केंद्र सरकार ने सहारा ग्रुप की सहकारी समितियों में फंसे निवेशकों के पैसे लौटाने की प्रक्रिया को अब और अधिक आसान और पारदर्शी बनाने का फैसला किया है। जिन निवेशकों का पहले क्लेम रिजेक्ट हो गया था या भुगतान किसी कारण से अटक गया था, वे अब सीआरसीएस-सहारा रिफंड पोर्टल के जरिए दोबारा आवेदन कर सकते हैं। आइए, इस पूरी प्रक्रिया को आसान भाषा में समझते हैं।
क्या है नया सीआरसीएस-सहारा री-सबमिशन रिफंड पोर्टल?
यह एक ऑनलाइन प्लेटफॉर्म है, जिसे खास तौर पर उन निवेशकों के लिए बनाया गया है जिनके पहले किए गए आवेदन में कोई कमी पाई गई थी। अब वे अपने क्लेम को दोबारा सही जानकारी के साथ जमा कर सकते हैं।
यह पूरी प्रक्रिया सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में संचालित की जा रही है, जिससे पारदर्शिता और सुरक्षा सुनिश्चित होती है।

कितने रुपये तक कर सकते हैं क्लेम और कब मिलेगा पैसा?
निवेशक अब अधिकतम 10 लाख रुपये तक का क्लेम दोबारा जमा कर सकते हैं।
री-सबमिट किए गए दावों को 45 कार्य दिवसों के भीतर प्रोसेस किया जाएगा।
आवेदन के लिए जरूरी शर्तें क्या हैं?
रिफंड पोर्टल पर सफल आवेदन के लिए कुछ अनिवार्य शर्तें हैं:
- मोबाइल नंबर आधार से लिंक होना चाहिए
- बैंक अकाउंट भी आधार से जुड़ा होना चाहिए
- बिना इन शर्तों के क्लेम दर्ज नहीं किया जा सकता
क्या पैन कार्ड जरूरी है?
यदि आपका कुल क्लेम अमाउंट 50,000 रुपये या उससे अधिक है, तो: पैन कार्ड देना अनिवार्य होगा
क्लेम री-सबमिट करने की स्टेप-बाय-स्टेप प्रक्रिया
रिफंड के लिए आवेदन करने के लिए इन आसान चरणों का पालन करें:
- 14 अंकों का क्लेम रिक्वेस्ट नंबर (CRN) दर्ज करें
- कैप्चा भरकर नंबर को वैलिडेट करें
- सिस्टम आपके आधार लिंक्ड नंबर को जांचेगा
- सही होने पर मोबाइल पर OTP आएगा
- OTP डालकर वेरिफिकेशन पूरा करें
- यदि नंबर अमान्य है, तो 12 अंकों का आधार नंबर दर्ज करें
क्या यह पोर्टल सुरक्षित है?
हाँ, यह पोर्टल पूरी तरह सुरक्षित है।
इसमें SSL सर्टिफिकेट मौजूद है
पूरी प्रक्रिया सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में होती है
निवेशकों की जानकारी सुरक्षित रखी जाती है
यहां से करें आवेदन
निवेशक आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर अपना क्लेम री-सबमिट कर सकते हैं: https://mocrefund.crcs.gov.in/
सहारा निवेशकों के लिए यह एक बड़ा अवसर
सहारा निवेशकों के लिए यह एक बड़ा अवसर है। जिनका पैसा लंबे समय से फंसा हुआ है, वे अब आसानी से दोबारा आवेदन करके अपना रिफंड प्राप्त कर सकते हैं। सरकार का यह कदम न केवल प्रक्रिया को सरल बनाता है, बल्कि निवेशकों का भरोसा भी मजबूत करता है।
