बंद करने का निर्णय लिया।

मांगोबंदर और नरियाना पुल की हालत भी बेहद खराब

मांगोबंदर पुल के साथ-साथ नरियाना पुल की स्थिति भी लगातार जर्जर होती जा रही थी। पहले यहां केवल भारी वाहनों की आवाजाही बंद की गई थी, लेकिन पुल में बढ़ती दरारों के कारण अब छोटे वाहनों पर भी प्रतिबंध लगाने की तैयारी कर ली गई है।

अधिकारियों का कहना है कि दोनों पुल किसी भी समय बड़े हादसे का कारण बन सकते थे। ऐसे में सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए सख्त कदम उठाना जरूरी हो गया था।

मांगोबंदर
जमुई में मांगोबंदर और नरियाना पुल बंद, NHAI ने बेरिकेटिंग कर पूरी तरह से रोकी आवाजाही

 

यात्रियों को अब करना होगा लंबा सफर

पुल बंद होने का सबसे ज्यादा असर आम लोगों पर पड़ा है। खैरा और सोनो के रास्ते झारखंड जाने वाले यात्रियों को अब लगभग 20 किलोमीटर अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ेगी। अब लोगों को गिद्धौर–झाझा होते हुए चकाई मार्ग से होकर झारखंड जाना होगा। इससे न केवल यात्रा का समय बढ़ेगा बल्कि ईंधन खर्च भी अधिक होगा। रोजाना नौकरी, व्यापार और पढ़ाई के लिए आने-जाने वाले लोगों की परेशानी सबसे ज्यादा बढ़ गई है।

ग्रामीणों और व्यापारियों में बढ़ी चिंता

स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि यह सड़क मार्ग इलाके की लाइफलाइन था। पुल बंद होने से गांवों का संपर्क प्रभावित हो गया है। छोटे व्यापारियों, किसानों और छात्रों को अब रोज लंबी दूरी तय करनी पड़ेगी। कई लोगों ने प्रशासन से जल्द मरम्मत कार्य शुरू कराने या नए पुल निर्माण की मांग की है। लोगों का कहना है कि अगर जल्द समाधान नहीं निकला तो आने वाले दिनों में क्षेत्र की आर्थिक गतिविधियों पर भी असर पड़ सकता है।

प्रशासन ने सुरक्षा को बताया प्राथमिकता

एनएचएआई और प्रशासनिक अधिकारियों ने साफ कहा है कि लोगों की जान सबसे महत्वपूर्ण है। पुलों की हालत इतनी खराब हो चुकी थी कि कभी भी बड़ा हादसा हो सकता था।
इसी कारण दोनों पुलों पर तत्काल प्रभाव से बेरिकेटिंग कर दी गई और आवागमन बंद करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।

क्या होगा आगे?

अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या इन पुलों की मरम्मत होगी या नए पुल बनाए जाएंगे। फिलहाल प्रशासन की ओर से स्थायी समाधान को लेकर कोई स्पष्ट समयसीमा नहीं बताई गई है। स्थानीय लोगों को उम्मीद है कि सरकार जल्द कोई बड़ा फैसला लेगी ताकि लोगों को राहत मिल सके और क्षेत्र की आवाजाही फिर सामान्य हो सके।

लंबा रास्ता, बढ़ता खर्च और समय की बर्बादी अब लोगों की नई परेशानी

मांगोबंदर और नरियाना पुल का बंद होना सुरक्षा के लिहाज से जरूरी फैसला माना जा रहा है, लेकिन इसका सीधा असर आम जनता की जिंदगी पर पड़ा है। लंबा रास्ता, बढ़ता खर्च और समय की बर्बादी अब लोगों की नई परेशानी बन चुकी है। ऐसे में प्रशासन और सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती जल्द स्थायी समाधान निकालने की होगी।

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