लगातार डेढ़ महीने तक देशभर में छात्रों का गुस्सा सड़कों पर दिखाई दिया। जंतर-मंतर से लेकर देश के कई राज्यों तक युवाओं ने परीक्षा व्यवस्था में सुधार, पेपर लीक पर सख्त कार्रवाई और जवाबदेही की मांग उठाई। सवाल यह भी उठता रहा कि क्या अगर इतना बड़ा जनआंदोलन नहीं होता, तो क्या सरकार इतनी तेजी से नया कानून लाती? अब आखिरकार केंद्र सरकार संसद के मानसून सत्र में सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक-2026 लेकर आ रही है। सरकार इसे परीक्षा सुधार की दिशा में बड़ा कदम बता रही है, जबकि विपक्ष इसे छात्रों के दबाव और जनआक्रोश का परिणाम मान रहा है।
यानी जिस मुद्दे पर लाखों युवाओं ने आवाज बुलंद की, उसी पर अब संसद में सबसे अहम बहस होने जा रही है। आने वाला यह कानून सिर्फ पेपर लीक पर कार्रवाई तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरी परीक्षा प्रणाली को पारदर्शी और जवाबदेह बनाने का दावा भी करेगा।
लोकसभा में आज पेश होगा NEET
Paper Leak Amendment Bill 2026
सोमवार को संसद के मानसून सत्र के दौरान केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह लोकसभा में पब्लिक एग्जामिनेशन (प्रिवेंशन ऑफ अनफेयर मीन्स) संशोधन विधेयक-2026 पेश करेंगे। सरकार विधेयक पेश करने के साथ ही इसे विचार और पारित कराने का प्रस्ताव भी रखेगी।
क्या है इस संशोधन विधेयक का उद्देश्य?
यह संशोधन सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम-2024 में बदलाव करेगा।
सरकार का दावा है कि इसका मकसद है:
- पेपर लीक पर पूरी तरह लगाम लगाना।
- नकल माफिया और संगठित गिरोहों पर कड़ी कार्रवाई।
- परीक्षा प्रणाली को पारदर्शी और भरोसेमंद बनाना।
- आधुनिक तकनीक के जरिए धोखाधड़ी रोकना।
सरकार क्यों लाई नया कानून?
पिछले डेढ़ महीने से NEET पेपर लीक को लेकर देशभर में छात्रों का आंदोलन जारी रहा।
- जंतर-मंतर पर लगातार धरना।
- कई राज्यों में प्रदर्शन।
- विपक्ष का सरकार पर हमला।
- शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग।
- संसद से सड़क तक विरोध।
इसी दबाव के बीच केंद्र सरकार ने पहले फास्ट ट्रैक कोर्ट, फिर हाई पावर टास्क फोर्स और अब नया संशोधन कानून लाने का फैसला किया।
बिल में क्या होंगे सबसे बड़े बदलाव?
प्रस्तावित संशोधन के तहत:
1. हर राज्य में फास्ट ट्रैक कोर्ट
पेपर लीक मामलों की सुनवाई के लिए विशेष अदालतें बनाई जाएंगी।
2. रोजाना होगी सुनवाई
मुकदमों की डेली हियरिंग होगी।
3. तीन महीने में फैसला
चार्जशीट दाखिल होने के तीन महीने के भीतर ट्रायल पूरा करना होगा।
4. दो महीने में जांच
जांच एजेंसियों को दो महीने के भीतर जांच पूरी करनी होगी।
5. विशेष टास्क फोर्स
जरूरत पड़ने पर केंद्र सरकार विशेष जांच दल (STF) गठित कर सकेगी।
पेपर लीक करने वालों को कितनी होगी सजा?
संशोधन विधेयक के अनुसार:
- न्यूनतम 5 साल की जेल।
- अधिकतम 10 साल की जेल।
- 50 लाख रुपये तक जुर्माना।
यदि मामला संगठित गिरोह से जुड़ा हुआ पाया जाता है:
कम से कम 7 साल की जेल।
10 करोड़ रुपये तक जुर्माना।
पुराने कानून और नए बिल में क्या अंतर है?
2024 का कानून
- सामान्य मामलों में 3 से 5 साल की जेल।
- संगठित अपराध में 5 से 10 साल की जेल।
- कम से कम 1 करोड़ रुपये का जुर्माना।
2026 संशोधन
- जांच की समय सीमा तय।
- फास्ट ट्रैक कोर्ट।
- रोजाना सुनवाई।
- तीन महीने में फैसला।
- नई परीक्षा गाइडलाइन।
- जवाबदेही तय करने की व्यवस्था।
परीक्षा प्रणाली में होंगे बड़े बदलाव
संशोधन विधेयक में नई परीक्षा गाइडलाइन भी प्रस्तावित है।
इनमें शामिल हैं:
- परीक्षा केंद्रों का प्री-ऑडिट।
- बायोमेट्रिक सत्यापन।
- CCTV निगरानी।
- सुरक्षित प्रश्नपत्र अपलोडिंग।
- सीट आवंटन की नई व्यवस्था।
- दिव्यांग अभ्यर्थियों के लिए बेहतर व्यवस्था।
- परीक्षा के बाद ऑडिट सिस्टम।
15 तरह की धोखाधड़ी होगी अपराध
नए कानून के तहत :
- पेपर लीक।
- OMR शीट से छेड़छाड़।
- फर्जी वेबसाइट।
- फर्जी एडमिट कार्ड।
- सॉल्वर गैंग।
- परीक्षा प्रक्रिया में तकनीकी धोखाधड़ी।
- डिजिटल हैकिंग।
- प्रश्नपत्र बेचने वाले गिरोह।
इन सभी को स्पष्ट रूप से अपराध घोषित किया जाएगा।
प्रधानमंत्री मोदी ने क्या कहा?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि सरकार छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करेगी।
उन्होंने कहा:
- फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाए जाएंगे।
- नया कानून लाया जाएगा।
- परीक्षा प्रणाली पूरी तरह पारदर्शी बनेगी।
- तकनीक आधारित सुधार किए जाएंगे।
हाई पावर टास्क फोर्स करेगी परीक्षा सुधार
सरकार ने नंदन नीलेकणि की अध्यक्षता में हाई पावर टास्क फोर्स बनाई है।
इसमें शामिल हैं:
- डॉ. वी. कामकोटि
- डॉ. एस. सोमनाथ
- तपन डेका
- अनीता करवाल
- अमृत लाल मीणा
समिति परीक्षा सुधारों की विस्तृत रिपोर्ट तैयार करेगी।

लोकसभा में लंबी बहस की तैयारी
सरकार की योजना इस विधेयक पर लगभग 8 से 10 घंटे चर्चा कराने की है।
भाजपा और एनडीए की ओर से कई युवा सांसद बहस में हिस्सा लेंगे।
विपक्ष ने सरकार को घेरा
डीएमके और कांग्रेस ने संसद में स्थगन प्रस्ताव देकर मांग की है:
- NEET पर चर्चा हो।
- छात्रों पर कथित बल प्रयोग की जांच हो।
- पेलेट गन और अत्यधिक पुलिस कार्रवाई पर सरकार जवाब दे।
क्या यह कानून देर से आया?
सबसे बड़ा सवाल यही है।
अगर लाखों छात्र सड़क पर नहीं उतरते…
अगर जंतर-मंतर पर लगातार आंदोलन नहीं चलता…
अगर देशभर में विरोध प्रदर्शन नहीं होते…
तो क्या सरकार इतनी तेजी से नया संशोधन कानून लाती?
इस सवाल का जवाब राजनीति अपने-अपने तरीके से दे सकती है, लेकिन इतना तय है कि छात्रों के आंदोलन ने परीक्षा सुधार को राष्ट्रीय बहस का सबसे बड़ा मुद्दा बना दिया।
असली परीक्षा कानून बनने के बाद शुरू होगी
पेपर लीक केवल परीक्षा का संकट नहीं, बल्कि युवाओं के विश्वास का संकट बन चुका था। अब सरकार संसद में नया संशोधन विधेयक लाकर भरोसा लौटाने की कोशिश कर रही है। हालांकि असली परीक्षा कानून बनने के बाद शुरू होगी—क्या यह सख्त प्रावधान वास्तव में पेपर लीक माफिया पर लगाम लगा पाएंगे, या फिर यह भी सिर्फ कागजों तक सीमित रह जाएगा? आने वाले समय में इसका जवाब देश के करोड़ों छात्र तलाशेंगे।
Written & Edit by : Chandan Patel.
