गिद्धौर के सेवा गांव पहुंचकर पीड़ित परिवारों का बढ़ाया हौसला: जमुई जिले के सुप्रसिद्ध समाजसेवी गौरव सिंह राठौड़ ने देर संध्या गिद्धौर प्रखंड के सेवा गांव पहुंचकर सड़क दुर्घटना में मृत दो मजदूरों के परिजनों से मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने शोकाकुल परिवारों को ढांढस बंधाया और हर संभव सहायता का भरोसा दिलाया।
गौरव सिंह राठौड़ ने कहा कि “राजनीति नहीं बल्कि सेवा ही मेरा धर्म है। दुख की इस घड़ी में पीड़ित परिवारों के साथ खड़ा होना हम सभी की जिम्मेदारी है।”
हरदिमोह सड़क हादसे ने छीन ली दो परिवारों की खुशियां
गौरतलब हो कि बीते दिनों खैरा से अपने घर गिद्धौर लौटने के दौरान हरदिमोह स्थित सड़क पर हुए भीषण हादसे में सेवा गांव निवासी कैलाश रावत और मंटू रावत की दर्दनाक मौत हो गई थी। इस हादसे के बाद पूरे इलाके में शोक की लहर फैल गई।
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बताया जा रहा है कि दोनों मृतक मजदूरी कर अपने परिवार का पालन-पोषण करते थे। अचानक हुई इस घटना ने उनके परिवारों की जिंदगी को पूरी तरह झकझोर कर रख दिया है। घर के कमाने वाले सदस्यों के चले जाने से परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है।
“गरीब परिवारों का दर्द समझना जरूरी” : गौरव सिंह राठौड़
पीड़ित परिवारों से मुलाकात के दौरान गौरव सिंह राठौड़ भावुक नजर आए। उन्होंने कहा कि गरीब परिवारों के लिए इस तरह की घटनाएं सिर्फ हादसा नहीं बल्कि पूरी जिंदगी को तबाह कर देने वाला दर्द होती हैं।
उन्होंने कहा कि जिन लोगों ने अपने परिवार की जिम्मेदारी मजदूरी करके निभाई, आज उनके जाने के बाद परिवार असहाय महसूस कर रहा है। ऐसे समय में समाज और प्रशासन दोनों को आगे आना चाहिए।

जनप्रतिनिधियों की अनुपस्थिति पर उठाए सवाल
घटना के बाद स्थानीय जनप्रतिनिधियों की अनुपस्थिति को लेकर भी गौरव सिंह राठौड़ ने नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि जनता के दुख-दर्द में शामिल होना नेताओं की पहली जिम्मेदारी होनी चाहिए।
उन्होंने तीखा हमला करते हुए कहा कि
“कुछ नेता केवल माला पहनने और मंचों पर दिखने में व्यस्त हैं, लेकिन अपने क्षेत्र के लोगों का दर्द उन्हें दिखाई नहीं देता। यह बेहद शर्मनाक है।”
पीड़ित परिवारों को जल्द मुआवजा देने की मांग
स्थानीय ग्रामीणों और समाजसेवियों ने जिला प्रशासन से मृतकों के परिजनों को जल्द उचित मुआवजा देने की मांग की है। लोगों का कहना है कि दोनों परिवार आर्थिक रूप से कमजोर हैं और प्रशासन को तत्काल राहत उपलब्ध करानी चाहिए।
गांव के लोगों ने कहा कि यदि समय रहते मदद नहीं मिली तो परिवारों के सामने जीवनयापन का गंभीर संकट खड़ा हो जाएगा।
पूरे क्षेत्र में शोक, लोगों की आंखें हुई नम
सेवा गांव में मातमी सन्नाटा पसरा हुआ है। गांव के लोग अब भी इस दर्दनाक हादसे को याद कर भावुक हो रहे हैं। हर किसी की जुबान पर यही सवाल है कि आखिर इन परिवारों का सहारा इतनी जल्दी क्यों छिन गया।
ग्रामीणों ने कहा कि कैलाश रावत और मंटू रावत बेहद मेहनती और मिलनसार स्वभाव के व्यक्ति थे। उनकी मौत से गांव ने दो मेहनतकश लोगों को खो दिया है।
