नेपाल-तिब्बत सीमा पर बुधवार सुबह आई विनाशकारी फ्लैश फ्लड ने हिमालयी क्षेत्र को हिलाकर रख दिया है। अचानक आए सैलाब ने घरों, सड़कों, पुलों, बाजारों और हाइड्रोपावर परियोजनाओं को अपनी चपेट में ले लिया। नेपाल और तिब्बत में बड़ी संख्या में लोगों की मौत हुई है, जबकि 1,400 से ज्यादा लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं। इनमें बड़ी संख्या में विदेशी नागरिक शामिल हैं। भारत के करीब 290 नागरिकों के भी अब तक संपर्क में नहीं आने की खबर है।
ताजा रिपोर्टों के मुताबिक नेपाल और तिब्बत में बाढ़ से मरने वालों की संख्या करीब 392 तक पहुंच गई है, जबकि करीब 1,468 लोग लापता बताए जा रहे हैं। हालांकि अलग-अलग सरकारी एजेंसियों और देशों द्वारा जारी आंकड़ों में अंतर है और राहत-बचाव अभियान जारी रहने के साथ संख्या बदल रही है।
अचानक आई बाढ़ ने दिया संभलने का मौका तक नहीं
नेपाल-तिब्बत सीमा के पहाड़ी इलाके में बुधवार सुबह अचानक पानी और मलबे का ऐसा सैलाब आया कि लोगों को संभलने तक का मौका नहीं मिला। प्रारंभिक रिपोर्टों के अनुसार हिमालयी क्षेत्र में ग्लेशियर या बर्फ-चट्टान के बड़े हिस्से के टूटने से अचानक भारी मात्रा में पानी नीचे की ओर आया, जिसने नदी घाटियों में तबाही मचा दी।
बाढ़ का सबसे ज्यादा असर नेपाल के रसुवा और आसपास के इलाकों में देखा गया। कई सड़कें और पुल बह गए, जिससे प्रभावित क्षेत्रों का संपर्क दूसरे हिस्सों से टूट गया। बचाव दलों के लिए भी मलबे और खराब सड़क संपर्क के कारण प्रभावित इलाकों तक पहुंचना बड़ी चुनौती बना हुआ है।
बैरियर झील ने बढ़ाई चिंता, फिर आ सकती है बड़ी बाढ़
सबसे बड़ी चिंता अब उस बैरियर झील को लेकर है, जो पानी और मलबे के जमा होने से बनी है। विशेषज्ञों और अधिकारियों को आशंका है कि यदि यह झील अचानक टूटती है तो नीचे की ओर फिर तेज बाढ़ आ सकती है।
इस खतरे ने प्रशासन और राहत एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है। पहले से तबाह इलाकों में एक और जलप्रवाह आने की स्थिति में नुकसान और बढ़ सकता है।
290 भारतीय नागरिकों के संपर्क में नहीं आने से बढ़ी चिंता
नेपाल में बाढ़ के बाद बड़ी संख्या में विदेशी नागरिकों के लापता होने की खबर सामने आई है। भारत के करीब 290 नागरिकों के संपर्क में नहीं आने की जानकारी सामने आई है। हालांकि अलग-अलग नेपाली एजेंसियों और भारतीय अधिकारियों के आंकड़ों में अंतर दिखाई दे रहा है।
रिपोर्टों के अनुसार प्रभावित इलाके में बड़ी संख्या में भारतीय पर्यटक, ट्रेकर्स और कैलाश मानसरोवर यात्रा से जुड़े लोग मौजूद थे। ऐसे में भारत में भी कई परिवार अपने परिजनों की सुरक्षित वापसी की खबर का अभी भी इंतजार कर रहे हैं।
32 से ज्यादा देशों के नागरिक प्रभावित
इस आपदा का असर सिर्फ नेपाल और भारत तक सीमित नहीं है। विभिन्न देशों के नागरिक भी इस प्राकृतिक आपदा की चपेट में आए हैं।
रिपोर्टों के मुताबिक अमेरिका, यूक्रेन, मलेशिया, ऑस्ट्रेलिया, ब्रिटेन, कनाडा, दक्षिण कोरिया, न्यूजीलैंड समेत 30 से ज्यादा देशों के नागरिक लापता बताए गए हैं।
ऑस्ट्रेलिया के कम से कम 39 नागरिकों के लापता होने की पुष्टि वहां की सरकार ने की है। ऑस्ट्रेलिया ने अपने नागरिकों की सहायता के लिए अतिरिक्त कांसुलर कर्मचारियों को नेपाल भेजने की घोषणा भी की है।
ऑस्ट्रेलिया ने नेपाल को दी आर्थिक मदद
ऑस्ट्रेलिया सरकार ने नेपाल में बाढ़ और भूस्खलन से प्रभावित लोगों की सहायता के लिए 50 लाख ऑस्ट्रेलियाई डॉलर की सहायता की घोषणा की है। यह राशि मानवीय राहत और प्रभावित समुदायों की मदद के लिए दी जाएगी।
ऑस्ट्रेलियाई सरकार ने कहा है कि सड़क और पुलों के तबाह होने से कई समुदाय अब भी अलग-थलग हैं और वहां मानवीय सहायता पहुंचाना बेहद मुश्किल है।
सुरंग में फंसे लोगों का नेपाल सेना ने किया रेस्क्यू
बाढ़ के बीच नेपाल सेना ने राहत और बचाव अभियान तेज कर दिया है। त्रिशूली नदी के पास एक हाइड्रोपावर परियोजना की सुरंग में फंसे लोगों को सुरक्षित निकालने में सेना को सफलता मिली।
नेपाल के प्रधानमंत्री कार्यालय के अनुसार सेना की टीम ने सुरंग में फंसे करीब 350 लोगों को बाहर निकाला। यह रेस्क्यू अभियान आपदा के बीच बड़ी राहत के रूप में सामने आया है।

नदियों के किनारे से मिले शव, पहचान की कोशिश जारी
बाढ़ के बाद त्रिशूली और नारायणी नदी समेत विभिन्न स्थानों से शव बरामद किए जा रहे हैं। कई शवों को पहचान और पोस्टमार्टम की प्रक्रिया के लिए सुरक्षित स्थानों पर भेजा जा रहा है।
प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती शवों की पहचान कर उन्हें उनके परिवारों तक पहुंचाने की है। वहीं दूसरी ओर लापता लोगों के परिजन लगातार किसी अच्छी खबर की उम्मीद लगाए बैठे हैं।
कैलाश मानसरोवर यात्रा पर गया हैदराबाद का दल सुरक्षित
नेपाल-तिब्बत सीमा पर आई बाढ़ के बीच कैलाश मानसरोवर यात्रा पर गया हैदराबाद का 45 सदस्यीय दल सुरक्षित बताया गया है।
दल में 35 यात्री और 10 सपोर्ट स्टाफ शामिल हैं। इस दल में पूर्व DRDO चेयरमैन जी. सतीश रेड्डी और उनका परिवार भी शामिल बताया गया है।
बाढ़ के कारण जिस रास्ते से दल को वापस नेपाल लौटना था, उसमें बदलाव किया गया है। स्थानीय अधिकारियों ने सुरक्षा को देखते हुए यात्रियों के लिए वैकल्पिक मार्ग तय किया है।
सतीश रेड्डी ने भी फोन पर सभी यात्रियों के सुरक्षित होने की जानकारी दी है। दल के सदस्य रास्ता बदलकर नेपाल होते हुए भारत लौटने की तैयारी में हैं।
सचिन तेंदुलकर ने जताई संवेदना
प्राकृतिक आपदा से प्रभावित परिवारों के प्रति पूर्व भारतीय क्रिकेटर सचिन तेंदुलकर ने भी संवेदना जताई है।
उन्होंने लापता लोगों के परिवारों के दर्द को याद करते हुए कहा कि अपने किसी करीबी के सुरक्षित होने की खबर का इंतजार करने से बड़ी अनिश्चितता शायद ही कोई हो सकती है।
सचिन ने प्रभावित परिवारों के साथ-साथ उन बचावकर्मियों के लिए भी संवेदना और प्रार्थना व्यक्त की, जो कठिन परिस्थितियों में लोगों तक पहुंचने के लिए लगातार काम कर रहे हैं।
ट्रंप ने नेपाल को हरसंभव मदद का भरोसा दिया
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी नेपाल में आई भीषण बाढ़ को लेकर चिंता जताई है। रिपोर्टों के अनुसार उन्होंने नेपाल के अधिकारियों से आपदा से हुए नुकसान की जानकारी ली और नेपाल को हर संभव सहायता का भरोसा दिया है।
अमेरिका समेत कई देशों ने इस आपदा के बाद नेपाल की स्थिति पर नजर बना रखी है।
राहत और बचाव अभियान के सामने बड़ी चुनौती
हिमालयी इलाके की भौगोलिक परिस्थितियां राहत अभियान को बेहद कठिन बना रही हैं। कई सड़कें और पुल टूट चुके हैं। कुछ इलाकों में संचार व्यवस्था भी प्रभावित हुई है।
ऐसे में हेलिकॉप्टरों के जरिए लोगों को सुरक्षित निकालने, राहत सामग्री पहुंचाने और लापता लोगों की तलाश का अभियान चलाया जा रहा है। अधिकारियों के सामने सबसे बड़ी चुनौती उन दुर्गम इलाकों तक पहुंचना है जहां बाढ़ और भूस्खलन के कारण जमीनी रास्ते पूरी तरह बंद हो चुके हैं।
परिवारों की निगाहें राहत टीमों पर
नेपाल-तिब्बत सीमा की यह आपदा सिर्फ आंकड़ों की कहानी नहीं है। हजारों परिवार अपने अपनों की खबर का इंतजार कर रहे हैं। किसी का बेटा, किसी की बेटी, किसी का पति तो किसी का पूरा परिवार इस आपदा के बाद संपर्क से बाहर है।
हर गुजरते घंटे के साथ परिजनों की चिंता बढ़ती जा रही है। दूसरी ओर राहत और बचाव दल मलबे, तेज बहाव और खराब मौसम के बीच जिंदगी की तलाश में जुटे हुए हैं।
नेपाल और तिब्बत की इस त्रासदी ने एक बार फिर दिखा दिया है कि हिमालयी क्षेत्रों में अचानक आने वाली प्राकृतिक आपदाओं से निपटने के लिए मजबूत चेतावनी प्रणाली, बेहतर आपदा प्रबंधन और अंतरराष्ट्रीय सहयोग कितना जरूरी है।
Written & Edit by : Chandan Patel

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