बिहार में राज्यसभा चुनाव के नतीजों ने एक बार फिर राज्य की राजनीति में बड़ा संदेश दिया है। राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) ने राज्यसभा की पांचों सीटों पर कब्जा जमा लिया है। चार सीटों पर जीत पहले से तय मानी जा रही थी, लेकिन पांचवीं सीट पर मुकाबला दिलचस्प हो गया था। अंत में महागठबंधन के चार विधायकों के मतदान में शामिल नहीं होने से एनडीए की जीत आसान हो गई।

मतगणना के बाद सभी पांच उम्मीदवारों को विजयी घोषित कर दिया गया। नतीजे आते ही एनडीए खेमे में जश्न का माहौल है और कार्यकर्ता इसे बड़ी राजनीतिक जीत बता रहे हैं।

बिहार से राज्यसभा पहुंचने वाले उम्मीदवार कौन-कौन?

इस चुनाव में एनडीए के जिन पांच उम्मीदवारों ने जीत दर्ज की, उनमें प्रमुख राजनीतिक चेहरे शामिल हैं।

नीतीश कुमार (जदयू)
रामनाथ ठाकुर (जदयू)
नितिन नवीन (भाजपा)
शिवेश कुमार (भाजपा)
उपेंद्र कुशवाहा (राष्ट्रीय लोक मोर्चा)

इन सभी उम्मीदवारों की जीत के साथ एनडीए ने बिहार की सभी पांच सीटों पर अपना कब्जा कायम कर लिया।

पांचवीं सीट पर हुआ असली मुकाबला

एनडीए ने अपने 202 विधायकों के बल पर पांच उम्मीदवार उतारे थे। इनमें से चार सीटों पर जीत लगभग तय मानी जा रही थी। लेकिन पांचवीं सीट पर महागठबंधन ने राजद के अमरेंद्र धारी सिंह को मैदान में उतारकर मुकाबले को रोचक बना दिया। इसके बाद पांचवीं सीट पर एनडीए और महागठबंधन के बीच सीधा मुकाबला बन गया। दोनों गठबंधनों ने अपने-अपने विधायकों को एकजुट रखने के लिए रणनीति बनानी शुरू कर दी।

इफ्तार पार्टी से होटल तक: विधायकों को एकजुट रखने की कोशिश

महागठबंधन की ओर से नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने विधायकों को एकजुट रखने के लिए कई कदम उठाए। उन्होंने AIMIM के प्रदेश अध्यक्ष अख्तरूल ईमान की इफ्तार पार्टी में भी हिस्सा लिया।

बिहार
AIMIM चीफ़ असुद्दीन ओवेशी और राजद नेता तेजस्वी यादव

बसपा के एकमात्र विधायक सतीश यादव ने भी महागठबंधन को समर्थन दिया। इसके बाद 15 मार्च को तेजस्वी यादव ने सभी महागठबंधन विधायकों को पटना के एक होटल में ठहरने के लिए कहा ताकि किसी तरह की टूट-फूट न हो। हालांकि चार विधायक होटल नहीं पहुंचे और यही बाद में चुनाव का टर्निंग प्वाइंट साबित हुआ।

मतदान के दिन चार विधायक गायब, पलट गया खेल

16 मार्च को मतदान के दिन महागठबंधन के चार विधायक—कांग्रेस के तीन और राजद के एक विधायक—विधानसभा पहुंचे ही नहीं। महागठबंधन को पांचवीं सीट जीतने के लिए 41 वोटों की जरूरत थी।

AIMIM और बसपा के समर्थन के आधार पर महागठबंधन जीत का दावा कर रहा था, लेकिन चार विधायकों के मतदान में शामिल नहीं होने से समीकरण बिगड़ गया और अंततः एनडीए के उम्मीदवार शिवेश कुमार जीत गए।

हार के बाद राजद का आरोप: धनबल का इस्तेमाल

चुनाव परिणाम आने के बाद महागठबंधन ने गंभीर आरोप लगाए। राजद विधायक कुमार सर्वजीत ने कहा कि अब पूरा देश देख रहा है कि राजनीति में धनबल का इस्तेमाल कौन करता है।

उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा ने धनबल का प्रयोग कर चुनाव को प्रभावित किया। साथ ही मतदान में शामिल नहीं होने वाले विधायकों पर नाराजगी जताते हुए कहा कि उन्होंने जनता के साथ धोखा किया है और अब उनके नाम के साथ हमेशा “पूर्व विधायक” का टैग जुड़ जाएगा।

जदयू का पलटवार: यह एनडीए की प्रचंड जीत

जदयू के कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा ने इसे एनडीए की बड़ी जीत बताया। उन्होंने कहा कि बिहार की जनता के सामने एक बार फिर संदेश गया है कि एनडीए मजबूत है और उसके सभी उम्मीदवारों ने शानदार जीत हासिल की है।

संजय झा ने कहा कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का अनुभव और नेतृत्व बिहार के लिए महत्वपूर्ण है। उन्होंने विपक्ष के आरोपों को बेबुनियाद बताते हुए कहा कि चुनाव पूरी तरह पारदर्शी तरीके से हुआ है। उन्होंने यह भी कहा कि अगर 41 वोटों का बंटवारा भी होता तो एनडीए के उम्मीदवार को 38 और महागठबंधन के उम्मीदवार को 37 वोट मिलते, इसलिए विपक्ष के आरोपों में कोई दम नहीं है।

बिहार की राजनीति में नए संकेत

राज्यसभा चुनाव के इस परिणाम ने बिहार की राजनीति में कई सवाल भी खड़े कर दिए हैं। महागठबंधन के चार विधायकों का मतदान में शामिल नहीं होना विपक्ष की एकजुटता पर सवाल खड़े कर रहा है। वहीं दूसरी तरफ एनडीए इस जीत को अपनी मजबूती और विपक्ष की कमजोरी के तौर पर पेश कर रहा है। आने वाले समय में यह नतीजा बिहार की सियासत में और भी बड़े राजनीतिक समीकरणों को जन्म दे सकता है।

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