मैं आवारा हूँ

“हाँ, मैं आवारा हूँ”

हाँ, मैं आवारा हूँ,
बादलों की तरह भटका हुआ,
कभी आसमान की ऊँचाइयों में,
कभी धरती की धूल में अटका हुआ।

हाँ, मैं आवारा हूँ,
मेरे दिल में तूफ़ान भी हैं,
और खामोशियों की बारिश भी,
कभी बिजली-सा चमक उठता हूँ,
कभी आँसुओं में घिर जाता हूँ।

हाँ, मैं आवारा हूँ,
किसी एक आसमान का नहीं,
हवा जहाँ ले जाए
वहीं अपना ठिकाना बना लेता हूँ।
मेरी राहों में सरहदें नहीं,
बस सफ़र ही मेरा अफ़साना है।

हाँ, मैं आवारा हूँ,
कभी उम्मीद बनकर बरसता हूँ,
कभी यादों की धुंध बन जाता हूँ,
लोग मुझे पल भर देखते हैं,
पर मैं उनकी कहानियाँ साथ ले जाता हूँ।

हाँ, मैं आवारा हूँ,
न पूरी तरह आज़ाद,
न पूरी तरह क़ैद,
बस वक्त की हवाओं के संग
चलता हुआ एक मुसाफ़िर।

शायद,
किसी दिन जब मैं बरसूँगा,
तो मेरी बूंदों में
किसी की दुआ,

किसी के बद्दुआ,
किसी का दर्द,
और मेरी अपनी पहचान होगी।

हाँ…
मैं आवारा हूँ।

मैं आवारा हूँ

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Note :-

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By: KP
Edited  by: KP

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